Syria War: सीरिया में व्लादिमीर पुतिन को लगा 440 वोल्ट का करंट, अलेप्पो में विद्रोहियों की जीत से हारा रूस!

Syria War: सीरिया में फिर से शुरू हुए गृहयुद्ध में विद्रोहियों ने देश के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण शहर अलेप्पो पर कब्जा कर लिया है, जिससे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को 440 वोल्ट का झटका लगा। एक्सपर्ट्स का मानना है, अलेप्पो पर कब्जा कर विद्रोहियों ने ना सिर्फ राष्ट्रपति बशर अल असद, बल्कि उनके सहयोगियों ईरान और रूस को अपमानजनक झटका दिया है।

एक्सपर्ट्स का कहना है, कि इस आश्चर्यजनक हमले ने अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन की भी मदद की है। लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के डिफेंस एक्सपर्ट साशा ब्रुचमैन ने कहा, "यह वास्तव में एक पहेली है जिसे (रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर) पुतिन को सुलझाना है।"

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सीरिया गृहयुद्ध से रूस को 440 वोल्ट का झटका

उन्होंने कहा, कि "रूस के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा है और अगर सीरिया में तानाशाह असद की सरकार गिरती है, तो रूस भूमध्य सागर में अपने एकमात्र नौसैनिक अड्डे सहित मध्य पूर्व में अपना क्षेत्रीय बढ़त खो देगा, और इसका क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव कम हो जाएगा।"

रूस के लिए सबसे बड़ी दिक्कत की बात ये है, कि वो चाहकर भी राष्ट्रपति असद की सैन्य मदद नहीं कर सकता है, क्योंकि वो पहले से ही यूक्रेन में युद्ध लड़ रहा है और सीरिया को दमिश्क में होने वाले किसी भी संभावित विद्रोहियों के हमले से बचने के लिए मॉस्को के समर्थन की जरूरत होगी, जो पुतिन नहीं दे पाएंगे।

ब्रुचमैन ने कहा, "रूस के पास पर्याप्त धन नहीं है और सीरिया युद्ध में अगर रूस घुसता है, तो उसे भारी कीमत चुकानी होगी, जिसके लिए फिलहाल वो तैयार नहीं है, और ये वजह मिडिल ईस्ट में उसकी जियो-पॉलिटिकल बढ़त के लिए खराब है।" रूस ने इससे पहले साल 2015 में राष्ट्रपति असद की मदद करते हुए विद्रोहियों पर लगातार बमबारी की थी और उन्हें राजधानी से कम से कम 400 किलोमीटर दूर खदेड़ दिया था।

रूस के लिए सीरिया युद्ध कितना जरूरी है?

रूस और सीरिया के बीच घनिष्ठ संबंधों का एक लंबा इतिहास रहा है और दोनों देशों के बीच सैन्य संबंध भी रहे हैं, लेकिन ताजा लड़ाई में अलेप्पो पर कब्जा करने वाले विद्रोहियों की तरफ से सोशल मीडिया पर जो एक वीडियो पोस्ट किया गया है, उसमें उन्हें सीरिया और रूसी झंडे लगे मिलिट्री ऑफिस में बैठे हुए दिखाया गया है।

जो निश्चित तौर पर सीरियाई सरकार से ज्यादा रूस के लिए चुनौती है।

रूस ने 1971 से सीरिया में अपने टार्टस नौसैनिक अड्डे का संचालन किया है। वहीं, रूस अभी भी सीरिया में खमीमिम एयर बेस और अन्य सैन्य सुविधाओं का संचालन करता है।

चैथम हाउस के मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट नील क्विलियम ने कीव इंडिपेंडेंट की एक रिपोर्ट में कहा है, कि "सीरिया भूमध्य सागर में मास्को का एकमात्र सैन्य आधार है। यह रूस को एक विश्वसनीय सहयोगी के रूप में भी प्रदर्शित करता है जो अपने सहयोगियों की रक्षा करने के लिए तैयार है, जिससे क्षेत्र में इसकी विश्वसनीयता मजबूत होती है।"

ब्रुचमैन भी इस बात से सहमत थे, कि "पूरे भूमध्य सागर और उत्तरी अफ्रीका में रूसी शक्ति प्रक्षेपण के लिए टार्टस महत्वपूर्ण है।"

उन्होंने कहा, "यह व्यापक महत्वाकांक्षाओं वाला क्षेत्र है और उसके सहयोगियों को रूस के समर्थन के लिए एक विस्तारित रसद केंद्र के रूप में कार्य करता है। पिछले कुछ महीनों में, यह आम तौर पर सतह के जहाजों, कई छोटी नावों और कभी-कभी एक पनडुब्बी की मेजबानी करता था, जो सभी नागरिक कंटेनर और आपूर्ति जहाजों के बेड़े की रखवाली करते थे।"

वहीं, यूनिवर्सिटी कॉलेज डबलिन में अंतरराष्ट्रीय राजनीति के प्रोफेसर स्कॉट लुकास ने कहा, कि रूस टार्टस बेस का उपयोग "सीरिया के उत्तर-पूर्व में अमेरिकियों की स्थिति को संतुलित करने" और यूरोप और चीन के खिलाफ अपनी शक्ति को प्रदर्शित करने के लिए कर रहा था।

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रूस ने अपनी भागीदारी कम की

अलकायदा से संबंधित इस्लामिक समूह तहरीर अल-शाम, साथ ही तुर्की समर्थित सीरियाई राष्ट्रीय सेना और अन्य समूहों ने 27 नवंबर को अलेप्पो पर आश्चर्यजनक हमला किया। तब से उन्होंने शहर के अधिकांश हिस्से पर कब्जा कर लिया है। 2016 से अलेप्पो सीरियाई सरकार के नियंत्रण में था। उस वक्त रूस ने ही अलेप्पो जीतने में असद प्रशासन की मदद की थी।

2015 से रूस ने लगातार सीरिया में युद्धक विमान, टैंक, तोपखाने और जमीनी सैनिक भेजे हैं। रूस ने सीरिया में दर्जनों एयर स्ट्राइक किए, और मानवाधिकार संगठनों का कहना है, कि आम नागरिकों पर बमबारी कर रूस ने गंभीर युद्ध अपराधों को अंजाम दिया है।

अलेप्पो में जमीन पर मौजूद सीरियाई पत्रकार फ़रेद अल महलूल ने कीव इंडिपेंडेंट को बताया है, कि "आवासीय क्षेत्रों को बहुत नुकसान हुआ है।" उन्होंने कहा, कि "घायल बच्चों सहित कई पीड़ित हैं। रूसियों को लगता है कि हम सभी आतंकवादी हैं, लेकिन वे झूठे हैं।"

पश्चिमी मीडिया और विश्लेषकों के मुताबिक, सीरिया में लगभग 5,000 रूस के नियमित सैनिक और हजारों वैगनर भाड़े के सैनिक थे।

क्विलियम ने कहा कि "रूस सीरिया में कई हजार सैनिक रखता है, हालांकि सटीक संख्या की पुष्टि करना मुश्किल है।"

उन्होंने कीव इंडिपेंडेंट को बताया, "अनुमान है कि 3,000 से 5,000 के बीच सैनिक होंगे।"

क्विलियम ने कहा कि "यूक्रेन में युद्ध ने रूस को सीरिया से कुछ महत्वपूर्ण सैन्य संसाधन वापस ले जाने के लिए मजबूर किया है।"

स्वीडिश डिफेंस रिसर्च एजेंसी के मध्य पूर्व विश्लेषक एरन लुंड ने भी कहा, कि "यूक्रेन पर आक्रमण करने से पहले की तुलना में अब सीरिया में रूस की सैन्य उपस्थिति बहुत कम है।"

अलेप्पो का पतन क्यों हुआ?

अलेप्पो के पतन में कई दिन लगे और विद्रोहियों के हमले की रफ्तार ने ऑब्जर्वर्स को चौंका दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध और इजराइल के साथ ईरान के टकराव ने असद के शहर पर नियंत्रण को कमजोर कर दिया था।

लुंड ने कहा, "अगर रूस के पास सीरिया में काम करने के लिए ज्यादा संसाधन होते, तो शायद विद्रोहियों को शुरू में ही रोक दिया जाता और असद की सेना का भी मनोबल कमजोर नहीं होता, लेकिन अब असद शासन की हालत खराब है, और ईरानी और हिज़्बुल्लाह का समर्थन भी थोड़ा कम हो गया है, इसलिए यह संभव है, कि रूस अगर और मदद करने की स्थिति में ना हो, तो असद सरकार का भी पतन हो सकता है।"

क्विलियम का तर्क है, कि मौजूदा परिस्थितियां 2020 जैसी नहीं है और अलेप्पो के साथ कुछ और इलाकों पर विद्रोहियों के कब्जे ने दिखाया है, कि 'हिज्बुल्लाह का हव्वा सिर्फ एक मिथक था और वो कागजी शेर साबित हुआ है।'

एक्सपर्ट्स का मानना है, कि मौजूदा परिस्थितियों में रूस और ईरान के लिए असद की मदद करना मुश्किल होगा।

ब्रुचमैन ने कहा, कि "ये जमीनी बल सीरियाई शासन की सुरक्षा करने में सक्षम नहीं हैं। यह काम ईरान और उसके प्रॉक्सी को करना होगा।"

उन्होंने कहा कि "रूसी वायु सेना अभी भी सीरियाई सेना और ईरानी प्रॉक्सी के लिए समर्थन के रूप में कार्य करने में सक्षम है, जो वर्तमान में बमबारी कर रहे हैं" और "अगले दिनों में, रूसी जेट संभवतः तहरीर अल-शाम की बढ़त को धीमा करने की कोशिश करेंगे, जब तक कि सीरियाई, हिजबुल्लाह और अन्य ईरानी प्रॉक्सी बल फिर से एकजुट नहीं हो जाते।"

कीव इंडिपेंडेंट से क्विलियम ने कहा, "रूस और ईरान को महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जो पूर्ण पैमाने पर समर्थन प्रदान करने की उनकी क्षमता को सीमित करती हैं।" उन्होंने कहा, कि "यूक्रेन में रूस के युद्ध और उसके परिणामस्वरूप प्रतिबंधों ने इसकी अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, जबकि ईरान को अपनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें प्रतिरोध की धुरी कमजोर पड़ी है और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध शामिल हैं।"

लुकास ने कहा, कि रूस "असद को इन क्षेत्रों को फिर से कंट्रोल हासिल करने के लिए अपना समर्थन देने में संकोच कर रहा है।"

तुर्की में स्वीडिश राजदूत और स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट में मध्य पूर्व और मध्य एशिया के विशेषज्ञ माइकल साहलिन ने कहा, कि रूस को असद के शासन की मदद करने के लिए हवाई हमलों तक ही सीमित रहना होगा। उन्होंने कीव इंडिपेंडेंट को यह भी बताया, कि रूस सीरिया में बहुत ज्यादा शामिल होने के प्रति भी सतर्क रहेगा, ताकि जनवरी में पदभार ग्रहण करने और क्रेमलिन के साथ बातचीत शुरू करने से पहले अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नाराज न किया जा सके।

साहलिन के अनुसार, रूस की भागीदारी तुर्की के साथ उसके संबंधों को भी खराब कर सकती है, जो कुछ विद्रोहियों का समर्थन करता है। लुंड ने ज्यादा सतर्कता बरतते हुए कहा, कि "रूस और ईरान असद की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेंगे और संभवतः उसे जवाबी हमला करने में मदद भी करेंगे।"

लेकिन, सीरिया में रूस को झटका लग चुका है और अगर विद्रोहियों को और बढ़त मिलती है, तो शायद रूस के पास युद्ध में शामिल होने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचेगा।

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