Explained: US चुनाव में अब कमला बनाम तुलसी, ट्रंप ने दिग्गज भारतवंशी नेता को मुकाबले में क्यों उतारा?
US Elections 2024: संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रपति पद की रेस अब महत्वपूर्ण महीनों की तरफ बढ़ रही है और 10 सितंबर को रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस के बीच पहली बहस होने वाली है, और इस बहस के लिए दोनों ही नेताओं ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
जून में आयोजित CNN बहस में राष्ट्रपति जो बाइडेन के बुरी तरह से हारने के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए अगला बहस काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि 27 जून की बहस ने बाइडेन को चुनावी रेस से ही बाहर कर दिया था, लिहाजा कमला हैरिस के लिए जोखिम ज्यादा है।

लेकिन, डोनाल्ड ट्रंप के लिए 10 सितंबर की बहस ये तय करेगा, कि वो कमला हैरिस की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता को रोक पाते हैं या नहीं। पिछले कुछ सर्वें में देखा गया है, कि स्विंग स्टेट्स में कमला हैरिस बढ़त बना रही हैं, ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप अगर 10 सितंबर को चूकते हैं, तो उनका कैम्पेन खराब हो सकता है।
तुलसी गबार्ड से डोनाल्ड ट्रंप ने मांगी मदद
डोनाल्ड ट्रम्प के चुनावी कैम्पेन टीम से परिचित दो लोगों ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया है, कि पूर्व राष्ट्रपति ने हाल ही में अपने आवास मार-ए-लागो एस्टेट में चल रहे बहस से पहले के एक्सरसाइज सेशन में कमला हैरिस पर हमला और तेज करने के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की पूर्व नेता तुलसी गबार्ड को शामिल किया है।
तुलसी गबार्ड को टीम में उस वक्त शामिल करना पड़ा है, जब ट्रंप के चुनाव अभियान को कुछ बाधाओं का सामना करना पड़ा। क्योंकि ट्रंप कैम्पेन टीम के मैनेजर का मानना है, डोनाल्ड ट्रंप व्यक्तिगत टिप्पणियों के बजाए कमला हैरिस को आव्रजन और मुद्रास्फीति जैसे नीतिगत मुद्दों घेरें।
दूसरी तरफ, कमला हैरिस ने इस सप्ताह की शुरुआत में वाशिंगटन के ऐतिहासिक ब्लैक कॉलेज हॉवर्ड यूनिवर्सिटी में अपना पहला औपचारिक वाद-विवाद ट्रेनिंग सेशन आयोजित किया, जहां उन्होंने लगभग चार दशक पहले एक बहस में भाग लिया था, और वह ट्रंप के खिलाफ बहस के लिए एक अनुभवी स्टैंड-इन के साथ मिलकर काम कर रही हैं।
कई दिनों तक तारीख को लेकर आगे-पीछे होने के बाद, दोनों राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार आखिरकार 10 सितंबर को एबीसी न्यूज पर बहस के लिए सहमत हो गए हैं।
ट्रंप के बहस में तुलसी कैसे डालेंगी प्रभाव?
तुलसी गबार्ड, जिन्होंने 2020 के राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़ दी थी, उन्होंने खुद को ट्रम्प के समर्थकों के बीच एक सेलिब्रिटी स्टेटस हासिल किया है। लंबे समय से ट्रंप के साथ दोस्ताना रही हैं और उन्हें कुछ समय के लिए तो तुलसी गबार्ड को ट्रंप का रनिंग मेट तक माना जा रहा था।
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने तुलसी गबार्ड को इसलिए अपनी ट्रेनिंग देने के लिए बुलाया है, क्योंकि 2019 में डेमोक्रेटिक पार्टी से तुलसी गबार्ड और कमला हैरिस दोनों ही राष्ट्रपति चुनाव की रेस में थी और इस दौरान आयोजित डेमोक्रेटिक प्राइमरी बहस के दौरान तुलसी गबार्ड ने कमला हैरिस को बुरी तरह से हराया था और कई मुद्दों पर कमला हैरिस को चित कर दिया था। उस बहस को अमेरिका में आज भी यादगार बहस माना जाता है।
हालांकि, ट्रंप की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने कहा, कि पूर्व राष्ट्रपति "राजनीतिक इतिहास में सबसे अच्छे बहस करने वालों में से एक साबित हुए हैं, जैसा कि जो बाइडेन को उनके नॉकआउट झटके से पता चलता है। उन्हें पारंपरिक बहस की तैयारी की आवश्यकता नहीं है, लेकिन वे तुलसी गबार्ड जैसे सम्मानित नीति सलाहकारों और प्रभावी संचारकों से मिलना जारी रखेंगे, जो 2020 में बहस के मंच पर कमला हैरिस पर सफलतापूर्वक हावी रही थीं।"
बाइडेन के बाहर निकलने और कमला हैरिस के प्रवेश ने डेमोक्रेट्स को उत्साहित किया और 59 वर्षीय कमला हैरिस लिए जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। उनकी नस्लीय पहचान और नीतियों पर ट्रम्प की व्यक्तिगत टिप्पणियों ने कुछ हद तक लोगों को नाराज किया है, ऐसे में तुलसी गबार्ड से ट्रप को काफी मदद मिल सकती है।

2020 में तुलसी गबार्ड बनाम कमला हैरिस
तुलसी गबार्ड और कमला हैरिस, दोनों ने 2020 में राष्ट्रपति पद के लिए कैम्पेन किया था, लेकिन वो टिकट हासिल करने में नाकाम रही थी। डोनाल्ड ट्रंप की बहस में तुलसी गबार्ड की भागीदारी, रिपब्लिकन पार्टी के लिए फायदेमंद होने की उम्मीद है, क्योंकि तुलसी एक सांसद भी रह चुकी हैं और पिछले बहस के दौरान तुलसी गबार्ड ने कमला हैरिस को बतौर प्रॉसीक्यूटर किए गये कामों को लेकर कड़ी फटकार लगाई थी, जिसने कमला हैरिस के कैम्पेन को चुनावी पटरी से उतार दिया था।
गबार्ड ने कमला हैरिस पर "मारिजुआना (गांजा) उल्लंघन के लिए 1,500 से ज्यादा लोगों को जेल में डालने का आरोप लगाया था और फिर जब तुलसी ने कमला हैरिस से पूछा था, कि क्या आपे कभी गांजा पी है, तो कमला हैरिस हंस पड़ थीं।"
इसके अलावा तुलसी गबार्ड ने कमला हैरिस पर मौत की सजा पाए एक शख्स को लेकर सबूत छिपाकर रखने को लेकर भी घेरा था और कहा था, कि उस सबूत से मौत की सजा पाने वाले शख्स की जान बच सकती थी, लेकिन कमला ने उस सबूत को कोर्ट में पेश नहीं किया। जब कोर्ट ने कमला हैरिस को सबूत पेश करने के आदेश दिए, उसके बाद उन्हें सबूत पेश करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
बहस के बाद कमला हैरिस की टीम ने स्वीकार किया था, कि तुलसी की टिप्पणियों ने कमला हैरिस के कैम्पेन को एक ऐसे भंवर में फंसा दिया, जिससे उनका चुनाव अभियान निकल ही नहीं पाया।
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