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दुनिया की ये पाँच घटनाएं, जो किसी चमत्कार से कम नहीं

हादसे
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एक दुखद घटना के बाद कई लोगों के ज़ेहन में ये बात आती है कि क्या इससे बुरा भी कुछ हो सकता था.

कोलंबिया के जंगलों में एक विमान दुर्घटना के बाद खो गए चार बच्चे 40 दिनों के बाद सुरक्षित मिल गए. इस बात ने दुनिया को हैरान कर दिया. इसी दुर्घटना में उनकी माँ की मौत हो गई.

नौ, चार 13 और एक साल के ये इन बच्चे पिछले हफ़्ते शुक्रवार को सेना को एक खोज अभियान में मिले थे. इनमें डिहाईड्रेशन और कीड़ों के काटने के निशान थे. हालांकि इनकी हालत ठीक थी.

इतिहास में कई ऐसे हादसे हुए हैं, जिसमें लोगों का बचना मुश्किल था लेकिन वो सुरक्षित निकल आए.

ऐसे ही चार हादसों पर नज़र डालते हैं:

1. एंडीज़ की त्रासदी

उरुगुए का विमान एंडीज़ के पहाड़ों में गिर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. दो महीने बाद 16 लोगों ज़िंदा निकाले गए.
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उरुगुए का विमान एंडीज़ के पहाड़ों में गिर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. दो महीने बाद 16 लोगों ज़िंदा निकाले गए.

13 अक्टूबर 1972 को उरुग्वे के ओल्ड क्रिस्चन्स क्लब ऑफ मॉन्टेवीडियो के खिलाड़ी अपने परिवार के साथ चिली के सैंटिएगो जा रहे थे. वहाँ उन्हें दूसरे देशों के साथ टूर्नामेंट खेलना था.

लेकिन एंडीज़ के पहाड़ों में उनका प्लेन दुर्घटनाग्रस्त हो गया.

बचाव दलों ने जब राहत बचाव कार्य शुरू किया तो उन्हें ठीक से पता भी नहीं था कि विमान किस जगह पर गिरा है. बर्फ़ीले पहाड़ों में कई दिनों की खोजबीन के बाद उन्हें जब कुछ नहीं मिला तो उन्होंने अभियान को रोक दिया.

हादसा
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दुर्घटना के समय विमान में सवार 45 में से 12 लोगों की मौत हो गई थी.

अगले कुछ दिनों में कुछ और लोगों को जान गंवानी पड़ी. कुछ दिनों के बाद एक बर्फ़ीले तूफ़ान में आठ और लोगों की मौत हो गई.

विमान में जब खाना ख़त्म हो गया तो लोगों ने मर चुके लोगों का मांस खाना शुरू कर दिया.

उसी साल दिसंबर में दो रग्बी प्लेयर रॉबर्ट कैनेसा और फर्नान्डो पराडो ने मदद के लिए पैदल चलना शुरू किया. दस दिनों के बाद उनकी मेहनत रंग लाई. 14 और लोगों को वहां से बचाया जा सका.

इसे भी पढ़ें- प्लेन हादसे के बाद कोलंबिया के घने जंगलों में 40 दिन तक कैसे ज़िंदा रहे ये चार बच्चे?

2. मेक्सिको के 'मिरेकल बच्चे'

भूकंप
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भूकंप

19 सितंबर 1985 को मेक्सिको सिटी में 8.1 की तीव्रता के भूकंप में सैंकड़ों इमारतें ध्वस्त हो गईं. इस आपदा ने हज़ारों लोगों की जान ले ली.

कितने लोगों की मौत हुई इसकी सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ये संख्या 3692 हैं लेकिन माना जाता है कि मरने वालों की संख्या 10 हज़ार तक हो सकती है.

कई दिनों के की खोजबीन के बाद बचाव टीमों ने कई नवजातों को सुरक्षित निकाला जिन्हें 'मिरेकल बेबी' कहा गया.

इनमें से एक थे जीसस फ्रांन्सिस्को जिन्हें 'लिटिल अर्थक्वेक' या 'लिटिल मिरेकल' कहा गया.

भूकंप से समय वो अपनी मां के गर्भ में ही थे. उनकी दादी ने एक भूकंप के दौरान उनकी मां के पेट को एक ब्लेड से काट कर उन्हें बाहर निकाल लिया. इस हादसे में उनकी मां की मौत हो गई.

इसे भी पढ़ें- कोलंबिया: अमेज़न के जंगलों में 40 दिन से लापता बच्चों को कैसे खोजा गया?

3. 'हम 33 लोग सुरक्षित हैं.'

चिली
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पाँच अगस्त 2005 को चिली के एटाकामा रेगिस्तान में एक कॉपर खदान धंस जाने से 33 लोग 700 मीटर की गहराई में दब गए.

बचाव अभियान की शुरुआत में लग रहा था कि किसी के बचने की उम्मीद कम है, लेकिन फिर राहत बचाव कार्य में जुटे लोगों ने पाया कि वहाँ फंसे हुएं लोग ऐसी जगह पर थे, जहां उनके ज़िंदा होने की उम्मीद कायम थी.

22 अगस्त को पता चल पाया कि वो कहां पर थे और उन्होंने नीचे से एक मेसेज भेजा - "हम 33 लोग शेल्टर में सुरक्षित हैं."

बचाव दल को ड्रिलिंग मशीनों का ध्यानपूर्वक इस्तेमाल कर वहाँ पहुँचना था, ये सुनिश्चित करते हुए कि वहाँ फंसे हुए लोगों को किसी तरह की हानि न हो.

प्लान था कि वहां एक कैप्सूल भेजा जाए, जो एक एक कर सभी को बाहर निकाले.

आख़िरकार 69 दिनों के बाद उन लोगों को सुरक्षित निकाला जा सका.

4. थाईलैंड की गुफाओं में फंसे बच्चे

बच्चों की मदद के लिए दुनिया के कई देशों से मदद मिली
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बच्चों की मदद के लिए दुनिया के कई देशों से मदद मिली

23 जून 2018 को थाईलैंड के उत्तरी प्रांत चैंग राई में 12 बच्चे अपने फ़ुटबॉल कोच के साथ सैर पर निकले.

प्रैक्टिस जब ख़त्म हुई तो वो बारिश के कारण पानी से भरे धान से खेतों से होते हुए पहाड़ के पास पहुंचे. उन्हें थैम लुगांग गुफा के अंदर जाना था, जो कि एक मशहूर टूरिस्ट स्थल है.

वो सिर्फ़ फ्लैश लाइट लेकर अंदर गए. उन्हें और किसी चीज़ की ज़रूरत भी नहीं थी क्योंकि उनका प्लान वहां सिर्फ़ एक घंटे रुकने का था.

लेकिन अचानक गुफा में पानी भर गया और वो बाहर नहीं निकल पाए. खुद को पानी से बचाने के लिए उन्हें खुद को गुफा के और अंदर ले जाना पड़ा. उन लोगों ने पत्थरों को तोड़कर अपने लिए एक प्लैटफ़ॉर्म बनाया जो कि मुख्य द्वार से क़रीब 4 किलोमीटर अंदर था.

दुनियाभर के केव डाइवर्स उन बच्चों को बचाने वहां पहुंचे. नौ दिनों के अंधकार के बार आखिरकार उन बच्चों ने बाहर की रोशनी देखी.

इसे भी पढ़ें- थाईलैंड: गुफ़ा बचाव अभियान से जुड़े 7 अहम सवाल और जवाब

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