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अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान से संघर्ष आज़ादी और तानाशाही के बीच की जंग: अफ़ग़ान जनरल

तालिबान, अफ़ग़ानिस्तान
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तालिबान, अफ़ग़ानिस्तान

एक अफ़ग़ान जनरल ने कहा है कि अगर अफ़ग़ानिस्तान में चल रहे गृह युद्ध में तालिबान की जीत होती है तो दुनिया के लिए इसके 'विनाशकारी' परिणाम होंगे.

जनरल सामी सादात, अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी प्रांत हेलमंद में तालिबान के ख़िलाफ़ लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं. हेलमंद की राजधानी लश्कर गाह में तालिबान और सरकारी सेना के बीच भीषण लड़ाई छिड़ी हुई है.

तालिबान ने शहर के बीचों बीच कुछ इलाक़ों पर कब्ज़ा कर लिया है. लेकिन जनरल सादात ने कहा कि उन्हें यक़ीन है कि तालिबान पूरे शहर पर कब्ज़ा नहीं कर पाएगा.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि तालिबान ने कुछ इलाक़ा सरकारी सेना के कब्ज़े से ले लिया है, लेकिन उनका मानना ​​है कि तालिबान इस कब्ज़े और लगातार हमलों को जारी नहीं रख पाएगा.

हालांकि जनरल का कहना है कि तालिबान को, अन्य इस्लामी समूहों के लड़ाकों से मदद मिलती जा रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि इन नए लड़ाकों की मौजूदगी ने, अफ़ग़ानिस्तान के बाहर भी ख़तरा पैदा कर दिया.

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तालिबान का हमला

जनरल सादात ने कहा, "इससे यूरोप और अमेरिका के शहरों में छोटे चरमपंथी समूहों के जुटने की आशंका बढ़ेगी. साथ ही वैश्विक सुरक्षा पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा. यह अकेले अफ़ग़ानिस्तान की जंग नहीं है, यह स्वतंत्रता और तानाशाही के बीच का युद्ध है."

हेलमंद प्रांत में तालिबान का हमला सारे अफ़ग़ानिस्तान में हो रहे सरकारी सेना पर तालिबान के हमलों का अहम हिस्सा है.

अपने 20 साल के सैन्य अभियान के बाद अमेरिकी सेना ने ये देश छोड़ दिया है. तब से तालिबान ने तेज़ी से सरकार सेनाओं पर एक के बाद एक ताबड़तोड़ हमले किए हैं.

हाल के महीनों में चरमपंथी तेज़ी से आगे बढ़े हैं क्योंकि देश में 20 साल के सैन्य अभियानों के बाद अमेरिकी सेना वापस बुला ली गई है.

हेलमंद प्रांत अमेरिका और ब्रिटिश सैन्य अभियान का केंद्र था. इस पर तालिबान का कब्ज़ा, अफ़ग़ान सरकार के लिए एक बड़ा झटका होगा.

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लश्कर गाह में सरकारी सेना

अगर हेलमंद की राजधानी लश्कर गाह में सरकारी सेना हार जाती है, तो यह 2016 के बाद किसी भी प्रांत की राजधानी पर तालिबान की पहली जीत होगी.

तालिबान देश के तीन अहम प्रांतों की राजधानियों पर नियंत्रण करने की फ़िराक़ में है. हेलमंद के अलावा उनकी नज़र कंधार और हेरात पर भी है.

रविवार को हवाईअड्डे पर रॉकेट हमले के बाद से, अफ़ग़ानिस्तान के दूसरे सबसे बड़े शहर कंधार पर चरमपंथियों ने कब्ज़ा करने का प्रयास किया था.

कंधार पर कब्जा करना तालिबान के लिए एक बड़ी जीत होगी, जिससे उन्हें देश के दक्षिणी हिस्से पर मज़बूत पकड़ हो जाएगी.

तीसरे अहम शहर हेरात में सरकारी कमांडो कई दिनों से विद्रोहियों के साथ एक भीषण लड़ाई लड़ रहे हैं.

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देश के कई हिस्सों में संघर्ष

बीते शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र के एक परिसर पर हमले के बाद सरकारी बलों ने कुछ इलाक़ों को वापस ले लिया है.

सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में हेरात की सड़कों और छतों पर लोग सरकार के समर्थन में नारे लगाते हुए देखे गए हैं.

सरकारी सेना तालिबान की बढ़त को रोकने के लिए देश के कई हिस्सों में संघर्ष कर रही है.

इसी बीच राष्ट्रपति अशरफ ग़नी ने लड़ाई बढ़ने के लिए अचानक हुई अमेरिकी सैनिकों की वापसी को जिम्मेदार ठहराया है.

उन्होनें अफ़ग़ान संसद को बताया, "हमारे मौजूदा हालात की वजह, अमेरिकी सेना की अचानक वापसी का निर्णय है."

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अफ़ग़ान सेना की मदद

राष्ट्रपति गनी ने कहा कि उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी थी कि वापसी के गंभीर परिणाम होंगे.

अमेरिका के लगभग सभी सैनिक वापस लौट गए हैं, लेकिन अमेरिकी एयर फ़ोर्स अब भी अफ़ग़ान सेना की मदद कर रही है.

लश्कर गाह में भी सोमवार देर रात तक हवाई हमले किए गए हैं.

अमेरिकी प्रशासन ने सोमवार को घोषणा की कि हिंसा में बढ़ोत्तरी के कारण, वे अमेरिकी सेना के साथ काम करने वाले हजारों और अफ़ग़ान लोगों को अपने देश में शरण देगा.

अमेरिका और ब्रिटेन ने तालिबान पर, पाकिस्तान की सीमा के पास एक शहर में "नागरिकों की हत्या" करके, संभावित युद्ध अपराध करने का आरोप लगाया है.

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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा कि उन्होंने तालिबान के अत्याचारों की "परेशान" करने वाली ख़बरें देखी हैं.

स्पिन बोल्दाक से सामने आए भीषण वीडियो को देखकर लगता है कि हत्याएँ बदले की भावना से की गई हैं.

तालिबान ने आरोपों को ख़ारिज किया है.

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