तालिबान ने अफगानिस्तान के प्रसिद्ध मौलवी को किया गिरफ्तार, इस गुनाह के लिए मिलेगी मौत की सजा?
तालिबान ने मौलवी मोहम्मद जादरान को बंदी बना लिया है। उन्होंने तालिबान के खिलाफ जंग छेड़ रखी थी।
काबुल, अगस्त 30: अफगानिस्तान से जो नेता फरार हो चुके हैं, वो तो तालिबान के हाथों बच गये हैं, लेकिन वो नेता या जो प्रमुख शख्सियत अफगानिस्तान में रह गये हैं, उनके ऊपर अब तालिबान जुल्म ढा रहा है। तालिबान ने अफगानिस्तान के प्रसिद्ध मौलाना, मौलवी मोहम्मद सरदार जादरान को गिरफ्तार कर लिया है। पहले जादरान की खबर आई थी और अब तालिबान ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए उनकी एक तस्वीर भी जारी की है।

मौलवी जादरान गिरफ्तार
तालिबान ने मौलवी मोहम्मद जादरान की एक तस्वीर जारी की है, जिसमें उनके आंखों पर पट्टी बंधी हुई है। हालांकि, तालिबान ने अभी तक ये साफ नहीं किया है, कि उनकी गिरफ्तारी किस जुर्म में की गई है। लेकिन, मौलवी मोहम्मद जादरान अफगानिस्तान के प्रसिद्ध शख्सियतों में से एक हैं और अफगानिस्तान में उनकी बड़ी संख्या में फॉलोवर्स हैं और उन्होंने तालिबान के खिलाफ विद्रोह करने का भी ऐलान किया था। ऐसे में माना जा रहा है कि मौलवी मोहम्मद जादरान को तालिबान मौत की सजा दे सकता है। आपको बता दें कि मौलवी मोहम्मद जादरान अफगानिस्तान के नेशनल काउंसिल ऑफ रिलीजियस स्कॉलर्स के प्रमुख रह चुके हैं और अफगानिस्तान की पूर्ववर्ती अशरफ गनी सरकार में भी उनका अच्छा प्रभाव था। इससे पहले अफगानिस्तान की महिला गवर्नल सलीमा मजारी को भी तालिबान कैद कर चुका है।

सलीमा मजारी बनाई गई बंदी
अफगानिस्तान में पहली महिला राज्यपालों में से एक, सलीमा मजारी, जिन्होंने तालिबान की नाक में दम कर रखा था, उन्हें भी तालिबान पकड़ चुका है। तालिबान ने उन्हें पकड़ने के बाद उनके साथ क्या सलूक किया है और वो कहां है, इसकी कोई खबर अभी तक नहीं मिल पाई है। ऐसे समय में जब कई अफगान राजनीतिक नेता देश छोड़कर भाग गए थे, सलीमा मजारी बल्ख प्रांत में लगातार लड़ती रहीं और उन्होंने तालिबान के आगे आत्मसमर्पण नहीं किया, लेकिन 18 अगस्त को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक जिला चाहर किंट में तालिबान ने कब्जा करने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। सलीमा मजारी ने तालिबान के आगे आत्मसर्पण करने से इनकार कर दिया था।

कौन हैं सलमा मजारी ?
जिस वक्त पूरे अफगानिस्तान में अशांति की आग फैली हुई है और तालिबान ने महिलाओं के अकेले घर से बाहर निकलने पर मनाही लगा दी है, उस वक्त उन तालिबानी लड़ाकों के खिलाफ मिशन पर निकलने वाली महिला सलीमा मजारी, अफगानिस्तान में एक महिला जिला गवर्नर हैं, जो अपनी आर्मी के लिए युवाओं को भर्ती कर रही थीं। सलीमा मजारी युवाओं से अपील करती थीं कि अफगानिस्तान आपकी धरती है और इस धरती के लिए बलिदान देना गर्व की बात है। ऐसा ही एक गीत लाउडस्पीकर पर बजता रहता था। मई की शुरुआत से जब तालिबान ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में अपनी पहुंच बनाने में लग गया और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जब 31 अगस्त तक अमेरिकी सैनिकों के अफगानिस्तान से बाहर निकलने की आखिरी तारीख मुकर्रर कर दी, उसी वक्त से अफगानिस्तान में सलीमा मजारी ने तालिबान का मुकाबला करना शुरू कर दिया था।सलीमा मजारी की सेना में करीब 600 लोग शामिल थे, जिनमें कोई किसान था तो कोई चरवाहा। मजारी की सेना में शामिल रहे 53 साल के सैयद मुनव्वर भी पेशे से किसान हैं, जिन्होंने 20 सालों से हल चलाया है और सलीमा मजारी के कहने पर उन्होंने तालिबान के खिलाफ हथियार उठा लिया था, लेकिन अंजाम खौफनाक ही निकला।












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