Defence News: तेजस Mk-II से बदलेगा भारत का फाइटर जेट मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम, जानें ऐसा क्या बदला
Defence News: भारत का अगली पीढ़ी का लड़ाकू विमान तेजस Mk-II संभवतः देश का पहला ऐसा सैन्य विमान प्रोग्राम होगा, जिसमें आधुनिक "प्री-स्टफ्ड फ्यूजलेज" मैन्युफेक्चरिंग टेक्नोलॉजी अपनाई जाएगी। इस तकनीक का मकसद फाइटर जेट बनाने में लगने वाला समय कम करना और क्वालिटी को बेहतर बनाना है। यह वही मॉडल है, जिसका इस्तेमाल एयरबस जैसे बड़ी कंपनियां करती हैं, जहां विमान का फ्यूजलेज (धड़) पहले से वायरिंग, पाइपिंग और डक्टिंग के साथ तैयार होकर फाइनल असेंबली लाइन (FAL) तक पहुंचता है।
क्या है "प्री-स्टफ्ड फ्यूजलेज" मॉडल?
इस मॉडल में विमान के अलग-अलग हिस्से अधूरे नहीं, बल्कि लगभग पूरी तरह तैयार मॉड्यूल के रूप में बनाए जाते हैं। अलग-अलग इंडस्ट्रियल पार्टनर्स इन मॉड्यूल्स को बनाते हैं, जिन्हें फाइनल असेंबली लाइन पर लाकर आसानी से "प्लग-इन" किया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि एयरफ्रेम को जोड़ने के बाद अंदर भारी वायरिंग या पाइप लगाने की जरूरत बहुत कम रह जाती है।

HAL और ADA क्यों कर रहे हैं यह बदलाव?
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) तेजस Mk-II के लिए इस नई मैन्युफैक्चरिंग स्ट्रैटजी को अपनाने के इच्छुक हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि इस प्रोजेक्ट में निजी कंपनियों की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा बड़ी होने वाली है। प्राइवेट इंडस्ट्री फ्यूजलेज के बड़े हिस्सों का निर्माण करेगी, जिससे HAL पर लोड कम होगा और प्रोडक्शन तेज़ होगा।
तेजस Mk-1A में अभी क्या स्थिति है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा तेजस Mk-1A में अब भी ज्यादातर इंटरनल वायरिंग, पाइपिंग और डक्टिंग का काम HAL द्वारा सीधे फाइनल असेंबली लाइन पर किया जाता है। चूंकि इन कामों में समय ज्यादा लगता है और ये काम पहले ही हो चुके होंगे, तो यह प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से आसान हो जाएगी। अगर ऐसा नहीं होता तो टेक्नीशियनों को पहले से जुड़े स्ट्रक्चर के अंदर कई किलोमीटर लंबी केबल और पाइप फिट करने पड़ते, जो अब नहीं करने होंगे। इसी वजह से पूरे असेंबली साइकल में और तेजी आएगी।
तेजस Mk-II में होगा मॉड्यूलर और पैरलल उत्पादन
तेजस Mk-II में इसके उलट एक ज्यादा मॉड्यूलर और पैरलल (समानांतर) प्रोडक्शन सिस्टम अपनाया जाएगा। इसका मतलब है कि विमान के अलग-अलग हिस्से एक साथ अलग-अलग जगहों पर तैयार होंगे और बाद में FAL पर जोड़े जाएंगे। इससे समय की बचत होगी और उत्पादन की रफ्तार भी बढ़ेगी।
कॉकपिट और नाक वाला हिस्सा पहले से तैयार
नई योजना के मुताबिक, विमान का अगला हिस्सा यानी कॉकपिट और नोज सेक्शन पहले से पूरी तरह तैयार होकर FAL पर पहुंचेगा। इसमें पायलट के सभी इंटरफेस सिस्टम और जेट की नाक में लगे जटिल एवियोनिक्स पहले से इंस्टॉल होंगे। इससे फाइनल असेंबली के दौरान अलग से भारी फिटिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सेंट्रल फ्यूजलेज और विंग्स भी होंगे "रेडी-टू-फिट"
सिर्फ आगे का हिस्सा ही नहीं, बल्कि सेंट्रल फ्यूजलेज भी आंतरिक ईंधन टैंक और बड़े इलेक्ट्रिकल हार्नेस के साथ तैयार किया जाएगा। इसी तरह, विमान के पंख (विंग्स) भी अंदरूनी फ्यूल पाइपिंग, विंग-टिप सेंसर और अन्य सिस्टम्स की वायरिंग के साथ असेंबली लाइन तक लाए जाएंगे।
FAL का रोल होगा पूरी तरह बदलना
इस बदलाव के बाद फाइनल असेंबली लाइन का काम अंदरूनी फिटिंग करने से हटकर मुख्य रूप से स्ट्रक्चर को जोड़ने, सिस्टम इंटीग्रेशन और टेस्टिंग पर केंद्रित होगा। यानी FAL अब ज्यादा स्मार्ट और कम लेबर-इंटेंसिव होगी। यही मैन्युफैक्चरिंग फिलॉसफी भारत के पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट AMCA प्रोग्राम में भी अपनाए जाने की उम्मीद है।
प्री-स्टफ्ड सिस्टम की सबसे बड़ी चुनौती
इस तकनीक की सबसे बड़ी चुनौती है बेहद कड़ी टॉलरेंस (Tolerance) जरूरत। फ्यूजलेज के हिस्सों को जोड़ते समय माप इंच के दस-हजारवें हिस्से तक सटीक होनी चाहिए। चूंकि वायरिंग और पाइपिंग पहले से अंदर लगी होती है, इसलिए थोड़ी-सी भी गड़बड़ी फाइनल इंटीग्रेशन को मुश्किल बना सकती है।
अंतिम जोड़ और "पावर-ऑन" टेस्ट
जब आगे, बीच और पीछे के फ्यूजलेज सेक्शन FAL पर बोल्ट से जोड़ दिए जाते हैं, तब असेंबली टीम "अम्बिलिकल" कनेक्शन जोड़ती है। ये भारी-ड्यूटी इलेक्ट्रिकल कनेक्टर और हार्नेस होते हैं, जो अलग-अलग सेक्शनों के सिस्टम्स को आपस में जोड़ते हैं। इसके बाद "पावर-ऑन" टेस्ट किया जाता है, जिसमें इंजीनियर चेक करते हैं कि सभी प्री-इंस्टॉल्ड वायरिंग विमान के सेंट्रल कंप्यूटर और एवियोनिक्स सिस्टम से सही तरीके से काम कर रही है या नहीं।
भारत के लिए क्यों है यह गेम-चेंजर?
अगर यह सिस्टम सफलतापूर्वक लागू होता है, तो यह भारत के फाइटर जेट मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। इससे समानांतर काम, प्राइवेट सेक्टर की गहरी भागीदारी और FAL-केंद्रित मैनुअल लेबर पर निर्भरता कम होगी।
तेजस Mk-II सेट करेगा नया बेंचमार्क
तेजस Mk-II प्रोग्राम प्रोडक्शन एफिशिएंसी, स्केलेबिलिटी और क्वालिटी के नए मानक तय कर सकता है। आने वाले दशकों में जब भारत को बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान अपने बेड़े में शामिल करने होंगे, तब यही मॉडल देश की एयर पावर को तेज़ी से मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
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