Tibet Earthquake Update: तिब्बत में भूकंप की विनाशकारी तबाही! 126 की मौत-188 घायल, भारत-नेपाल भी प्रभावित
Tibet Earthquake Update: क्या होता है जब धरती हिलती है? तिब्बत में आए भूकंप ने ऐसा ही खौफनाक मंजर पेश किया। 7 जनवरी, मंगलवार को आए छह भूकंपों ने न सिर्फ तिब्बत, बल्कि नेपाल, भारत और भूटान तक लोगों को दहशत में डाल दिया। इन झटकों की वजह से तिब्बत में 126 लोगों की मौत हो गई, जबकि 188 से ज्यादा लोग घायल हो गए।
तिब्बत के टिंगरी काउंटी में 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। भूकंप इतना जोरदार था कि इसकी गूंज नेपाल, भारत और भूटान तक सुनाई दी। सुबह-सुबह आए इन झटकों ने घरों को मलबे में बदल दिया, जिससे कई परिवार बेघर हो गए।
चीनी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भूकंप के केंद्र के पास कई इमारतें गिर गईं। इन झटकों से नेपाल की राजधानी काठमांडू और भारत के कई शहरों, जैसे दिल्ली-एनसीआर, बिहार, असम और पश्चिम बंगाल में भी धरती कांप उठी।

क्यों आते हैं यहां बार-बार भूकंप?
टिंगरी काउंटी उस इलाके में स्थित है जहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं। यह इलाका भूगर्भीय रूप से बहुत संवेदनशील है। प्लेटों के इस टकराव से न केवल भूकंप आते हैं, बल्कि हिमालय की ऊंची चोटियां भी समय-समय पर बदलती रहती हैं।
बचाव कार्य और संवेदनाएं
तिब्बत में राहत और बचाव कार्य जारी हैं। मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए टीमें दिन-रात जुटी हुई हैं। भारत सरकार ने भी इस त्रासदी पर गहरी संवेदना व्यक्त की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "हमारी प्रार्थनाएं और संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं।"
नेपाल और भारत में महसूस हुए झटके
नेपाल में भूकंप के झटके इतने तेज थे कि काठमांडू में लोग अपने घरों से बाहर आ गए। एक स्थानीय निवासी, मीरा अधिकारी, ने बताया, "मैं सो रही थी और लगा कि मेरा बच्चा बिस्तर हिला रहा है। लेकिन जब खिड़कियां हिलने लगीं, तब मुझे समझ आया कि यह भूकंप है। मैं तुरंत अपने बच्चे को लेकर घर से बाहर भागी।"
भारत के कई हिस्सों, जैसे बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में भी भूकंप महसूस किया गया। खासकर दिल्ली-एनसीआर में लोग डर के कारण घरों से बाहर निकल आए।
तिब्बत में भूकंप की स्थिति
पिछले पांच वर्षों में, तिब्बत के शिगात्से शहर के आसपास 200 किलोमीटर के क्षेत्र में 29 भूकंप आ चुके हैं। हालांकि, मंगलवार को आए भूकंप ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह इलाका भूगर्भीय दृष्टि से खतरनाक है और यहां ऐसी घटनाएं भविष्य में भी हो सकती हैं।
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