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Teesta River Dispute: क्या है तीस्ता नदी परियोजना विवाद? चीन के बढ़ते दखल से भारत को कितना नुकसान?

Teesta River Dispute: पिछले साल बांग्लादेश में हुए तख्ता पलट के बाद भारत-बांग्लादेश के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस ने तीस्ता परियोजना पर एक बड़ा कदम उठाया है। यूनुस ने भारत के लिए बेहद अहम इस परियोजना पर चीन की कंपनियों को काम देने का वादा किया है।

नोबेल पुरस्कार विजेता यूनुस ने शुक्रवार, 28 मार्च को चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ बैठक की। इस बैठक में कुल नौ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

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क्या है तीस्ता नदी परियोजना? बांग्लादेश में चीन की बढ़ती दखल से भारत पर कितना असर पड़ेगा ? आइए इस पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं...

शुक्रवार को बांग्लादेश और चीन के बीच बैठक हुई जिसमें कई अहम समझौते किए गए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ समझौते भारत के हितों को प्रभावित करने वाले हो सकते हैं।

दोनों देशों के बीच संयुक्त बयान में कई अहम बातें कही गई हैं जिसमें बांग्लादेश ने वन चाइना पॉलिसी का समर्थन किया है। इसके साथ ही दोनों देशों ने व्यापार में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर भी सहमती दिखाई है। इसके साथ ही कई औद्योगिक परियोजनाओं में चीन के मदद का प्रस्ताव भी रखा गया है।

What is Teesta River Dispute? तीस्ता परियोजना क्या है?

तीस्ता परियोजना पर भारत -बांग्लादेश के बीच का विवाद बहुत पुराना है। इस परियोजना के तहत बाढ़ पर अंकुश लगाना, कटाव रोकना और जमीन दोबारा हासिल करने जैसे काम किए जाने हैं। इस परियोजना के तहत बांग्लादेश के हिस्से में एक बैराज का निर्माण किया जाना है।

दरअसल, कई जगहों पर तीस्ता की चौड़ाई पांच किलोमीटर है इस परियोजना के तहत उसे कम किया जाएगा, वहीं कुछ जगहों पर नदी की गहराई भी बढ़ाई जानी है और तटबंधों को मजबूत किया जाना है। अगर ये परियोजना तैयार हो जाती है तो तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें भी कम हो जाएंगी।

यूनुस और चिनफिंग के बीच बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में बांग्लादेश ने चीन को अपनी मोंगला पोर्ट को अत्याधुनिक बनाने व विकसित करने के लिए स्वागत किया है। चीन की इस पर लंबे अरसे से नजर थी। चीन के भारी दबाव को दरकिनार कर हसीना सरकार ने जुलाई, 2024 में इसमें एक टर्मिनल को विकसित करने का अधिकार भारत को दे दिया।

Teesta River Dispute: इस पर विवाद क्या है?

तीस्ता नदी जल बंटवारा विवाद कई दशक पुराना है। इस विवाद में दोनों देशों के बीच भू-राजनीतिक लड़ाई है दरअसल, बांग्लादेश चाहता है कि भारत नदी का पानी कम खर्च करे ताकि उनके देश में पहुंचने तक नदी का पानी बचा रहे।

  • तीस्ता नदी हिमालय से निकलती है और सिक्किम, प. बंगाल होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है। उत्तर बंगाल का अधिकांश हिस्सा इसी नदी पर आश्रित है। ये नदी दोनों देशों के लिए जीवन रेखा है।
  • साल 1983 में पहली बार दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ जिसमें बांग्लादेश को 36% और भारत में 39% पानी का बंटवारा हुआ। हालांकि, इस समझौते पर बात नहीं बनी।
  • प. बंगाल का कहना है कि नदी में इतना पानी नहीं है कि बांग्लादेश की मांग पूरी की जा सके।
  • इसके बाद 2008 में बांग्लादेश में शेख हसीना सत्ता में लौटी तो इस मुद्दे पर पुन: बातचीत शुरु हुई।
  • 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ढाका गए बातचीत फिर से आगे बढ़ी लेकिन, मामला तब भी अटक गया।
  • जब साल 2011 में ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की सत्ता में आईं तब उन्होंने राज्य की ओर से केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा। इसमें 42.5 प्रतिशत पानी भारत को, और 37.5 प्रतिशत पानी बांग्लादेश को दिए जाने की बात कही थी।
  • हालांकि, केंद्र ने उसे स्वीकार नहीं किया और अपना अलग प्रस्ताव तैयार किया। इस पर ममता बनर्जी ने असहमती दिखाते हुए इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया।
  • इसके बाद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और 2015 में जब वो ममता बनर्जी के साथ ढाका गए तो एक बार फिर से तीस्ता समझौते पर उम्मीद बनती नजर आई।
  • लेकिन अभी तक इस मामले का कोई हल नहीं निकला और नदी के जल बंटवारे पर कोई सहमती नहीं बन सकी है।

Teesta River Dispute: चीन की दखल से भारत पर कितना प्रभाव

  • दक्षिण एशिया में चीन की बढ़ती पैठ भारत के लिए हमेशा से चिंता का विषय रहा है। पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश में चीन अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं।
  • वहीं बांग्लादेश के लिए बीजिंग एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र भी रहा है। चीन तीस्ता परियोजना के साथ मोंगला पोर्ट के विकास में भी यूनुस सरकार को मदद करने का आश्वासन दिया है।
  • इस पोर्ट पर चीन की पहले से ही थी जो इस पर उसकी पकड़ भारत के लिए बेहद खतरनाक साबित होगी।
  • जून 2024 में जब शेख हसीना भारत के दौरे पर आई थीं तो इस परियोजना पर प्रमुखता से बात की थी। उन्होंने चीन के दबाव को दरकिनार करके मोंगला बंदरगाह पर एक नए टर्मिनल को विकसित करने का अधिकार भारत को दे दिया।
  • इस दौरान हसीना ने तीस्ता परियोजना के लिए शेख हसीना ने चीन से आसान शर्तों पर कर्ज मुहैया करवाने का अनुरोध करने की बात कही थी।
  • वहीं जब मई 2024 में भारत के विदेश सचिव के ढाका दौरे पर गए थे तब उस दौरान बांग्लादेशी विदेश मंत्री हसन महमूद ने पत्रकारों को बताया था कि भारत तीस्ता परियोजना के लिए वित्तीय सहायता देना चाहता है।
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