खुद की चमक से निकली 'चिनगारी' में भस्म हुआ वो 'ग्रह'! जहां जीवन तलाश रहे थे साइंटिस्ट्स
अंतरिक्ष में मौजूद एक्सोप्लैनेट अन्य ग्रहों की तुलना में काफी अलग होते हैं। ये कई मायनों में पृथ्वी से मिलते हैं। लेकिन इनका उच्च तापमान ही अंत का कारण बन जाता है।

TRAPPIST-1 b: जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने एक ऐसे ग्रह की तस्वीरें कैद की, जिस पर पृथ्वी की तरह चट्टानी सतह मौजूद थी। यह ग्रह ट्रैपिस्ट -1 का हिस्सा है। आकार और कई मायनों में ट्रैपिस्ट-1 को उस कटेगरी में रखा गया है, जिसमें पृथ्वी जैसे ग्रहों का सबसे बड़ा बैच शामिल है। ये वो ग्रह हैं, जहां पर जीवन संभव हो सका है। लेकिन TRAPPIST-1 b के मामले में कुछ अलग ही है।
TRAPPIST-1 b सूर्य से कक्षीय दूरी की तुलना में 100वां ग्रह है, जिसे पृथ्वी के मुकाबले चार गुना ऊर्जा प्राप्त होती है। इसके विश्लेषण के लिए साइंटिस्ट्स की टीम ने वेब के मिड-इन्फ्रारेड इंस्ट्रूमेंट (MIRI) का इस्तेमाल किया। खगोलविदों ने अपनी शोध में दावा किया कि एक्सोप्लैनेट द्वारा उत्सर्जित किसी भी प्रकार के प्रकाश की अधिकता के ग्रह खत्म हो सकता है।
खगोलविदों ने अपने शोध निष्कर्ष में कहा कि TRAPPIST-1 b ऐसी ही श्रेणी का एक्सोप्लैनेट था। जेम्स वेब टेलीस्कोप द्वारा कलेक्ट किए गए डेटा विश्लेषण से पता चला कि इस ग्रह का कोई अपना अलग वातावरण नहीं है। जेम्स वेब टेलीस्कोप ने पाया कि ग्रह का कोई वातावरण नहीं है क्योंकि यह चट्टानी एक्सोप्लैनेट के तापमान को मापने के लिए देखा गया था। ग्रह के दिन के समय का तापमान लगभग 500 केल्विन है, जो 232 डिग्री सेल्सियस के करीब है।
एक्सोप्लैनेट TRAPPIST-1 b पर शोध कर रही नासा के एम्स रिसर्च सेंटर के साइंटिस्ट्स की टीम के खगोल शास्त्री थॉमस ग्रीन ने एक बयान में कहा, "इस तरह के मंद मध्य-अवरक्त प्रकाश को मापने के लिए किसी भी दूरबीन की संवेदनशीलता नहीं थी।" शोधकर्ताओं ने कहा कि ट्रैपिस्ट-1 जैसे छोटे सक्रिय सितारों की परिक्रमा करने वाले ग्रह जीवन का समर्थन करने के लिए आवश्यक वातावरण को बनाए रख सकते हैं। वातावरण में असंतुलन का मतलब वहां पानी नहीं होगा और ब्रह्मांडीय किरणों से कोई सुरक्षा भी नहीं होगी।
अमेरिका और फ्रांसीसी वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया किट्रैपिस्ट तारा इस ग्रह से 1,000 गुना अधिक चमकीला था। जिसकी कक्षीय दूरी सूर्य से पृथ्वी की तुलना में 100वां भाग है। सूर्य से अधिक नजदीक होने के कारण इसे पृथ्वी की तुलना में 4 गुना ऊर्जा मिलती है, जिसकी वजह ये अधिक चमकदार और गर्म रहता है।
साइंटिस्ट्स ने कहा कि मिल्की वे की तुलना में एक्सोप्लैनेट के चट्टानी ग्रह होने की संभावना दोगुनी है। लेकिन विकिरण की लगातार बमबारी के चलते इनके नष्ट होने के संभावना भी अधिक होती है। माना जा रहा है कि TRAPPIST-1 b ऐसा एक 'ग्रह' था, जो अधिक तापमान के कारण तबाह हुआ।












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