Alien News: अरुण ग्रह पर छिपे हो सकते हैं एलियंस, सबसे बदबूदार ग्रह को लेकर वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा
एलियंस को लेकर नासा भी रिसर्च कर रहा है और यूएस नेवी के कई पायलट्स दावा कर चुके हैं, कि उन्होंने एलियंस के विमान, जिन्हें यूएफओ को कहा जाता है, उन्हें देखा है।

Aliens on Uranus: एलियंस वास्तव में होते हैं या नहीं, इस बात को जानने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक लगातार रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन एलियंस के होने को लेकर अभी तक वास्तविक सबूत हाथ नहीं लगे हैं। दुनिया भर में एलियंस को लेकर कई थ्योरी हैं और अब नासा के साथ साथ अमेरिका की कई एजेंसियां एलियंस की तलाश में अभियान चला रही हैं। लेकिन, कई वैज्ञानिकों का मानना है, कि एलियंस यूरेनस यानि अरुण ग्रह के चंद्रमा पर छिपे हो सकते हैं। वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च के आधार पर संभावना जताई है, कि यूरेनस ग्रह के उपग्रह, जैसे की पृथ्वी का उपग्रह चंद्रमा है, उसी तरह से यूरेनस के चंद्रमा पर एलियंस का घर हो सकता है।

यूरेनस के चंद्रमा पर हैं एलियंस
आपको बता दें, कि यूरेनस ग्रह को सबसे ज्यादा बदबूदार प्लानेट कहा जाता है, क्योंकि यहां पर कई ऐसे गैस हैं, जो इसके वातावरण को सड़े हुए अंडों के जैसा बदबूदार बनाते हैं। यूरेनस ग्रह के 27 चंद्रमा हैं और वैज्ञानिकों का मानना है, कि इन 27 चंद्रमाओं में से 2 चंद्रमाओं पर ऐसे वातावरण हैं, कि वहां पर एलियंस का निवास स्थान हो सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है, कि उन दो चंद्रमाओं की सतह पर महासागर हो सकते हैं। वैज्ञानिकों ने पाया है, कि किसी सामग्री को यूरेनस के चंद्रमा के भीतर से ज्वालामुखी की तरह अंतरिक्ष में पंप किया जा रहा है। जिससे इस बात के संकेत मिलते हैं, कि यूरेनस के चंद्रमाओं मिरांडा और एरियल की सतहों के नीचे ज्वारीय फोर्स के द्वारा तरल अवस्था में भूमिगत जल का भंडार रखा गया है। जबकि, पृथ्वी पर इस अवस्था में माइक्रोब्स पाए जाते हैं। इससे इस बात के संकेत मिलते हैं, कि यूरेनस के दो चंद्रमाओं पर कोई ना कोई जिंदगी हो सकती है।

यूरेनस को लेकर किया गया है रिसर्च
यूरेनस ग्रह को लेकर किए गये रिसर्च से ये जानकारी हासिल हुई है। यूरेनस ग्रह के दो चंद्रमाओं पर जीवन होने का ये प्रस्ताव, 1986 में कैप्चर किए गए डेटा के नए विश्लेषण के आधार पर किया गया है, जब स्पेस प्रोब वायेजर-2 ने पृथ्वी से 1.98 अरब मील की दूरी पर स्थिति इस विशाल ग्रह का फ्लाई-बाय बनाया था। यह अब तक का एकमात्र अंतरिक्ष यान है, जिसने सौर मंडल के सबसे दूर स्थित यूरेनस ग्रह का दौरा किया है। बाल्टीमोर, मैरीलैंड यूएस में जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के भौतिकी प्रयोगशाला में एक टीम के नेतृत्व में रेडिएशन और चुंबकीय डेटा का विश्लेषण किया गया है, जो यह सुझाव देता है, कि मिरांडा और एरियल यूरेनस प्रणाली में प्लाज्मा कण जोड़ रहे हैं। आपको बता दें, कि प्लाज्मा एक विद्युत आवेशित गैस है, जो बिजली सहित विभिन्न रूपों में प्रकट हो सकती है। इस स्टडी के प्रमुख लेखक, अंतरिक्ष वैज्ञानिक इयान कोहेन ने कहा, कि "यह असामान्य नहीं है, कि ऊर्जावान कण मापन महासागर की दुनिया की खोज के लिए अग्रदूत हैं।" आपको ये भी बता दें, कि इसी तरह के डेटा ने वैज्ञानिकों को पहला सुराग दिया था, कि बृहस्पति का यूरोपा और शनि के एन्सेलाडस, जो इन दोनों के उपग्रह हैं, वहां पर समुद्र हो सकते हैं और बाद में उसकी पुष्टि भी हो गई थी।

एलियंस के रहने के लिए उपयुक्त जगह
वैज्ञानिकों का मानना है, कि ऐसे चंद्रमा एलियंस के जीवन की सबसे संभावित जगह हैं। इयान ने कहा, कि मौजूदा डेटा से इस बात को नहीं जाना जा सकता है, कि यूरेनस के दो चंद्रमाओं पर प्लाज्मा कणों के स्रोत क्या हैं। यह या तो एक वेपर प्लम हो सकता है - जैसा कि एन्सेलाडस पर देखा गया था, या फिर स्पटरिंग नामक एक प्रक्रिया का परिणाम हो सकता है, जहां उच्च-ऊर्जा कण एक सतह से टकराते हैं और न्यूटन के सहारे झूलते हुए गोले के समान अन्य सामग्री को अंतरिक्ष में बाहर फेंक देते हैं। इयान ने कहा, कि "अभी इसको लेकर 50-50 प्रतिशत संभावनाए हैं, कि चाहे वह सिर्फ एक हो या फिर कोई और।" उन्होंने कहा, कि अभी इस का पुख्ता पता लगाने के लिए नये सिरे से रिसर्च किए जाने की जरूरत है। इयान ने कहा, कि "जो डेटा हैं, वो काफी मजबूती से इस बात की ओर इशारा करते हैं, कि यूरेनस के चंद्रमा पर विशालकाय महासागर स्थित हैं।"

एलियंस पर किए जा रहे हैं रिसर्च
आपको बता दें, कि इस रिसर्च के बाद एक बार फिर एलियंस की तलाशी के लिए नये सिरे से अभियान चलाए जा सकते हैं। पिछले साल प्रमुख वैज्ञानिकों के एक पैनल ने सिफारिश की थी, कि नासा का अगला ग्रहीय मिशन फ़िरोज़ा जायंट के लिए 3.4 अरब पाउंड का निवेश किया जाएगा। हालांकि, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अभी तक पुष्टि नहीं की है, कि क्या यह परियोजना पर काम करेगी या नहीं। इयान ने कहा, "हम कुछ सालों से इस मामले पर रिसर्च कर रहे हैं, कि ऊर्जावान कण और विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र माप न केवल अंतरिक्ष पर्यावरण को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि प्लानेट साइंस रिसर्च में योगदान देने के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।"
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