टेरर फंडिंग: पाकिस्तान को लगा बड़ा झटका, FATF ने ग्रे लिस्ट से नहीं निकाला बाहर
नई दिल्ली, 25 जून: दुनियाभर में टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। शुक्रवार को हुई FATF की बैठक में ये फैसला हुआ कि अभी पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में ही रहेगा, क्योंकि उसने संयुक्त राष्ट्र की ओर से चिह्नित आतंकी समूहों के नेताओं और कमांडरों के खिलाफ पर्याप्त जांच नहीं की। इसके अलावा वो उनके खिलाफ मुकदमा चलाने में भी विफल रहा, जिस वजह से उसे ग्रे लिस्ट से नहीं निकाला जा सकता है। पाक इस लिस्ट में 2018 से कब्जा जमाए हुए है।

कोरोना महामारी के चलते इस बार FATF की बैठक वर्चुअल तरीके से बुलाई गई थी, जो पांच दिनों तक चली। इसके समापन के दौरान ये फैसला हुआ कि पाकिस्तान को अभी ग्रे लिस्ट में रखा जाए। हालांकि FATF ने ये माना की मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग से जुड़ी जो कार्ययोजना पाकिस्तान को दी गई थी, उसमें एक को छोड़कर बाकी सभी 26 बिंदुओं पर अमल हुआ है। बैठक के दौरान टास्क फोर्स ने कहा कि FATF चाहता है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को जारी रखे। साथ ही जिन आतंकी समूहों के नेताओं और कमांडरों को यूएन ने चिह्नित किया है, उन पर मुकदमा चलाया जाए।
विशेषज्ञों के मुताबिक जो एक बिंदु पाकिस्तान ने छोड़ा है, वो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण था। उसी के तहत तालिबान, हक्कानी नेटवर्क, लश्कर, जैश-ए-मोहम्मद, जमात-उद-दावा, फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन, अलकायदा और इस्लामिक स्टेट के टॉप कमांडरों पर कार्रवाई की जानी थी, लेकिन पाकिस्तान उससे बच निकला। इसके चलते उसको ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं निकाला गया।
नहीं मिलेगी आर्थिक मदद
दरअसल अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ), विश्व बैंक और यूरोपीय संघ से हर देश को आर्थिक मदद दी जाती है। साथ ही ये सुनिश्चित किया जाता है कि उनकी ओर से दिया गया पैसा अच्छे काम में खर्च किया जाए, लेकिन पाकिस्तान जैसे देश इसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में करते हैं। ऐसे में उनके लिए ग्रे, ब्लैक लिस्ट तैयार की गई है। अब ग्रे लिस्ट में बरकरार रहने पर पाक की आर्थिक मदद काफी हद तक बंद ही रहेगी।












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