'पाकिस्तान नहीं करता इस्लामिक सरकार की नुमाइंदगी', तालिबान ने अपने 'बाप' को धमकाया
तालिबान को पालने-पोषने में सबसे बड़ी भूमिका पाकिस्तान ने ही निभाई है और अफगानिस्तान में सरकार बनाने के बाद तालिबान कई बार पाकिस्तान सरकार की संरचना पर गंभीर सवाल उठा चुका है।
काबुल, दिसंबर 11: कट्टर इस्लामवादी और मजहब के नाम पर हजारों को मौत के घाट उतारने वाले तालिबान ने अब अपने 'बाप' पाकिस्तान को ही उसकी औकात दिखानी शुरू कर दी है। तालिबानी प्रवक्ता ने खुले तौर पर कहा है कि, पाकिस्तान एक इस्लामिक सरकार का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। तालिबानी प्रवक्ता के इस बयान के कई मतलब निकाले जा रहे हैं और सबसे बड़ी आशंका इस बात की है, कि पाकिस्तान में आतंकी घटनाओं में काफी तेजी से इजाफा हो सकता है।

पाकिस्तान सरकार पर सवाल
तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने एक टीवी कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान की सरकार को लेकर कई ऐसी बातें कही हैं, जो खतरे की घंटी बजाने वाली हैं। पाकिस्तान, जो खुद को एक इस्लामिक देश मानता है और जो अपने आप को 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान' कहता है, उसे तालिबान ने इस्लामिक देश मानने से इनकार कर दिया है। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने एक टीवी कार्यक्रम में पाकिस्तान और इस्लाम को लेकर पूछे गये सवाल पर कहा कि, पाकिस्तान में सरकार की जो संरचना है, वो इस्लामिक सिस्टम के मुताबिक नहीं है।
चेतावनी वाला बयान
टीवी कार्यक्रम में बोलते हुए तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि, ''पाकिस्तान में सरकार की जो संरचना है, वो इस्लामिक सिस्टम के मुताबिक नहीं है। उनका सिस्टम इस्लामिक नहीं है। पाकिस्तान सरकार के मजहब का कोई महत्व नहीं है''। तालिबान का पाकिस्तानी सरकार के सिस्टम पर सवाल उठाना और उसे इस्लामिक मानने से इनकार करना, पहले से ही पाकिस्तान में मौजूद उन तत्वों को बढ़ावा देने वाला है, जो पाकिस्तान को 'इस्लामिक अमीरात' बनाने के लिए लंबे अर्से से खून-खराबा कर रहे हैं और जो पाकिस्तान की चुई हुई सरकार को मान्यता नहीं देते हैं। उनमें सबसे खतरनाक संगठन तहरीक-ए-तालिबान शामिल है, जिसे पाकिस्तानी तालिबान भी कहा जाता है और जिसको लेकर आरोप है कि, वो अफगान तालिबान का ही एक अंग है, जिसका मकसद पाकिस्तान में इस्लामिक सरकार की स्थापना करना है।

पाकिस्तान के लिए खतरे का अलार्म
तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद का ये बयान निश्चित तौर पर पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तान समाज के लिए खतरे की घंटी है, क्योंकि अफगानिस्तान में तालिबान की जीत के बाद पाकिस्तान की एक बड़ी आबादी ने जिस तरह का जश्न मनाया है, वो बताता है कि, पाकिस्तान में इस्लामिक सरकार बनाने की दिशा में कितने संगठन सक्रिय हैं और उनकी मानसिकता तालिबान से कितनी मिलती है। ऐसे में अगर उन्हें खुले तौर पर तालिबान का साथ मिलने लगे, तो ऐसी कट्टरपंथी ताकतों को बढ़ावा मिलेंगी, जो इस देश की बर्बादी के लिए जिम्मेदार होंगी।












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