मिस्र के अथाह सागर में लापता शहर मिला, दुर्लभ खजाना और सैकड़ों सालों पुराने अनमोल फल की तलाश पूरी
यूरोपीयन इंस्टीट्यूट फॉर अंडरवाटर आर्कियोलॉजी (IEASM) की टीम ने इस गुप्त शहर की खोज करने में कामयाबी हासिल की है।
काहिरा, अगस्त 04: मिस्र के अथाह समुद्र में लापता हो चुके एक शहर की खोज की गई है। ये शहर सैकड़ों साल पहले गायब हो गया था, लेकिन इस शहर से जो सामान मिले हैं, उसे देख पूरी दुनिया हैरान हो गई है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि लुप्त हो चुके इस अतिप्राचीन शहर की खोज मिस्र के तट से दूर थोनिस-हेराक्लिओन में की गई है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि समुद्र में गायब हो चुके इस शहर से जो सामान मिले हैं, वो दुर्लभ और हैरान करने वाले हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस शहर को खोज किसी खजाने से कम नहीं है। समुद्र के अंदर से विशालकाय मंदिर का बड़ा हिस्सा मिला है, जिसमें रखा गया नाव भी पुरातत्वविदों के हाथ लगा है।

लुप्त शहर की समुद्र में खोज
यूरोपीयन इंस्टीट्यूट फॉर अंडरवाटर आर्कियोलॉजी (IEASM) की टीम ने इस गुप्त शहर की खोज करने में कामयाबी हासिल की है। इस टीम का नेतृत्व फ्रांसीसी आर्कियोलॉजिस्च फ्रेंक गोडियो कर रहे थे और इस शहर की तलाश पिछले कई सालों से की जा रही थी। आईईएएसएम ने पिछले महीने एक बयान में कहा था कि उनका मिशन, मिस्र के पर्यटन और पुरावशेष मंत्रालय के सहयोग के साथ शुरू किया गया था और अबूकिर की खाड़ी में थोनिस-हेराक्लिओन की साइट पर "बेहद दिलचस्प परिणाम" सामने आए हैं।

समुद्र से अद्भुत चीजें बरामद
उन्होंने कहा कि ''थोनिस-हेराक्लिओन की साइट पर पुरातत्वीय "खजाने" की खोज की गई है, जिसमें ग्रीक चीनी मिट्टी की चीज़ें और फलों से भरी 2,400 साल पुरानी टोकरियां बरामद की गई हैं। आपको बता दें कि 331 ईसा पूर्व में सिकंदर महान द्वारा अलेक्जेंड्रिया की स्थापना से पहले थोनिस-हेराक्लिओन मिस्र का सबसे बड़ा भूमध्यसागरीय बंदरगाह था। रिपोर्ट के मुताबिक ये शहर पूरी तरह से समुद्र के अंदर डूब चुका था और उत्तर-पूर्वी प्रवेश नहर के साथ खोजी टीम को एक बड़े टुमुलस के अवशेष मिले हैं। आपको बता दें कि ग्रीक में टुमुलस का मतलब श्मशान घाट होता है। खोजी टीम आईईएएसएम ने कहा कि ''यह चौथी शताब्दी ईसा पूर्व की शुरुआत में यहां पर "शानदार अंत्येष्टि'' प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता था।

काफी बड़ा है अंत्येष्ठि क्षेत्र
IEASM ने कहा, ट्यूमुलस करीब 60 मीटर (197 फीट) लंबा और आठ मीटर (26 फीट) चौड़ा है, और चारों तरफ से आइलैंड्स से घिरा हुआ है। ये एक तरह से द्वीप की तरफ दिखता है। रिसर्च टीम के प्रमुख गोडियो ने कहा कि, "हर जगह हमें जली हुई सामग्री के सबूत मिले हैं, जैसा कि आईईएएसएम बयान में कहा है। "ऐसा लगता है कि वहां शानदार समारोह हुए होंगे और इस जगह को सैकड़ों सालों से सील कर दिया गया होगा। क्योंकि हमें चौथी शताब्दी ईसा पूर्व की शुरुआत से बाद की कोई वस्तु नहीं मिली है, भले ही हो सकता है उसके बाद ये शहर सालों तक जिंदा रहा हो''। इस लुप्त शहर की पड़ताल में पता चला है कि अंत्येष्ठि क्रिया के दौरान भगवान को प्रसाद चढ़ाया जाता होगा। इसके साथ ही पुरातत्वविदों ने एक और आश्चर्यजनक खोज की है।

श्मशान से दुर्लभ फल बरामद
आईईएएसएम की खोजी टीम ने कहा है कि इस अंत्येष्ठि क्षेत्र से दुर्लभ चीजों का जखीरा बरामद हुआ है, जिसपर यकीन करना मुश्किल है। वैज्ञानिकों को इस क्षेत्र से फलों की टोकरियां मिली हैं, जिसमें अंगूर और अंगूर के बीज भरे हुए मिले हैं। ये फल अभी भी ताजा हैं। इसके अलावा इस क्षेत्र से अफ्रीकी तार के पेड़ का फल भी मिला है, जो अकसर कब्रों पर पाया जाता है। खोजी टीम ने कहा है कि "ये तमाम चीजे सैकड़ों सालों से पानी के भीतर अछूते रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि जैसे उन्हें एक सुरक्षित भूमिगत कमरे में रखा गया हो, या फिर भगवान पर प्रसाद चढ़ाने के बाद उन्हें ऐसे ही दफन कर दिया गया होगा''

ग्रीक व्यापारी और भाड़े के सैनिक
IEASM की खोजी टीम ने कहा है कि इस शहर की तफ्तीश में पता चला है कि यहां पर ग्रीक व्यापारी की मौजूदगी होती होगी और यहां पर भाड़े के सैनिक पहरेदारी करते होंगे और ये शहर काफी ज्यादा खूबसूरत रहा होगा। ये सैनिक थोनिस-हेराक्लिओन शहर में रहते थे, जो नील नदी की कैनोपिक शाखा के मुहाने पर मिस्र के प्रवेश द्वार को नियंत्रित करता थे। फारोनिक काल के अंत में यूनानियों को शहर में बसने की अनुमति दी गई थी और अमुन के विशाल मंदिर के करीब उहोंने अभयारण्यों का निर्माण किया था। हालांकि, वैज्ञानिकों ने कहा है कि समुद्र में ज्वार की लहरों के बाद कई भूकंप आए होंगे, जिसकी वजह से इस शहर का 110 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा समुद्र के नीचे ढह गया होगा और इसके साथ थोनिस-हेराक्लिओन और कैनोपस शहर भी भूकंप के चपेट में आ गये होंगे। आपको बता दें कि आईईएएसएम ने साल 2000 में थोनिस-हेराक्लिओन और 1999 में केनपोस शहर को फिर से खोजने में कामयाबी हासिल की थी और अब इस शहर का दूसरा हिस्सा समुद्र के अंदर से मिला है।
समुद्र में कैसे मिला शहर ?
आईईएएसएम के मुताबिक, उनकी टीम मिशन-2021 के तहत लगातार इस लापता शहर की तलाश कर रहे थे और फिर उन्हें विशालकाय लंबी नाव पानी के नीचे डूबा हुआ मिला, जो अमुन के मंदिर से बड़े समुद्री ज्वार और भूंकप की चपेट में आने के बाद डूब गया था। आईईएएसएम ने कहा कि दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में एक "प्रलयकारी घटना" ने पूरे क्षेत्र को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया था और यहां मौजूद मंदिर के दक्षिण हिस्से के साथ बहने वाली नहर में एक लंबी नाव को बांध दिया गया था। खोज के दौरान वैज्ञानिकों ने देखा कि मंदिर के तमाम हिस्से टूटकर नीचे गिर गये थे, लेकिन मंदिर में फंसा नाव पूरी तरह से सुरक्षित था। जिसे अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर बाहर निकाला गया है। खोजी टीम का मानना है कि जो चीजें समुद्र के अंदर से मिली हैं, वो अत्यधिक दुर्लभ हैं और मिस्र के प्राचीन जीवन को समझने में इससे काफी मदद मिलेगी।












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