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Earthquake Richter Scale: क्या होता है रिक्टर स्केल? कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता? यहां जानें सबकुछ

Earthquake Richter Scale: नेपाल में मंगलवार, 7 जनवरी 2025 की सुबह, 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। इसके झटके दिल्ली-एनसीआर, उत्तर भारत और बिहार समेत कई इलाकों में महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र नेपाल-तिब्बत सीमा के पास लोबुचे से 93 किमी उत्तर-पूर्व में था। राहत की बात यह है कि अभी तक किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।

यह नए साल में तीसरी बार है जब नेपाल भूकंप का केंद्र बना है। 2 और 3 जनवरी को भी वहां झटके महसूस किए गए थे। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि भूकंप की तीव्रता कैसे मापी जाती है? और रिक्टर स्केल क्या है? आइए, इसे सरल भाषा में समझते हैं...

Earthquake Richter Scale

रिक्टर स्केल क्या है?

रिक्टर स्केल भूकंप की तीव्रता मापने का एक मानक पैमाना है। इसे 1935 में अमेरिकी वैज्ञानिक चार्ल्स फ्रांसिस रिक्टर और उनके सहयोगी बेनो गुटेनबर्ग ने विकसित किया था। इस पैमाने का उपयोग भूकंप के दौरान उत्पन्न ऊर्जा की गणना के लिए किया जाता है।

कैसे काम करता है रिक्टर स्केल?

  • यह एक लॉगरिदमिक पैमाना है।
  • हर स्तर (जैसे 4 से 5) पर तीव्रता 10 गुना अधिक होती है।
  • साथ ही, ऊर्जा 32 गुना ज्यादा होती है।
  • उदाहरण के लिए, अगर एक भूकंप 5.0 तीव्रता का है और दूसरा 6.0 तीव्रता का, तो दूसरा भूकंप पहले से 10 गुना ज्यादा कंपन और 32 गुना अधिक ऊर्जा छोड़ता है।


भूकंप की तीव्रता कैसे मापी जाती है?

भूकंप मापने के लिए वैज्ञानिक सिस्मोग्राफ नामक उपकरण का उपयोग करते हैं। यह पृथ्वी की गति और कंपन को रिकॉर्ड करता है...
1- सिस्मोग्राफ का उपयोग : सिस्मोग्राफ एक संवेदनशील उपकरण है, जो भूकंप के दौरान पृथ्वी के कंपन को ग्राफ के रूप में रिकॉर्ड करता है। यह दिखाता है कि भूकंप की लहरें कितनी तेज और कितनी दूर तक फैली हैं।

2- भूकंपीय लहरों का विश्लेषण
भूकंप के दौरान तीन प्रकार की लहरें उत्पन्न होती हैं...

  • P लहरें (प्राथमिक लहरें): सबसे तेज होती हैं और पहले दर्ज की जाती हैं।
  • S लहरें (संप्रदायिक लहरें): धीमी होती हैं लेकिन नुकसान ज्यादा करती हैं।
  • सतही लहरें: ये धरातल पर चलती हैं और भारी क्षति का कारण बनती हैं।

3- लॉगरिदमिक गणना : सिस्मोग्राफ द्वारा रिकॉर्ड की गई अधिकतम वेग (Amplitude) के आधार पर भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर तय की जाती है।

क्रम. रिएक्टर स्केल की तीव्रता प्रभाव
1
1.0 - 2.9 यह बहुत हल्का भूकंप है। इसे लोग महसूस नहीं कर पाते, लेकिन सिस्मोग्राफ इसे रिकॉर्ड कर सकता है।
2
3.0 - 3.9 यह हल्का भूकंप होता है। कभी-कभी इसे लोग महसूस कर सकते हैं, लेकिन इससे कोई नुकसान नहीं होता।
3
4.0 - 4.9 मध्यम भूकंप। खिड़कियों की कंपन या छोटे घरों में हल्का नुकसान हो सकता है।
4
5.0 - 5.9 थोड़ा गंभीर भूकंप। कमजोर संरचनाओं को नुकसान पहुंच सकता है।
5
6.0 - 6.9 मजबूत भूकंप। अच्छी तरह से बनी इमारतें भी प्रभावित हो सकती हैं। कमजोर ढांचों को गंभीर नुकसान।
6
7.0 - 7.9 बहुत मजबूत भूकंप। बड़े क्षेत्र में गंभीर नुकसान और बड़ी इमारतों को भारी हानि।
7
8.0 और उससे अधिक अत्यंत विनाशकारी। पूरे शहर और बड़े क्षेत्र को गंभीर नुकसान, जान-माल की भारी हानि।

नेपाल में भूकंप: सतर्कता जरूरी

नेपाल जैसे भूकंप-संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्क रहना बहुत जरूरी है। हिमालयन सिस्मिक बेल्ट में स्थित होने के कारण यह क्षेत्र टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल का केंद्र है।

भूकंप के दौरान क्या करें?

  • खुले स्थान पर जाएं: सबसे सुरक्षित विकल्प होता है।
  • मजबूत फर्नीचर के नीचे छिपें: खिड़कियों और भारी सामान से दूर रहें।
  • लिफ्ट का इस्तेमाल न करें।
  • आपातकालीन किट रखें: टॉर्च, पानी, और प्राथमिक चिकित्सा किट हमेशा तैयार रखें।

ये भी पढ़ें- Nepal Earthquake: नेपाल में 7.1 तीव्रता का भूकंप, उत्तर भारत तक महसूस हुए झटके, 7 दिन में तीसरी बार कांपी धरती

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