यासीन मलिक के समर्थन में उतरा पाकिस्तान, बौखलाहट में भारत को लेकर कही ये बात
इस्लामाबाद, 19 मईः कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को टेरर फंडिंग मामले में दोषी पाए जाने के बाद पाकिस्तान सरकार आगबबूला हो गई है। यासीन मलिक को सजा सुनाए जाने के बाद शहबाज शरीफ की सरकार ने भारत से खिलाफ गहरी नाराजगी जताई है। पाकिस्तान ने भारतीय दूतावास प्रभारी को इस्लामाबाद में तलब कर उन्हें एक आपत्ति संबंधी दस्तावेज सौंपा है। पाकिस्तान सरकार ने यासीन मलिक पर 'मनगढंत आरोप' लगाए जाने की निंदा की। इसको साथ ही पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों से मांग की है कि वे यासिन मलिक के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर भारत के खिलाफ ऐक्शन लें।

पाकिस्तान सरकार ने जताई चिंता
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि कश्मीरी हुर्रियत नेता यासीन मलिक फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में कैद हैं। भारतीय दूतावास को पाकिस्तान की गंभीर चिंता से अवगत कराया गया है। भारत सरकार कश्मीरी नेतृत्व की आवाज को दबाने के लिए उन्हें फर्जी मामले में फंसा रही है। इसके साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारत सरकार से यासीन मलिक को सभी 'निराधार' आरोपों से बरी करने और जेल से तत्काल रिहा करने की मांग की ताकि वह अपने परिवार से मिल सके और अपने स्वास्थ्य में सुधार कर सामान्य जीवन व्यतीत कर सके।

कई आपराधिक मामलों में पाया गया दोषी
आपको बता दें कि यासीन मलिक पर टेरर फंडिग के अलावा आपराधिक साजिश रचने, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के साथ कश्मीर में शांति भंग करने का भी आरोप है। यासीन मलिक को दिल्ली की एनआईए कोर्ट ने आतंकवाद और 2017 में कश्मीर घाटी में अलगाववादी गतिविधियों से संबंधित एक मामले में दोषी करार दिया था। उसे गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम का भी दोषी पाया गया है।

खुद पर लगे आरोपों को चुनौती नहीं देगा मलिक
एनआईए की कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करने के दौरान कहा था कि यासिन मलिक ने स्वतंत्रता आंदोलन के नाम पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए दुनिया भर से फंडिग जुटाई थी। बीते सप्ताह एनआईए कोर्ट में यासीन मलिक ने कहा था कि वह यूएपीए की धारा 16 (आतंकवादी गतिविधि), 17 (आतंकवादी गतिवधि के लिए धन जुटाने), 18 (आतंकवादी कृत्य की साजिश रचने), व 20 (आतंकवादी समूह या संगठन का सदस्य होने) और भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) व 124-ए (देशद्रोह) के तहत खुद पर लगे आरोपों को चुनौती नहीं देना चाहता।

मिल सकती है आजीवन कारावास की सजा
यासीन मलिक ने माना था कि वो आतंकी गतिविधियों में शामिल था। उसने आपराधिक साजिशें भी रची थीं और उसपर लगीं तमाम धाराएं सही हैं। यासीन मलिक के खिलाफ जैसे मामले दर्ज हैं उसे आजीवान कारावास की सजा मिल सकती है। आपको बता दें कि यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का अध्यक्ष और अलगाववादी नेता है, जो पाकिस्तान के इशारे पर काम करता था। यासीन मलिक 90 के दशक में कश्मीर में हुए कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार और पलयान में शामिल रहा है।

रक्षामंत्री की बेटी के अपहरण का है आरोप
यासीन मलिक पर भारत सरकार के तत्कालनी रक्षामंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण का भी आरोप लगा था। जनवरी, 1990 में यासीन मलिक कश्मीर के रावलपोरा में एयरफोर्स के 4 अफसरों की हत्या में भी शामिल था। यासीन मलिक ने जम्मू कश्मीर लिबरेशन फोर्स के आतंकियों के साथ इंडियन एयरफोर्स के स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना समेत 4 अफसरों की गोली मारकर हत्या कर दी थी।












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