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Tarique Rahman Oath: तारिक रहमान ने ली PM पद की शपथ, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला रहे मौजूद

Tarique Rahman Swearing-in Ceremony: बांग्लादेश के लोकतांत्रिक इतिहास में 17 फरवरी 2026 की तारीख एक नए युग के सूत्रपात के रूप में दर्ज हो गई है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान ने आज देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। ढाका में आयोजित यह भव्य समारोह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का केंद्र बना, जिसमें प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस के निमंत्रण पर दुनिया भर के नेताओं ने शिरकत की।

भारत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस समारोह में प्रतिनिधित्व किया, जो नई सरकार के साथ नई दिल्ली के संबंधों को पटरी पर लाने का एक सकारात्मक संकेत है। यह कूटनीतिक भागीदारी दर्शाती है कि चुनौतियों के बावजूद भारत, बांग्लादेश की स्थिरता और विकास में एक भरोसेमंद साझेदार बने रहने के प्रति प्रतिबद्ध है।

Tarique Rahman Oath

शपथ ग्रहण: बंगभवन नहीं, संसद बना गवाह

इस बार शपथ ग्रहण समारोह की जगह का चुनाव काफी चर्चा में है। परंपरा को तोड़ते हुए यह कार्यक्रम राष्ट्रपति भवन के बजाय जातीयो संसद (National Parliament) परिसर में हुआ। इसे नई सरकार के उस विजन से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें वे संसद और जनता की ताकत को सबसे ऊपर दिखाना चाहते हैं।

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इन 13 देशों को मिला था कूटनीतिक न्योता

प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने इस समारोह को 'ग्लोबल' बनाने के लिए 13 अहम देशों को आमंत्रित किया था। इसमें भारत, चीन, पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, मलेशिया, ब्रुनेई, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान को भी बुलावा भेजा गया। दक्षिण एशिया से लेकर खाड़ी देशों तक को एक साथ बुलाना यह दर्शाता है कि रहमान प्रशासन क्षेत्रीय संतुलन और आर्थिक निवेश को अपनी प्राथमिकता पर रख रहा है।

ओम बिरला ने किया भारत का प्रतिनिधित्व

भारत की ओर से इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में लोकसभा स्पीकर Om Birla शिरकत करेंगे। वे भारत का आधिकारिक प्रतिनिधित्व करते हुए शपथ-ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए ढ़ाका पहुंच चुके हैं। उनके साथ विदेश सचिव Vikram Misri भी मौजूद हैं। इस भागीदारी को भारत और बांग्लादेश के बीच मजबूत होते कूटनीतिक संबंधों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

तारिक रहमान: विरासत, संघर्ष और सत्ता

60 वर्षीय तारिक रहमान एक बेहद ताकतवर राजनीतिक घराने (जिया परिवार) से आते हैं। उनके पिता जियाउर रहमान स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रपति थे, जबकि मां खालिदा जिया देश की पहली महिला प्रधानमंत्री रहीं। किशोरावस्था में पिता की हत्या और सालों तक निर्वासन झेलने के बाद रहमान का प्रधानमंत्री बनना किसी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं है। उन पर कई आरोप भी लगे, लेकिन अपनी मां के निधन के बाद पार्टी की कमान संभालते हुए उन्होंने शानदार जीत हासिल की।

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नई सरकार के सामने चुनौतियों का पहाड़

भारी बहुमत (209 सीटें) मिलने के बावजूद तारिक रहमान की राह आसान नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती बांग्लादेश की डगमगाती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और घरेलू राजनीति में स्थिरता पैदा करना है। इसके अलावा, भारत और चीन जैसी महाशक्तियों के बीच कूटनीतिक संतुलन बनाना उनके कौशल की परीक्षा होगी। जहां जमात गठबंधन (68 सीटें) के साथ तालमेल बिठाना जरूरी है, वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह भरोसा दिलाना होगा कि उनकी सरकार समावेशी और पारदर्शी है।

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