ताइवान में जंग जैसे हालात के बीच चीन-अमेरिका के अधिकारियों की होगी मुलाकात, विश्वयुद्ध का खतरा टलेगा?
ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका आमने-सामने हैं। अमेरिका ने ताइवान को बचाने के लिए ब्रिटेन और जापान के साथ अपने एयरक्राफ्ट कैरिएय साउथ चायना सी में भेज दिए हैं।
ज्यूरिख/स्विटजरलैंड, अक्टूबर 06: ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका आमने-सामने आ गये हैं और ऐसी आशंका जताई जा रही है कि चीन किसी भी वक्त ताइवान पर हमला कर सकता है। वहीं, चीन का भोंपू ग्लोबल टाइम्स ने अमेरिका को धमकाया है कि अगर वो ताइवान को बचाने आता है, तो तीसरा विश्वयुद्ध हो जाएगा। ऐसे में काफी ज्यादा तनाव के बीच आज चीन और अमेरिका के टॉप डिप्लोमेट्स के बीच बातचीत होने वाली है और पूरी दुनिया की निगाहें उसी बातचीत पर टिकी हुई हैं, कि क्या तीसरे विश्वयुद्ध का खतरा टल जाएगा?

चीन-अमेरिका में बातचीत
चीन और ताइवान के बीच सैन्य तनाव चरम पर है और पिछले कुछ दिनों में ताइवान के वायु रक्षा क्षेत्र में चीन ने सौ से ज्यादा लड़ाकू विमानों को भेजकर अपना इरादा साफ कर दिया है। चीन ने पिछले एक हफ्ते में रिकॉर्ड संख्या में लड़ाकू विमानों के साथ साथ न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट भी ताइवान की वायुसीमा क्षेत्र में भेजे हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बुधवार को कहा कि, तनाव में उल्लेखनीय वृद्धि के बीच चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति पोलित ब्यूरो के सदस्य यांग जिची और स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन के बीच बैठक होगी। ज्यूरिख में बैठक ताइवान सहित कई मुद्दों पर बीजिंग और वॉशिंगटन के बीच बढ़े तनाव की पृष्ठभूमि में हो रही है।

मार्च में हुई थी डिप्लोमेट्स में 'लड़ाई'
बाइडेन सरकार के आने के बाद पहली बार इस साल मार्च में चीन और अमेरिकी अधिकारियों के बीच पहली बार मुलाकात हुई थी, जिसके बाद अब चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य यांग जीची के साथ अमेरिका के एनएसए जैक सुलिवन की यह पहली आमने-सामने की बैठक होगी, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन भी शामिल थे। उस मुलाकात के दौरान दोनों देशों के डिप्लोमेट्स के बीच लड़ाई की नौबत आ गई थी, और दोनों देशों के डिप्लोमेट्स के बीच काफी बहसबाजी हुई थी। जिसके बाद अब एक बार फिर से तनाव भरे माहौल में दोनों देशों के नेताओं के बीच मुलाकात होगी, लेकिन अब स्थिति और बिगड़ चुकी है, ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से बच सकेगा।

काफी आक्रामक हो चुका है चीन
पिछले महीने के आखिरी हफ्तों में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के बीच 'ऑकस' ग्रुप बनने के बाद चीन काफी ज्यादा भड़का हुआ है और वो लगातार ताइवान में अपने फाइटर जेट्स को भेज रहा है। सोमवार को चीन ने रिकॉर्ड संख्या में 56 लड़ाकू विमान ताइवान की एयरस्पेस में भेजे थे, जिसके बाद ताइवान की तरफ से भी एशिया में विनाश लाने की बात कही गई है। चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते में चीन कम से कम 150 से ज्यादा फाइटर जेट्स ताइवान के एयरस्पेस में भेज चुका है।

चीन-ताइवान में क्या है विवाद?
आपको बता दें कि, 1949 में चीन में कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ चायना ने आधुनिक चीन की घोषणा की थी और माओ से हारे हुए नेता अपनी जान बचाने के लिए ताइवान द्वीप पर भाग गये थे और बाद में उन्होंने ताइवान को अलग देश घोषित कर दिया था। जिसके बाद से ही लगातार चीन ताइवान पर कब्जा करना चाहता है। चीन का कहना है कि ताइवान उसका हिस्सा है और वो किसी भी हालत में ताइवान पर नियंत्रण स्थापित करके रहेगा। पिछले कुछ सालों में, जैसे जैसे अमेरिका की अर्थव्यवस्था कमजोर और चीन की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है, वैसे-वैसे चीन ने ताइवान पर कब्जा करने की कोशिश तेज कर दी है। ताइवान सरकार की तरफ से मंगलवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि 2025 तक चीन ताइवान पर हमला कर देगा।

सबसे गंभीर स्थिति में पहुंचा तनाव
ताइवान की राजधानी ताइपे में देश के रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन के साथ सैन्य तनाव पिछले 40 सालों में सबसे ज्यादा हो चुका है। ताइवान एक लोकतांत्रिक देश है, जो चीन को कतई पसंद नहीं है और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान की लोकतांत्रिक व्यवस्था को 'मजाक' तक कह दिया था। वहीं, ताइवान के रक्षा मंत्री चीउ कुओ-चेंग ने कहा कि, सेना में शामिल होने के बाद से 40 साल से ज्यादा वक्त में इस वक्त की स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है और अगर ताइवान स्ट्रेट में गलती करने का खतरा मंडरा रहा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ताइवान के रक्षा मंत्री ने आज देश की संसदीय समिति के सामने कहा है कि, 'एक सैन्य अधिकारी होने के नाते इस वक्त मेरे सामने 'आपात' स्थिति बन गई है।'

सैन्य खर्च बढ़ाएगा ताइवान
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ताइवान की संसदीय समिति ने देश के रक्षा मंत्री से करीब 8.6 अरब डॉलर के मिसाइल, युद्धपोत समेत घरेलू हथियार खरीदने के लिए विचार-विमर्स कर रही है। बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने बढ़े हुए तनाव के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस के उस बयान की आलोचना भी चीन के तरफ से की गई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ताइवान के पास चीन की उकसावे वाली सैन्य कार्रवाई से अमेरिका चिंतित है। चायनीज विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ ने कहा कि, ''ताइवान चीन का है और अमेरिका गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है। अमेरिकी पक्ष की प्रासंगिक टिप्पणियां एक-चीन सिद्धांत और चीन-अमेरिका ज्वाइंट कमेटी की शर्तों का गंभीर उल्लंघन करती हैं और एक बेहद गलत और गैर-जिम्मेदाराना संकेत भेजती हैं''।












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