''जो अफगानिस्तान आए, उनका अंजाम देख लिया...'' तालिबान ने 'प्यार' से भारत को भेजा 'धमकी भरा पैगाम'

भारतीय न्यूज एजेंसी एएनआई से तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद सुहैल शाहीन ने बात की है, जिसमें तालिबान ने भारत को लेकर काफी कुछ कहा है।

काबुल, अगस्त 14: अफगानिस्तान फतह करने की स्थिति में आ चुके तालिबान ने प्यार के साथ भारत को धमकी भेजी है और अफगानिस्तान में भारतीय फौज भेजने को लेकर चेतावनी दी है। तालिबान के साथ भारत ने दोहा की बैठक में हिस्सा लिया था और कतर के एक डिप्लोमेट ने दावा किया था कि भारतीय अधिकारियों और तालिबान के प्रतिनिधियों के बीच दोहा में अलग से भी बातचीत हुई है, जिसमें तालिबान ने कहा था कि वो अफगानिस्तान में भारतीय दूतावासों को ना ही नुकसान पहुंचाएंगे और ना ही भारतीय राजनयिकों को निशाना बनाएंगे। लेकिन अब अफगानिस्तान ने भारत को आर्मी मुवमेंट को लेकर धमकी भेजी है।

बैठक में भारत ने लिया हिस्सा

बैठक में भारत ने लिया हिस्सा

भारतीय न्यूज एजेंसी एएनआई से तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद सुहैल शाहीन ने बात की है, जिसमें तालिबान की तरफ से कई दावे किए गये हैं। तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि ''भारतीय प्रतिनिधिमंडल और हमारे प्रतिनिधि मंडल के बीच मुलाकात की खबरें आईं थीं, लेकिन मैं इसकी पुष्टि नहीं कर सकता। मेरी जानकारी के मुताबिक एक अलग बैठक नहीं हुई है, हां, हमने शुक्रवार को दोहा में एक बैठक ही है, जिसमें एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भी भाग लिया था''

भारत का सख्त रूख

भारत का सख्त रूख

आपको बता दें कि 10 अगस्त को कतर की राजधानी दोहा में अफगानिस्तान शांति को लेकर एक क्षेत्रीय बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें अमेरिका, चीन, पाकिस्तान समेत 12 देशों ने हिस्सा लिया था। इसके साथ ही बैठक में यूरोपीयन यूनियन और यूनाइटेड नेशंस ने भी हिस्सा लिया था। इसमें भारत ने साफ तौर पर घोषणा की गई थी कि सभी देश सुनिश्चित करे अगर तालिबान हथियारों के बूते काबुल पर कब्जा करता है तो उसे मान्यता नहीं दी जाएगी। भारत के इस विचार का अमेरिका और चीन ने भी समर्थन किया था और यूनाइटेड नेशंस और यूरोपीयन यूनियन ने भी भारत का पूरी तरह से समर्थन करते हुए प्रस्ताव पास किया था, जिसमें कहा गया है कि अगर काबुल पर हथियारों के दम पर किसी सत्ता की नींव रखी जाती है तो उसे मान्यता नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही बैठक में फौरन तालिबान से युद्धविराम की अपील की गई। कतर के अनुसार, चीन और पाकिस्तान उन देशों में शामिल हैं, जिन्होंने 10 अगस्त की बैठक में कहा कि वो काबुल में किसी भी हिंसक अधिग्रहण को मान्यता नहीं देंगे।

भारत को तालिबान का आश्वासन

भारत को तालिबान का आश्वासन

न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए तालिबान ने कहा कि वो भारत को आश्वस्त कर चुका है कि अफगानिस्तान की मिट्टी को भारत के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। तालिबानी प्रवक्ता शाहीन ने कहा कि, "हमारी एक सामान्य नीति है, कि हम किसी को भी पड़ोसी देशों सहित किसी भी देश के खिलाफ अफगान धरती का उपयोग करने की अनुमति नहीं देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" रिपोर्टों के अनुसार, तालिबान हेरात प्रांत में भारत की शोपीस इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना सलमा बांध, जिसे भारत-अफगानिस्तान मैत्री बांध भी कहा जाता है, पर नियंत्रण करने के करीब है। बांध का उद्घाटन राष्ट्रपति अशरफ गनी और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में किया था। प्रांत की राजधानी और अफगानिस्तान का तीसरा सबसे बड़ा शहर, हेरात शहर पहले ही तालिबान के हाथों में आ चुका है। जिसको लेकर तालिबान प्रवक्ता ने कहा कि ''हमारी तरफ से दूतावासों और राजनयिकों को कोई खतरा नहीं है। हम किसी दूतावास या राजनयिक को निशाना नहीं बनाएंगे। हमने अपने बयानों में कई बार कहा है। यह हमारी प्रतिबद्धता है''

''...उनका हाल देख लिया है''

''...उनका हाल देख लिया है''

हालांकि, तालिबान की प्रतिबद्धता चेतावनी के साथ सामने आई है। तालिबानी प्रवक्ता ने कहा कि ''अगर वे (भारत) सैन्य रूप से अफगानिस्तान आते हैं और उनकी उपस्थिति होती है, तो मुझे लगता है कि यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा। उन्होंने (भारत) देखा है कि अफगानिस्तान आने वाले दूसरे देशों का क्या हाल हुआ है और उन देशों के सैनिकों की तकदीर अफगानिस्तान आने के बाद कैसी हो गई है, इसीलिए अफगानिस्तान उनके लिए (भारत) एक खुली किताब की तरह है''।

भारतीय मदद की सराहना

भारतीय मदद की सराहना

तालिबानी प्रवक्ता ने कहा कि ''भारत ने अफगानिस्तान के लोगों के लिए बांध बनवाएं हैं, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रोजेक्ट में भारत ने योगदान दिया है और अफगानिस्तान के पुननिर्माण में योगदान दिया है, जिसकी हम सराहना करते हैं''। वहीं, तालिबानी प्रवक्ता ने अफगानिस्तान के पक्तिया के चमकानी क्षेत्र में स्थिति गुरुद्वारे से निशान साहिब को हटाने की बात से इनकार कर दिया है। तालिबानी प्रवक्ता ने कहा कि ''उस झंडे को सिख समुदाय ने खुद हटाया था। जब हमारे सुरक्षा अधिकारी वहां गए तो उन्होंने सिख समुदाय को आश्वासन दिया कि उन्हें झंडा लगाने पर कोई परेशान नहीं करेगा, जिसके बाद फिर से इसे फहराया गया"

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