मौत का पिंजरा: यहां खूंखार मगरमच्छ के साथ रखा जाता है लोगों को

नई दिल्ली। अगर कभी कोई कुत्ता सामने आ जाए तो भी अधिकतर लोग डर के मारे कांप उठते हैं। जरा सोचिए अगर आपके आस पास मगरमच्छ घूमें तो आप क्या करेंगे। कुछ ऐसा ही माहौल होता है ऑस्ट्रेलिया के क्रॉकोसॉरस कोव डार्विन का। आइए जानते हैं क्या होता है यहां।

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क्रॉकोसॉरस कोव डार्विन 2008 में शुरू हुआ था। इसमें करीब 200 बड़े मगरमच्छ हैं। इसमें कुछ खारे पानी के मगरमच्छ भी हैं। यहां पर दुनिया भर से लोग मगरमच्छ देखने के लिए आते हैं।

मौत का पिंजरा

इसे केज ऑफ डेथ (मौत का पिजंरा) कहा जाता है। इसमें लोगों को एक शीशे के बक्से में बंद करके पानी में डाल दिया जाता है, जिस पानी में भारी भरकम बड़ा सा मगरमच्छ होता है।

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ट्रेनर लगातार मगरमच्छ को कुछ न कुछ खिलाता रहता है। इस तरह से आप मगरमच्छ को पानी में इधर से उधर जाते देख सकते हैं। इसके अलावा ट्रेनर की कोशिश रहती है कि वह मगरमच्छ को आपके अधिक से अधिक नजदीक पहुंचा सके, ताकि आप उसे अच्छे से देख सकें।

15 मिनट खौफनाक

एक बार में आपको 15 मिनट के लिए पानी में मगरमच्छ के साथ रखा जाता है। शीशे के बक्से में एक या दो व्यक्ति ही एक बार में पानी में जा सकते हैं। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि आप किसी भी मगरमच्छ को हर तरफ से यानी 360 डिग्री से देख सकते हैं।

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मौत का यह पिंजरा हर रोज 12 बार अपनी सेवा देता है, मतलब रोजाना 12 बार मगरमच्छ के साथ समय बिताया जा सकता है। यह समय सुबह 9.30 से शुरू होता है और शाम को 5 बजे तक चलता है।

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