तंजानिया के राष्ट्रपति जॉन मैगुफुली का 61 साल की उम्र में निधन, कोरोना से संक्रमित होने की थी अटकलें
तंजानिया के राष्ट्रपति जॉन मैगुफुली का 61 साल की उम्र में निधन, कोरोना से संक्रमित होने की थी अटकलें
डोडोमा: तंजानिया के राष्ट्रपति जॉन मैगुफुली का 61 साल की उम्र में निधन हो गया है। बुधवार (17 मार्च) को तंजानिया के उपराष्ट्रपति सामिया सुलुहु हसन ने इस बात की जानकारी दी। 27 फरवरी 2021 के बाद से ही जॉन मैगुफुली के सार्वजनिक तौर पर नहीं देखा गया था। इसलिए उनके स्वास्थ्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थी। इस बात की अटकलें सबसे ज्यादा थी कि जॉन मैगुफुली कोरोना वायरस से संक्रमति थे। हालांकि इस बात की कोई अधिकारिक सूचना नहीं दी गई है। जॉन मैगुफुली के निधन के बाद तंजानिया के उप राष्ट्रपति सामिया सुलुहु हसन ने 14 दिनों के शोक की घोषणा की है। उपराष्ट्रपति सामिया सुलुहु हसन ने जॉन मैगुफुली के निधन की सूचना देते हुए ये भी बताया कि वो दिल की बीमारी से पीड़ित थे।

तंजानिया के उपराष्ट्रपति सामिया सुलुहु हसन ने अपने अधिकारिक बयान में कहा, 17 मार्च 2021 को शाम करीब 6 बजे देश ने हमारे बहादुर नेता, राष्ट्रपति जॉन मैगुफुली को खो दिया है। दिल की बीमारी की वजह से जॉन मैगुफुली का निधन दार एस सलाम स्थित जेना अस्पताल में हुआ है। इसी अस्पताल में उनका कुछ दिनों से इलाज चल रहा था।
27 फरवरी के बाद से जॉन मैगुफुली के नहीं दिखाई देने के बाद ये अटकलें लगाई जा रही थी कि जॉन मैगुफुली कोरोना पॉजिटिव हैं। हालांकि 12 मार्च को देश के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टी की थी कि जॉन मैगुफुली कोरोना संक्रमित नहीं थे। उपराष्ट्रपति ने भी देश की जनता को अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की थी। तंजानिया के संविधान की मानें तो जॉन मैगुफुली के निधन के बाद उपराष्ट्रपति हसन राष्ट्रपति के बचे हुए 5 साल के कार्यकाल का काम संभालेंगे और पद भी ग्रहण करेंगे। हसन पूर्वी अफ्रीकी राष्ट्र की पहली महिला राष्ट्रपति होंगी। वो ब्रिटेन से पढ़ी हुई है।
बीते साल चुनाव जीतने के बाद जॉन मैगुफुली का यह दूसरा कार्यकाल था। मैगुफुली को 1995 में संसद का सदस्य चुना गया था। जॉन मैगुफुली 2010 में तंजानिया के मंत्री और दूसरी बार परिवहन मंत्री नियुक्त किए जाने के बाद लोकप्रियता प्राप्त की थी। सड़क निर्माण उद्योग में भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी तेज नेतृत्व शैली और लड़ाई तंजानियाई लोगों को काफी पसंद आई थी। जिन्होंने बाद में उन्हें 'बुलडोजर' का उपनाम दिया गया था।












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