सोवियत संघ और अमेरिका से पहले चांद पर पहुंचना चाहता था जाम्बिया, जाने क्यों अधूरा रह गया मिशन?

1960 के दशक शीत युद्ध का दशक था। इस दौरान सोवियत संघ और अमेरिका के बीच स्पेस रेस चल रही थी। दोनों ही देश चांद पर इंसान भेजने के लिए प्रयासरत थे।

पूरी दुनिया में इसे लेकर गहरी दिलचस्पी थी कि कौन सा देश चंद्रमा पर पहला इंसान भेजने में सफल हो पाता है। ये वही दौर था जब जाम्बिया अंग्रेजों से आज़ाद हुआ था।

Famous Space Program of Zambia

प्रसिद्ध टाइम पत्रिका ने साल 1964 में जाम्बिया की स्वतंत्रता से जुड़ा एक आर्टिकल लिखा था। इस आर्टिकल को पढ़ने के दौरान लोगों की नजर उस फुटनोट पर गई, जिसमें लिखा था कि जाम्बिया में एक शख्स है जो इस स्वतंत्रता से उतना खुश नहीं है क्योंकि उसका ध्यान कहीं और है। उसे लगता है कि यूएस और सोवियत उसके मिशन मून के आड़े आ रहे हैं।

इसे पढ़कर लोग हैरान रह गए। कि अभी-अभी आजादी पाया देश आखिर कैसे चांद पर पहुंचने की सोच सकता है। किसी को ये मजाक लगा तो कुछ ने इसमें थोड़ी सच्चाई जान मामले की पड़ताल करनी शुरू कर दी।

दरअसल इस शख्स का नाम एडवर्ड मकूका एनकोलोसो था जो कि जामिया के स्पेस प्रोग्राम का प्रमुख था। पत्रकारों ने पाया कि एनकोलोसो मून मिशन के लिए 12 अंतरिक्ष यात्री तैयार कर रहा है। वह इसके लिए इनलोगों को कठोर ट्रेनिंग दे रहा था।

ट्रेनिंग के दौरान इन लोगों को एक तेल के ड्रम में रखकर पेड़ों के चारों ओर घुमाया जाता था और उन्हें भारहीनता के लिए तैयार करने के लिए पहाड़ियों से नीचे लुढ़काया जाता था। इसके अलावा उन्हें झूला झूलने जैसी ट्रेनिंग भी दी जाती थी।

एनकोलोसो की इस ट्रेनिंग में लोगों का अपने हाथों के बल चलना सीखना भी शामिल था। क्योंकि उनका मानना था कि अंतरिक्ष में चलने का यही एकमात्र सही तरीका है। वह लोगों को रस्सी पर लटका देता था और काफी ऊंचाई पर ले जाकर रस्सी को काट देता था ताकि वे मुक्त रूप से गिरने का अनुभव ले सकें।

एनकोलोसो का उद्देश्य जाम्बिया को चंद्रमा तक पहुंचने वाला पहला देश बनाना था। हालांकि उसके इस मिशन को लेकर नव स्वतंत्र जाम्बिया की सरकार ने कभी गंभीरता से नहीं लिया। एनकोलोसो को स्पेस मिशन का आईडिया तब आया जब वह पहली बार हवाई यात्रा कर रहा था।

एनकोलोसो ने जब पहली बार आसमान में बादलों को देखा तो वो हैरान रह गया। इसके बाद उसने फौरन प्लेन को रोक देने को कहा। दरअसल वह इन बादलों पर चलने का अनुभव हासिल करना चाहता था मगर पायलट ने प्लेन रोकने से इनकार कर दिया।

सिर्फ मून पर ही नहीं, एनकोलोसो की नजर मिशन मार्श पर भी थी। मिशन मून की ट्रेनिंग पा रहे 12 लोगों में से एकलौती लड़की माथा म्वाम्बा को इसके लिए चुना गया था।

एनकोलोसो ने दावा किया कि 1964 के अंत तक 16 वर्षीय अंतरिक्ष यात्री म्वाम्बा, दो बिल्लियों के साथ चंद्रमा और फिर मंगल ग्रह की यात्रा करेगी।

बिल्ली इसलिए क्योंकि चांद पर जाने के बाद यान का दरवाजा खोलने के बाद सबसे पहले उसे ही सतह पर फेंका जाता। अगर वह जिंदा बच जाती तभी यान से बाकी लोग बाहर निकलते।

एनकोलोसो ने सोवियत के लाइका कुत्ते के जवाब में अपना पालतू कुत्ता सायक्लोप्स को भी चुना था। इस कुत्ते के नाम पर ही इस मिशन का नाम सायक्लोप्स रखा गया था।

एनकोलोसो ने एसोसिएटेड प्रेस के एक रिपोर्टर से कहा, "कुछ लोग सोचते हैं कि मैं पागल हूं। लेकिन मैं उस दिन उन पर हंसूंगा जिस दिन मैं चंद्रमा पर जाम्बिया का झंडा लगाऊंगा।"

एनकोलोसो ने पत्रकारों को और जानकारी देने से इनकार कर दिया क्योंकि उसका मानना था कि इतने बड़े प्रोजेक्ट में किसी का भरोसा नहीं किया जा सकता है।

एनकोलोसो ने कहा कि उसके पास सोवियत और यूएस से अधिक उन्नत रॉकेट हैं मगर तकनीक चोरी होने के डर से वे ये किसी को नहीं दिखा सकता।

एनकोलोसो ने कहा कि हमारे अश्वेत वैज्ञानिक, तब तक आकाशीय अनंत का पता लगाना जारी रखेंगे जब तक हम संपूर्ण बाहरी अंतरिक्ष को नियंत्रित नहीं कर लेते।

एनकोलोसो ने इसके लिए इजरायल, अमेरिका से लेकर यूएसएसआर और यूनेस्को तक कई देशों और संगठनों को पत्र लिखकर इस मिशन के लिए धन की मांग की थी।

दुर्भाग्य से एनकोलोसो को इसमें सफलता नहीं मिली और उसे महज 10 रुपये ही मिल पाए जो कि अंतरिक्ष में दिलचस्पी रखने वाले एक स्कूली भारतीय छात्र ने उसे भेजा था। उसे शुभकामनाओं के अलावा कुछ भी नहीं मिला।

भले ही एनकोलोसो ने अमेरिका और सोवियत संघ से पैसे मांगे थे मगर उसे इन पर संदेह था, उसका मानना था कि वे उसके रहस्यों को चुराना चाहते हैं और पहले मून पर पहुंचना चाहते हैं।

क्यों फेल हुआ मिशन?

अंततः ये कार्यक्रम विफल हो गया क्योंकि एनकोलोसो को इस मिशन के लिए पैसे ही नहीं मिले। एनकोलोसो से जुड़े कई लोग भी ये प्रोजेक्ट छोड़ चुके थे।

एनकोलोसो ने पत्रकारों को बताया कि उसके दो सबसे खास साथी जो ट्रेनिंग पा रहे अंतरिक्ष यात्रियों की टीम में शामिल थे, शराब पीने गए थे और फिर अचानक गायब हो गए, वे एक महीने से नहीं दिखे हैं।

इसके अलावा उसका एक और स्पेस यात्रा के लिए ट्रेनिंग पा रहा सदस्य प्रोजेक्ट छोड़कर एक डांस ग्रुप में शामिल हो गया। स्पेस प्रोजेक्ट में शामिल एक मात्र लड़की भी अचानक गर्भवती भी हो गयी। जिसके बाद वह ट्रेनिंग कैम्प छोड़कर अपने घर चली गयी।

एनकोलोसो ने कहा कि उन्हें पैसे नहीं मिले क्योंकि दुनिया उनके अंतरिक्ष ज्ञान से डरती है। अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम की विफलता के बाद एनकोलोसो राजनीति में आ गए।

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