Vande Bharat Project: वंदे भारत ट्रेन को लेकर भारत और रूस के बीच टेंशन, क्या प्रोजेक्ट पर लगेगा ग्रहण?
Vande Bharat Project: वंदे भारत ट्रेनों को लेकर भारत और रूस की कंपनी के बीच विवाद शुरू हो गया है, जिसके बाद रूसी कंपनी ने सरकारी स्तर पर इस मुद्दे को उठाया है।
दरअसल, वंदे भारत ट्रेनों के निर्माण के लिए भारत-रूस सहयोग में डिजाइन में बदलाव को लेकर बाधा उत्पन्न हो गई है और अब यह मामला कूटनीतिक चैनलों तक पहुंच गया है। रूसी रोलिंगस्टॉक कंपनी ट्रांसमाशोल्डिंग (TMH) ने इस मुद्दे को अंतर-सरकारी स्तर पर उठाया है, ताकि इस समस्या का जल्द समाधान निकाला जा सके।

इस मामले पर भारत और रूस के बीच एक उच्च-स्तरीय बैठक में चर्चा की गई, जिसमें भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने भाग लिया। TMH के सीईओ किरिल लिपा ने अपने मॉस्को कार्यालय में भारतीय पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "हमने इस बैठक के दौरान इस मुद्दे को उठाया, और हमें उम्मीद है कि इसे सही तरीके से और सही स्तर पर उठाया गया होगा।"
डिजाइन को लेकर क्यों शुरू हुआ विवाद?
इस परियोजना में टीएमएच, लोकोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम (LES) और रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के बीच एक संयुक्त उद्यम काइनेट शामिल है, जो भारतीय रेलवे को 1920 वंदे भारत स्लीपर कोच की आपूर्ति करेगा। कॉन्ट्रैक्ट में इन कोचों का 35 वर्षों तक रखरखाव शामिल है। सितंबर 2023 में निर्धारित मूल समयसीमा के अनुसार, पहला प्रोटोटाइप 24 महीनों के भीतर वितरित किया जाना था। हालांकि, लंबित डिजाइन अनुमोदन के कारण अब इस समयसीमा के भीतर निर्माण मुश्किल लग रहा है।
लिपा ने कहा, "हमें निश्चित रूप से भारत में सरकारी नेताओं से कुछ समर्थन की आवश्यकता है, और मुझे विश्वास है कि पिछले सप्ताह हुई इस बैठक के बाद, हमें यह मिल जाएगा।"
उन्होंने कहा, कि "यह कोच के डिजाइन के बारे में नहीं है। यह इसके पीछे की इंजीनियरिंग है। जबकि डिजाइन को हमेशा बदला जा सकता है, असली समस्या आसपास के सिस्टम के लिए आती है। कोच का पूरा लेआउट गड़बड़ा जाता है।"
टीएमएच अधिकारियों ने खुलासा किया है, कि 24 मई 2024 को उन्हें भारतीय रेलवे से एक आधिकारिक पत्र मिला, जिसमें कोचों की संरचना और आंतरिक विशेषताओं में बदलाव का अनुरोध किया गया था। संशोधनों में ट्रेन की संरचना को बदलना शामिल था, जिसमें 16 डिब्बों वाली 120 ट्रेनों से लेकर 24 डिब्बों वाली 80 ट्रेनें शामिल थीं। अतिरिक्त परिवर्तनों में शौचालयों की संख्या तीन से बढ़ाकर चार प्रति डिब्बे करना और पैंट्री कार और लगेज जोन शामिल करना शामिल था, जो मूल डिजाइन में नहीं थे।
भारतीय रेलवे ने स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने एमसीएमए के अनुसार कुछ तकनीकी संशोधनों के लिए जवाब मांगे थे, जो 4-5 महीने बाद प्राप्त हुए और वर्तमान में जांच के अधीन हैं।
इस साल के अंत तक महाराष्ट्र के लातूर में मराठवाड़ा रेल कोच फैक्ट्री (MRCF) में मैन्युफैक्चरिंग शुरू होना था, जहां उपकरण लगाने का काम चल रहा है। हालांकि, जब तक डिजाइन को अंतिम रूप नहीं दिया जाता, तब तक उत्पादन शुरू नहीं हो सकता। वहीं, लागत को लेकर लिपा ने कहा, "हमने उत्पाद से पहले फिर से डिजाइन के लिए कुछ मुआवजे पर जोर दिया है, क्योंकि इसमें समय लगता है, जिससे लागत बढ़ जाएगी। हमने सितंबर के अंतिम सप्ताह में एक आधिकारिक दस्तावेज भेजा और आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।"












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