स्पेन में 60 डिग्री से ऊपर पहुंचा पारा, हीटवेव से जल रहा है यूरोप, जून पहले ही तोड़ चुका है रिकॉर्ड
स्पेन में सतह का तापमान 60 डिग्री को मार कर चुका है। पूरा यूरोप इस समय घातक हीटववे की चपेट में है। फ्रांस, स्विटजरलैंड, जर्मनी और इटली में तापमान रिकॉर्ड तोड़ चुका है। बहुत ही भयावह स्थिति की जानकारी मिल रही है।
इंडिपेंटेंट के मुताबिक यूरोप के कई देशों में बुधवार को पारा फिर से 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। इटली में अत्यधिक गर्मी की वजह से एक पर्यटक की मौत की भी जानकारी है। बहुत ज्यादा गर्मी की वजह से उसकी जान जाने की रिपोर्ट है।

इससे पहले एक रिपोर्ट आई थी कि पिछला महीना यानी जून अबतक के रिकॉर्ड के मुताबिक पृथ्वी का सबसे गर्म महीना था। नासा और नोआ (NOAA) जैसे संगठनों के वैज्ञानिकों ने स्वतंत्र विश्लेषण के आधार पर यह रिपोर्ट दी है। इसके मुताबिक 174 साल के रिकॉर्ड में जून का महीना कभी इतना गर्म नहीं रहा, जितना कि इस साल गुजरा है।
अमेरिका के नेशनल ओशीऐनिक एंड ऐट्मोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने इसके अलावा साल 2023 की गर्मी को लेकर भी बड़ी भविष्यवाणी की है। नोआ का कहना है कि इस समय जो वैश्विक स्तर पर तापमान इतना ज्यादा रह रहा है, उसकी पीछे अल नीनो क्लाइमेट पैटर्न भी एक कारण है।
अल नीनो की वजह से भी बढ़ता है वैश्विक तापमान
दरअसल, अल नीनो पैटर्न की वजह से प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इससे जो अतिरिक्त गर्मी पैदा होती है, उसका प्रभाव दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है और वैश्विक तापमान बढ़ जाता है। यही नहीं भारत में तो इसकी वजह से मानसून का सामान्य पैटर्न भी बदल जाता है और इस साल देश इस समस्या को बुरी तरह झेल भी रहा है।
तीन दशक के औसत तापमान से जून में 0.5 डिग्री ज्यादा
यूरोपीयन यूनियन के कॉपनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के मुताबिक 1991 से लेकर 2020 के औसत से इस बार जून विश्व भर में 0.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म था। यह जून, 2019 के पिछले रिकॉर्ड से बहुत ज्यादा था।
इस साल जनवरी से जून तक तीसरा सबसे गर्म समय
वैश्विक स्तर पर जून, 2023 ने 174 वर्ष के नोआ के रिकॉर्ड में सबसे गर्म जून होने का रिकॉर्ड स्थापित किया। अगर इस साल जनवरी से लेकर जून तक के वैश्विक तापमान को देखें तो यह अवधि अबतक की तीसरी ऐसी सबसे गर्म वातावरण वाला समय रहा है।
ऐसा पहली बार हुआ है- NCEI
नोआ के नेशनल सेंटर्स फॉर एंवायरोमेंटल इंफॉर्मेशन (NCEI) ने पाया है कि जून में वैश्विक तापमान 20वीं सदी के औसत 15.5 डिग्री सेल्सियस से 1.05 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। नोआ का कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ है कि जून का तापमान लंबे समय के औसत से 1 डिग्री ज्यादा दर्ज किया गया है।
इसकी ओर से कहा गया है कि 'मई की स्थितियों से लग रहा था कि अल नीनो कमजोर पड़ सकता है, लेकिन यह जून में भी मजबूत होता गय। क्योंकि, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में सागर की सतह का तापमान औसत से ज्यादा हो गया।'
साल 2023 के लिए है एक चौंकाने वाली भविष्यवाणी
इन परिस्थितियों में नोआ के वैज्ञानिकों ने पाया है कि अभी तक की जो हालत है, उससे 99% से भी ज्यादा संभावना है कि साल 2023 अबतक के 10 सबसे गर्म वर्षों में शामिल होगा। यही नहीं, 97% तो संभावना ये है कि यह साल अबतक के शीर्ष 5 सबसे गर्म साल में शामिल हो सकता है। (स्रोत: पीटीआई)












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