भारत ने खोली चीन के झूठ की पोल, नहीं होनी थी जर्मनी में मोदी और जिनपिंग की कोई मीटिंग
बीजिंग। चीन ने गुरुवार को कहा है कि जिस तरह का माहौल है, उसमें राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच द्विपक्षीय मुलाकात सही नहीं है। गौरतलब है कि जर्मनी के हैम्बर्ग में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन से अलग दोनों नेताओं की मुलाकात होने वाली थी। पिछले एक माह से सिक्किम के डोकलाम में दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं। भारत ने अब इस पर साफ कर दिया है कि पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात पहले से तय ही नहीं थी।

एक माह से जारी है तनाव
चीन के विदेश मंत्रालय के कार्यालय की ओर से बयान में कहा गया था, 'राष्ट्रपति शी और पीएम मोदी के लिए द्विपक्षीय मुलाकात का यह समय सही नहीं है।' हैम्बर्ग में कल से जी-20 सम्मेलन की शुरुआत होने वाली है। भारत और चीन के बीच भूटान के पास डोकलाम में एक माह से तनाव की स्थिति है। यहां पर चीन की सेना ने सड़क बनाने का काम शुरू किया था और तब से ही तनाव के हालात बने हुए हैं। डोक ला भारतीय क्षेत्र का नाम है जिसे भूटान ने डोकलाम के तौर पर मान्यता दी हुई है। चीन दावा करता है कि यह उसका डोंगलाग क्षेत्र का हिस्सा है। कहा जा रहा था कि मोदी और शी सिक्किम में जारी तनाव के मद्देनजर हैम्बर्ग में मिलने वाले थे।
भारत ने खोली पोली
भारत की ओर से कहा गया है कि ऐसी किसी मुलाकात का कोई कार्यक्रम ही नहीं था। मीडिया रिपोर्ट्स ने सरकार से जुड़े उच्च सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि किसी भी पक्ष ने द्विपक्षीय मीटिंग के लिए कोई अनुरोध नहीं किया था इसलिए बातचीत रद्द होने का सवाल ही नहीं है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक चीनी विशेषज्ञ के हवाले से लिखा था कि चीन को सिक्किम में जारी तनाव को खत्म करने के लिए सेना का सहारा लेना चाहिए। उनका कहना था कि अगर भारत 62 की जंग से सबक लेने को तैयार नहीं है तो सेना का प्रयोग ही एकमात्र रास्ता बचता है। चीन की ओर से आई इस धमकी पर रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने जवाब दिया था कि चीन को यह समझ लेना चाहिए कि आज 2017 का भारत 1962 के भारत से काफी अलग है।












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