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तालिबान ने कंधार रेडियो का नाम बदलकर 'वॉयस ऑफ शरिया' रखा, भारत उठाएगा 'आपातकालीन' कदम

तालिबान ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें एक अज्ञात 'विद्रोही' ने कंधार के मुख्य रेडियो स्टेशन को अपने कंट्रोल में लेने की घोषणा की है।

काबुल/नई दिल्ली, अगस्त 14: तालिबानी लड़ाकों ने कंधार शहर पर पहले ही कब्जा कर लिया था और अब खबर आ रही है कि तालिबान ने कंधार रेडियो स्टेशन को जब्त कर लिया है। शनिवार को तालिबान ने तेजी से आक्रामक रूख अपनाते हुए दक्षिणी अफगानिस्तान पर कब्जा करना शुरू कर दिया है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि अगले 3 हफ्ते से कम समय में तालिबान पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर सकता है। 31 अगस्त से अमेरिकी सैनिकों को अफगानिस्तान से बाहर निकलना है और माना जा रहा है कि उससे पहले ही तालिबान अफगानिस्तान की रादधानी काबुल पर कब्जा कर लिया। वहीं, तालिबान ने कंधार रेडियो स्टेशन का नाम बदल दिया है।

रेडियो स्टेशन पर तालिबान का कब्जा

रेडियो स्टेशन पर तालिबान का कब्जा

तालिबान ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें एक अज्ञात 'विद्रोही' ने कंधार के मुख्य रेडियो स्टेशन को अपने कंट्रोल में लेने की घोषणा की है। इस वीडियो के जरिए तालिबान ने घोषणा की है कि अब से कंधार रेडियो स्टेशन से गाने नहीं बजेंगे और रेडियो स्टेशन का नाम बदलकर 'वॉयस ऑफ शरिया' या 'इस्लामी कानून' कर दिया गया है। तालिबान ने कहा कि, सभी कर्मचारी रेडियो स्टेशन में मौजूद हैं और अब से इस रेडियो स्टेशन के जरिए सिर्फ कुरान के समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और इस्लामी पाठ का प्रसारण किया जाएगा। तालिबान ने साफ कहा है कि अब रेडियो स्टेशन के जरिए मनोरंजन करने वाले गाने नहीं बजाए जाएंगे। हालांकि, अभी तक इसका पता नहीं चल पाया है कि रेडियो स्टेशन में काम करने वाले पुराने कर्मचारी ही काम करेंगे या फिर उनके साथ क्या किया गया है।

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    स्थानीय लोगों में तालिबान का डर

    स्थानीय पत्रकारों ने कहा है कि तालिबान की खौफ की वजह से ज्यादातर कंधार के लोगों ने तालिबान द्वारा पसंद की जाने वाली पोशाक को पहनना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही वीडियो में दिख रहे शख्स ने कंधार के लोगों को तालिबान की जीत पर बधाई दी। आपको बता दें कि तालिबान के हाथ में 20 साल से ज्यादा वक्त के बाद रेडियो स्टेशन लगा है। तालिबान 1996-2001 तक देश पर शासन करने के बाद से एक बार फिर से कंधार जैसे शहर से रेडियो स्टेशन का संचालन करना शुरू किया है। उस समय भी तालिबान ने कंधार के बाहर वॉयस ऑफ शरिया नामक रेडियो स्टेशन चलाया था। आपको बता दें कि कंधार शहर में तालिबान की स्थापना करने वाले मुल्ला मोहम्मद उमर का जन्म हुआ था, जिसे अमेरिका ने बम से उड़ा दिया था।

    काबुल की तरफ बढ़ता तालिबान

    काबुल की तरफ बढ़ता तालिबान

    आपको बता दें कि तालिबान ने हाल के हफ्तों में उत्तरी, पश्चिमी और दक्षिणी अफगानिस्तान के ज्यादातर हिस्से पर कब्जा कर लिया है। इसके साथ ही अफगान सरकार का देश के ऊपर नियंत्रण काफी कमजोर हो गया है। राजधानी काबुल अब खतरे में आ चुका है और अब आशंका इस बात को लेकर जताई जा रही है कि 31 अगस्त से पहले ही तालिबान पूरे देश पर कब्जा कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के लड़ाके अब राजधानी काबुल के 50 किलोमीटर के अंदर आ चुके हैं और माना जा रहा है कि राजधानी काबुल को तालिबान ने चारों तरफ से घेरना शुरू कर दिया है। हालांकि, इस बात की उम्मीद कम है कि अमेरिकी सेना की मौजूदगी तक तालिबानी लड़ाके काबुल के अंदर दाखिल होगें, लेकिन इतना तय है कि तालिबान के हाथों में बहुत जल्द देश का नियंत्रण जाने वाला है।

    दूतावास से नागरिकों को निकालेगा भारत

    दूतावास से नागरिकों को निकालेगा भारत

    इन सबके बीच अफगानिस्तान में तेजी से बिगड़ती स्थिति के बीच काबुल में भारतीय दूतावास के कर्मचारियों को देश से बाहर निकाला जाएगा। भारत सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने सीएनएन-न्यूज 18 को बताया है कि अगले 24 घंटों में इस मामले में औपचारिक घोषणा संभव है। भारत सरकार के सूत्रों ने कहा कि, भारतीय कर्मचारियों ने अपने काम को खत्म करना शुरू कर दिया है और वापस भारत आने के लिए सामान समेटना शुरू कर दिया है और भारत सरकार दूतावास से भी भारतीय अधिकारियों को वापस लाने की व्यवस्था कर रही है। सूत्रों ने कहा कि भारतीय दूतावास को स्थानीय अफगान कर्मचारियों के हवाले कर दिया जाएगा। क्योंकि भारत सरकार भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि अपने कर्मचारियों की देखभाल करना भारत सरकार का कर्तव्य है।

    कई देशों ने किया भारत से संपर्क

    कई देशों ने किया भारत से संपर्क

    इस बीच समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मीडिया संस्थाओं समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भारतीय अधिकारियों से संपर्क किया है ताकि स्थिति और बिगड़ने पर अपने कर्मचारियों को निकालने में उनकी मदद की जा सके। तालिबान के पूरे अफगानिस्तान में अपने हमले तेज करने के साथ, अमेरिका ने अपने दूतावास के कर्मचारियों को बाहर निकालने के लिए राजधानी काबुल में करीब 3,000 सैनिकों को भेजने की घोषणा की है। वहीं, ब्रिटेन भी हिंसा में भारी वृद्धि को देखते हुए देश छोड़ने वाले ब्रिटिश नागरिकों की मदद के लिए 600 सैनिक भेज रहा है। बल्ख प्रांत की राजधानी शहर के आसपास तालिबान द्वारा तेजी से बढ़ रही हिंसा को देखते हुए भारत ने इस सप्ताह की शुरुआत में मजार-ए-शरीफ में अपने वाणिज्य दूतावास से अपने कर्मचारियों को निकाला है।

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