तालिबान और नॉर्दन एलायंस के बीच बातचीत विफल, पंजशीर के लड़ाकों ने हथियार डालने से किया इनकार
नई दिल्ली, 1 सितंबर: पूरे अफगानिस्तान पर तालिबान ने कब्जा कर लिया है, लेकिन अभी पंजशीर घाटी के अंदर उसके लड़ाके नहीं पहुंच पाए। वहीं दूसरी ओर नॉर्दन एलायंस ने भी हथियार उठा लिए हैं। साथ ही अफगानिस्तान को तालिबान के चंगुल से आजाद करवाने की कसम खाई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तालिबानी नेताओं ने पंजशीर के नेतृत्व से बातचीत की कोशिश की, लेकिन वो पूरी तरह से विफल रहे। जिस वजह से अब दोनों में युद्ध का खतरा बढ़ गया है।

जानकारी के मुताबिक मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के लिए तालिबान आयोग के प्रमुख मुल्ला आमिर खान ने आदिवासी बुजुर्गों और पंजशीर के लड़ाकों से बात की, लेकिन ये वार्ता पूरी तरह से विफल रही। मुल्ला आमिर ने खुद इसकी पुष्टि की है। मुल्ला के मुताबिक तालिबान चाहता था कि लड़ाई शुरू करने से पहले बात की जाए, साथ ही पंजशीर के लोगों को हथियार डालने के लिए मनाया जाए। इसके लिए परवान प्रांत के कबायली नेताओं से बात हुई थी, लेकिन वो विफल रही। इसमें दोनों पक्ष किसी फैसले पर नहीं पहुंच पाए।
अहमद मसूद ने कही थी ये बात
कुछ दिनों पहले भी तालिबान ने नॉर्दन एलायंस से सरेंडर की बात कही थी। जिस पर पंजशीर में लड़ाकों का नेतृत्व कर रहे अहमद मसूद ने कहा था कि मैं अहमद शाह मसूद का बेटा हूं, समर्पण मेरी शब्दावली का हिस्सा नहीं है। ये तो अभी बस शुरुआत है। उन्होंने आगे कहा कि मेरे पिता कमांडर मसूद हमारे राष्ट्रीय नायक हैं और उन्होंने मुझे विरासत दी है। ऐसे में उन्हें अफगानों की स्वतंत्रता के लिए लड़ना है। अब ये लड़ाई अपरिवर्तनीय रूप से उनकी है।
भारत ने उठाया ये कदम
अफगानिस्तान को लेकर भारत सरकार ने बहुत बड़ा फैसला लेते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पारित किया। जिसमें तालिबान को अफगानिस्तान में शर्तों के साथ मान्यता दे दी गई है। संयुक्त राष्ट्र में तालिबान की जिम्मेदारी तय करते हुए भारत, फ्रांस, अमेरिका समेत 13 देशों ने अपना समर्थन दिया है।












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