लड़कियों की पढ़ाई पर तालिबान में जमकर नाटक, स्कूल खोलने के कुछ ही घंटे बाद फिर जड़ा ताला
तालिबान ने 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान पर शासन किया था और अमेरिकी हमले के बाद तालिबान को अपना राज-पाठ छोड़कर भागना पड़ा था।
काबुल, मार्च 23: तालिबान आधुनिक तो बनना चाहता है, लेकिन एक कदम बढ़ाकर वो चार कदम और पीछे खींच लेता है और तालिबान राज में लड़कियों की पढ़ाई को लेकर जमकर ड्रामा हुआ है। आज सुबह में अफगानिस्तान शासन ने एक बार फिर से लड़कियों के लिए खोले गये स्कूल को बंद करने का फरमान जारी कर दिया।

कुछ ही घंटे खुले स्कूल
पिछले साल अगस्त महीने मे तालिबान ने अफगानिस्तान में लड़कियों की पढ़ाई बंद करवा दी थी, लेकिन इस साल तालिबान ने घोषणा की थी, कि एक बार फिर से देश में लड़िकियों के लिए स्कूलों को खोला जाएगा और स्कूलों को खोला भी गया, लेकिन कुछ क्लास होने के बाद ही स्कूलों को फिर से बंद कर दिया गया। "हां, यह सच है," तालिबान के प्रवक्ता इनामुल्ला समांगानी ने इस बात की पुष्टि की है कि. आदेश के बाद छात्रों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। तालिबान द्वारा उठाए गये कदम से युद्धग्रस्त देश में लड़कियों की शिक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा होने की संभावना है। देश में सत्ता पर कब्जा करने के बाद, तालिबान ने महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की 'रक्षा' करने का वादा किया था, लेकिन उसने अपने वादों को पूरा नहीं किया है।

महिलाओं की शिक्षा से चिढ़
अपने वादे को पूरा करते हुए तालिबान शासन ने सितंबर 2021 में लड़कियों के लिए कक्षा 6 तक के कुछ स्कूलों को फिर से खोलने की अनुमति दी थी। साथ ही, महिलाओं को विश्वविद्यालयों में जाने की अनुमति भी दी गई थी। हालांकि, महिला छात्रों के लिए हाई स्कूल बंद रहे, और इस्लामी अमीरात ने घोषणा की थी, कि सभी लड़कियों के लिए कक्षाएं 'जल्द से जल्द' फिर से शुरू होंगी। और लड़कियों के लिए स्कूलों को फिर से खोलने की घोषणा करते हुए तालिबान ने कहा था, कि राजधानी काबुल सहित कई प्रांतों में शैक्षणिक संस्थान 23 मार्च से फिर से खुलेंगे। हालांकि, आदेश में यह भी कहा गया था कि, कंधार में स्कूल अप्रैल के बाद खुलेंगे। लेकिन, स्कूल खुलने के बाद कुछ घंटे बाद ही फिर से स्कूलो को बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया।

‘दुनिया को खुश करने का इरादा नहीं’
तालिबान के एक प्रवक्ता ने पिछले साल स्कूलों को खोलने की जब घोषणा की थी, उस वक्त कहा था कि, "हम ना ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय को खुश करने और ना ही दुनिया से पहचान हासिल करने के लिए स्कूलों को फिर से खोल रहे हैं।" आपको बता दें कि, इससे पहले, तालिबान ने 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान पर शासन किया था और अमेरिकी हमले के बाद तालिबान को अपना राज-पाठ छोड़कर भागना पड़ा था। लेकिन, पिछले साल तालिबान एक बार फिर से अमेरिका के साथ समझौता करने के बाद देश की सत्ता में वापस लौट आए हैं।












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