जैसी करनी, वैसी भरनी: पाकिस्तान के लिए भस्मासुर बना तालिबान, अफगान सीमा पर 3 और सैनिकों को मारा
अफगानिस्तान में मौजूद ‘तहरीक-ए-तालिबान’ लगातार पाकिस्तानी सैनिकों को मार रहा है, जिसके खिलाफ इसी महीने पाकिस्तानी सेना की तरफ से एयरस्ट्राइक किया गया था...
इस्लामाबाद/काबुल, अप्रैल 23: बहुत पुरानी कहावत है, कि अगर आप गलत का साथ देते हैं, तो आपके साथ ही गलत ही होगा और पाकिस्तान पूरी दुनिया के लिए एक सटीक उदाहरण है। पाकिस्तान ने हमेशा आतंकवादियों का साथ दिया है, आतंकियों को संरक्षण दिया है, आतंकियों को पाला-पोसा और उन्हें पालतू कुत्ते के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश की, लेकिन अब ये आतंकी पाकिस्तान को ही काट रहे हैं। जिस तालिबान को पाकिस्तान ने पाल-पोसकर बड़ा किया, वही तालिबान अब पाकिस्तान के लिए जी का जंजाल बन चुका है।

अफगान सीमा पर तीन जवान ढेर
पाकिस्तानी सेना के मीडिया मामलों के विंग ने शनिवार को कहा है कि, खैबर पख्तूनख्वा के उत्तरी वजीरिस्तान जिले के देवागर इलाके में अफगान सीमा पार से आतंकवादियों के साथ गोलीबारी के दौरान तीन सैनिक मारे गए हैं। पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, आतंकवादियों ने अफगान सीमा पार से पाकिस्तानी सैनिकों पर गोलियां चलाईं और उसके बाद पाकिस्तानी सेना ने भी "मुकम्मल तरीके से जवाब दिया" है। आईएसपीआर ने कहा कि, 'विश्वसनीय खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, सैनिकों की गोलीबारी में आतंकवादियों को भारी नुकसान हुआ है'।

तालिबान बना सिरदर्द
अफगानिस्तान में मौजूद 'तहरीक-ए-तालिबान' लगातार पाकिस्तानी सैनिकों को मार रहा है, जिसके खिलाफ इसी महीने पाकिस्तानी सेना की तरफ से एयरस्ट्राइक किया गया था, लेकिन उसके बाद तालिबान ने सख्त चेतावनी जारी कर दी और साफ कहा, कि पाकिस्तानी सेना अफगानिस्तानी क्षेत्र में दाखिल होने की हिमाकत ना करे। वहीं, इस बार पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या की पाकिस्तानी सेना की तरफ से निंदा की गई है और कहा है कि, "पाकिस्तान के खिलाफ गतिविधियों के लिए आतंकवादियों द्वारा अफगान धरती के इस्तेमाल की कड़ी निंदा करता है और उम्मीद करता है कि अफगान सरकार भविष्य में इस तरह की गतिविधियों के संचालन की अनुमति नहीं देगी।" इससे पहले टीटीपी ने इसी महीने सात पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था।

क्या चाहता है तहरीक-ए-तालिबान?
दरअसल, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार का विरोध करता है और पाकिस्तान के अंदर अफगानिस्तान जैसी पूर्ण इस्लामिक सरकार चाहता है और पूरे पाकिस्तान में शरिया कानून लागू करना चाहता है, जिसको लेकर पाकिस्तान ने तहरीक-ए-तालिबान को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। लेकिन, तालिबान की अफगानिस्तान की वापसी के बाद तालिबान ने इस संगठन के गिरफ्तार किए गये आतंकवादियों को रिहा कर दिया और अफगानिस्तान की सीमा में टीटीपी के लिए सुरक्षित ठिकाने बनाए गये, जिन्हें अशरफ गनी की सरकार के दौरान ध्वस्त कर दिए गये थे। वहीं, पिछले हफ्ते इन दोनों आतंकवादी संगठनों ने मिलकर पाकिस्तान के डी आई खान डिवीजन और उत्तरी वजीरिस्तान में सुरक्षा बलों पर सीमा पार से भीषण हमले किए हैं।

तालिबान नहीं करेगा टीटीपी के खिलाफ कार्रवाई
पाकिस्तान ने तालिबान का दिल खोलकर समर्थन किया है और तालिबान की सत्ता में वापसी का पाकिस्तान में जमकर स्वागत किया गया और पूरे देश में मिठाइयां बांटी गई। वहीं, पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने तो यहां तक कहा था, कि तालिबान ने गुलामी की बेड़ियां तोड़ दी हैं और अब अफगानिस्तान आजाद हो गया है, लेकिन यही तालिबान अब पाकिस्तान के लिए भस्मासुर साबित हो रहा है।

डूरंड लाइन को लेकर विवाद
हांलांकि, तालिबान सरकार इस बात से इनकार करती है, कि वह पाकिस्तानी आतंकवादियों को पनाह दे रही है, लेकिन, तालिबान ने 2700 किलोमीटर लंबी डूरंड लाइन को मानने से इनकार कर दिया और पाकिस्तान की तरफ से लगाए गये बाड़ को उखाड़ फेंका। तालिबान ने साफ कर दिया है, कि वो डूरंड लाइन को नहीं मानता है। वहीं, जिस टीटीपी को पाकिस्तान आतंकी संगठन मानता है, वो तालिबान का छोटा भाई ही है और अब ये साफ जाहिर हो भी चुका है, लेकिन पाकिस्तान ने जिस तरह से तालिबान को समर्थन दिया है, उसके बाद अब पाकिस्तान फंस गया है, कि वो आखिर किस मुंह से तालिबान की निंदा करे, लेकिन दूसरी तरफ टीटीपी लगातार पाकिस्तानी सैनिकों के लिए काल बना हुआ है।












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