थाईलैंड में मिलिट्री राज का खात्मा, विपक्ष की आंधी में उड़ गये सेना के प्रधानमंत्री... जानें कैसी होगी सरकार?

थाईलैंड में साल 2006 में सैन्य शासन की स्थापना हुई थी और उसके बाद से सेना का सत्ता पर सीधा दखल रहा है। वहीं, विपक्षी नेताओं ने इस बार चुनाव में नया संविधान बनाकर सेना को सत्ता से बाहर करने का अभियान चलाया है।

Thailand election results

Thailand election results: थाईलैंड में आज लोकतंत्र ने नई करवट बदसी है और सुधारवादी विपक्षी पार्टियों ने सेना समर्थित पार्टियों को धूल चटा दी है। थाईलैंड आम चुनाव में लोकतांत्रिक विपक्षी पार्टियों की बंपर जीत हुई है, जो देश के लिए ऐतिहासिक पल है।

थाईलैंड में लोकसभा का चुनाव इसलिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि मतदाताओं ने लगभग एक दशक तक दक्षिण पूर्व एशियाई देश पर शासन करने वाली सैन्य समर्थित पार्टियों को सिरे से खारिज कर दिया है।

सोमवार को थाईलैंड में करीब करीब सभी मतों की गिनती खत्म हो गई है और ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्षी दल 'मूव फॉरवर्ड पार्टी' ने एक और विपक्षी पार्टी 'फेयु थाई पार्टी' पर बढ़त हासिल कर ली है।

माना जा रहा है, कि 500 लोकसभा सीटों वाले थाईलैंड की संसद में 'मूव फॉरवर्ड पार्टी' (एमएफपी) को करीब 286 सीटें मिल रही हैं, हालांकि इसके बाद भी अभी ये नहीं कहा जा सकता है, कि 'मूव फॉरवर्ड पार्टी' की ही सरकार बनेगी, क्योंकि थाईलैंड में सरकार बनाने के लिए सेना ने बहुत ही अजीब नियम बना रखे हैं।

सरकार बनाने में सेना का दखल

थाईलैंड की संसद में 500 सीटे हैं और चुनाव परिणाम जारी होने के बाद अब जुलाई महीने में संसद की बैठक होगी। इस संसद सत्र में 500 नये सांसदों के अलावा 250 सीनेट के सदस्य भी रहेंगे, जो मिलकर नई सरकार का चनय करेंगे।

लेकिन, थाईलैंड की यही प्रक्रिया लोकतंत्र का गला घोंट देती है। क्योंकि, सीनेटर्स का सलेक्शन सेना करती है। यानि, 250 सीनेटर्स कौन होंगे, ये सेना तय करेगी और जाहिर सी बात है, वो सेना का ही साथ देंगे।

इसका मतलब ये है, कि एमएफपी और फू थाई पार्टी को एक नया प्रशासन स्थापित करने के लिए छोटे दलों के समर्थन की आवश्यकता होगी।

थाईलैंड में रविवार को मतदान का आयोजन किया गया था, जिसमें 24 प्रतिशत वोटों के साथ 'मूव फॉरवर्ड पार्टी' सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर ऊभरी है, जिसके बाद फू थाई पार्टी है, जिसे 23 प्रतिशत वोट मिले हैं। ये दोनों ही पार्टियां, सेना के खिलाफ चुनाव में उतरने वाली थाईलैंड की विपक्षी पार्टियां हैं।

Thailand election results

'मूव फॉरवर्ड पार्टी' ने अपने चुनावी अभियान के दौरान राजशाही में सुधार और देश में फिर से संविधान बनाने की जमकर वकालत की है और देश की जनता से वादा किया है, कि उसका सबसे पहला मकसद नया संविधान बनाकर संसदीय प्रणाली से सेना की भूमिका को हमेशा के लिए खत्म करना है।

'मूव फॉरवर्ड पार्टी' का ये चुनावी वादा काफी साहसिक कदम माना गया, जिसे जनता का भरपूर समर्थन मिला है।

99 प्रतिशत वोटों की गिनती के बाद एमएफपी कुल 147 सीटों के साथ निचले सदन की सबसे बड़ी पार्टी बन गई है, वहीं चुनाव आयोग की वेबसाइट पर प्रकाशित प्रारंभिक परिणाम के मुताबिक, एमएफपी ने सीधे तौर पर 112 सीटें जीती हैं, जबकि 100 सीटों में 35 सीटें आनुपातिक आधार पर जीती हैं। दोनों को मिलाकर ये आंकड़ा 147 का होता है।

वहीं, चुनाव आयोग के मुताबिक, फेयु थाई पार्टी ने 112 सीटों पर जीत हासिल की है।

वहीं, अभी तक सेना की मुखौटा पार्टी 'यूनाइटेड थाई नेशनल पार्टी'को सिर्फ 9 प्रतिशत ही वोट मिले हैं और चुनाव में 'यूनाइटेड थाई नेशनल पार्टी' पांचवें स्थान पर रही है। इसी पार्टी के प्रयुत चान ओचा अभी तक थाईलैंड के प्रधानमंत्री थे, जो सेना के 'गुलाम' माने जाते हैं।

चुनावी नतीजों में तीसरे स्थान पर रही भूमजैथाई पार्टी, जिसने थाईलैंड में भांग को वैध बनाने के अभियान की अगुवाई की थी। मौजूदा सत्तारूढ़ गठबंधन के हिस्से के रूप में. भूमजैथाई को लगभग 70 सीटें जीतने का अनुमान लगाया गया है।

पूर्वी थाईलैंड के उबन रतचथानी विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर टिटिपोल फकदीवानिच ने कहा, "मूव फॉरवर्ड पार्टी के लिए परिणाम बहुत प्रभावशाली जीत है।" उन्होंने कहा, कि "यह थाईलैंड के लिए एक बड़ा मोड़ है, क्योंकि यह दर्शाता है, कि देश में अधिकांश लोग बदलाव चाहते हैं।"

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थाईलैंड में सैन्य शासन

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    आपको बता दें, कि थाईलैंड में साल 2006 में सैन्य शासन की स्थापना हुई थी, जब सेना ने प्रधानमंत्री थाकसिन की सरकार को बर्खास्त कर दिया था। वहीं, साल 2011 में थाकसिन की रिश्तेदार यिंगलुक शिनवात्रा, साल 2011 में देश की प्रधानमंत्री बनी थीं।

    लेकिन, बाद में प्रयुत को प्रधानमंत्री बनाकर सेना ने यिंगलुक शिनवात्रा को सत्ता से बेदखल कर दिया था। फेयु थाई पार्टी ने साल 2019 के चुनाव में भी सबसे ज्यादा सीटें जीती थीं, लेकिन सेना समर्थित पलांग प्रचारत पार्टी की वजह से उसकी सरकार नहीं बन पाई, क्योंकि उसने प्रधावमंत्री प्रयुत से गठबंधन कर लिया था।

    वहीं, माना जा रहा है, कि अगर मूव फॉरवर्ड पार्टी' और फेयु थाई पार्टी मिलकर अगर सरकार बनाती है, तो पिटा लिमजारोएनरत देश के नये प्रधानमंत्री बन सकते हैं।

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