पीरियड्स में हुए दर्द के चलते बच्ची ने ली थी छुट्टी, स्कूल ने नहीं की स्वीकार, पिता ने उठाया ये कदम

आधुनिक युग में भी महावारी, मासिक धर्म या पीरियड्स को कई देशों में एक टैबू समझा जाता है, जिसकी वजह से महिलाओं को इस दौरान होने वाली समस्याओं को लेकर खुले मंच पर बात ही नहीं की जाती।

लंदन, 5 अक्टूबर। आधुनिक युग में भी महावारी, मासिक धर्म या पीरियड्स को कई देशों में एक टैबू समझा जाता है, जिसकी वजह से महिलाओं को इस दौरान होने वाली समस्याओं को लेकर खुले मंच पर बात ही नहीं की जाती। हालांकि मासिक धर्म या पीरियड्स में एक महिला को जितना कष्ट होता है उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। लेकिन धीरे-धीरे ही सही लोग इस विषय पर सरेआम बोलने लगे हैं और इसे गंभीरता से भी लिया जा रहा है। अब इस खबर को ही ले लीजिए। ब्रिटेन के कॉर्नवाल में रहने वाले तीन बच्चियों के पिता ने अपनी बेटी को पीरियड्स के दौरान हुए दर्द तो समझा और आज वह इसे गंभीरता से लेने और पीरियड्स को स्कूल से छुट्टी का वैध कारण माने जाने का अभियान चला रहा है।

इस घटना से हैरान रह गये मार्कस

इस घटना से हैरान रह गये मार्कस

दरअसल हुआ यह की मार्कस एलेन (37) उस समय हैरान रह गए जब उन्हें पता चला कि उनकी 13 वर्षीय बेटी इजी जो पीरियड्स में होने वाले दर्द के कारण स्कूल नहीं जा सकी थी, को स्कूल द्वारा अवैध रूप से गैर हाजिर बताया गया। फिर क्या था मार्कस से रहा नहीं गया और उन्होंने इसके खिलाफ एक अभियान चलाने की ठान ली। उनकी मांग है कि मासिक धर्म या पीरियड्स को भी अन्य बीमारियों की तहर ही माना जाना चाहिए। मार्कस की Change.org याचिका को खूब समर्थन मिल रहा है और अभी तक उनकी मांग को 32,000 लोगों का समर्थन मिल चुका है। उनका लाक्ष्य इस मांग के लिए 35,000 से अधिक लोगों के हस्ताक्षर लेने का है।

पीरियड्स में ली गई छुट्टी वैध क्यों नहीं

पीरियड्स में ली गई छुट्टी वैध क्यों नहीं

खबरों के अनुसार जब मार्कस ने ईजी के स्कूल में फोन कर यह पता लगाने की कोशिश की कि उनकी बेटी क्यों अनुपस्थित है तो स्कूल ने कहा कि उसे पीरियड्स को दौरान होने वाला दर्द हो रहा था। इसलिए उसने छुट्टी ले ली। मार्कस उस समय हैरान रह गये जब स्कूल ने कहा कि पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द छुट्टी लेने का कोई वाजिब कारण नहीं है और इसलिए उनकी छुट्टी को अनधिकृत माना जाएगा। इसके बाद मार्कस ने स्कूल से पूछा कि यदि उनकी बच्ची को कोई और परेशानी जैसे की माइग्रेन वगैरह होता तो? उनके इस प्रश्न पर स्कूल ने कहा कि फिर ईजी की छुट्टी को वैध छुट्टी माना जाता। मार्कस इस बात से हैरान रह गए और उन्होंने स्कूल और समाज की इस सोच को बदलने की ठान ली।

समाज की सोच को बदलने की जरूरत

समाज की सोच को बदलने की जरूरत

मार्कस ने कहा कि ज्यादातर महिलाएं जीवन में किसी किसी बिंदू पर पीरियड्स में होने वाले दर्द से गुजरती है और समाज और स्कूल का यह रवैया कि महिलाओं को इस दर्द के साथ ही रहना चाहिए गलत है, इसे बदलने की जरूरत है।

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