अंतरिक्ष में सुनीता विलियम्स की लाइफ कब तक? स्पेस सबसे अधिक समय जिंदा कौन रहा? जानिए सबकुछ
बोइंग के स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान की पहली चालक दल परीक्षण उड़ान के साथ 6 जून को अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचे अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर चार महीने बाद भी पृथ्वी पर नहीं लौट पाए हैं। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने एक बयान में कहा कि दोनों क्रू ड्रैगन के साथ अगले साल फरवरी में वापस लौटेंगे। इस बीच स्पेस एजेंसी ने एक रिपोर्ट में कहा कि दोनों एस्ट्रोनॉट्स (सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर) का स्वास्थ्य बेहतर नहीं है।
8 महीने बाद वापसी की उम्मीद
नासा ने अगस्त में एक बयान जारी कर कहा कि सुनीता विलियम्स और विल्मोर पृथ्वी पर लाना बहुत जोखिम भरा है। इसके बाद अंतरिक्ष यान 6 सितम्बर को सफलतापूर्वक वापस लौट आया। वहीं, सुनीता और विल्मोर ने स्पेस स्टेशन में रहते हुए अभियान के हिस्से के रूप में औपचारिक रूप से अपना काम जारी रखा है। दोनों क्रू ड्रैगन के साथ अगले साल फरवरी में वापस लौटेंगे। इसका मतलब है कि एक सप्ताह की परीक्षण उड़ान पर गए दोनों अंतरिक्ष यात्री 8 महीने तक अंतरिक्ष में रहेंगे।

विलियम्स और विल्मोर को हो सकती हैं ये समस्याएं
अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण सुनीता की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। लंबा समय बिताने पर उनकी हड्डियां भी कमजोर हो सकती हैं। हर महीने उनकी हड्डियों का घनत्व 1% कम हो सकता है।
स्पेस में कब तक रह सकेंगे जिंदा
अंतरिक्ष की परिस्थितियों और स्पेस क्राफ्ट की सुविधाओं को जानकारों के मुताबिक, स्पेस एजेंसिया इस व्यवस्था के साथ मिशन लांच करती हैं कि अगर कोई एस्ट्रोनॉट स्पेस में फंस जाए तो उसे वापस लाने के लिए दूसरा मिशन शुरू करने तक का वक्त मिल सके। यानी कि स्पेस एजेंसियों की ओर से शुरू किए जाने वाले संभावित रेस्क्यू मिशन के स्पेस में पहुंचने में लगाने वाले समय तक अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट को सुरक्षित रखा जा सके। बात सुनीता विलिम्स और बुच विल्मोर की हो रही है तो रिपोर्ट्स के मुताबिक अंतरिक्ष में फंसे ये दोनों 300 से 400 दिन तक स्पेस में आसानी से रह सकते हैं।
इससे पहले रूसी अंतरिक्ष यात्री वालेरी पोल्याकोव के पास अंतरिक्ष में सबसे अधिक दिन रहने का रिकॉर्ड है। वे जनवरी 1994 से मार्च 1995 तक मीर अंतरिक्ष स्टेशन पर लगातार 437 दिन रहे। बीते वर्ष अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री फ्रैंक 371 दिन अंतरिक्ष में रहने के बाद वापस लौटे हैं। फ्रैंक पर हुई शोध में पता चला कि वापस आने पर उन्हें नजर संबंधी समस्याएं, डीएनए में बदलाव, वजन में कमी और इम्यून सिस्टम में परिवर्तन देखने को मिला।
बता दें कि भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री और अमेरिकी मूल के बुच विल्मोर बोइंग के स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान की पहली चालक दल परीक्षण उड़ान के साथ 6 जून को अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचे थे। इस स्पेसक्राफ्ट को एक सप्ताह के भीतर वापस होना था,लेकिन स्पेस स्टेशन पहुंचते ही स्टारलाइनर में कुछ तकनीकी खराबी आ गई और विमान में सवार दोनों एस्ट्रोनॉट स्पेस में ही अटक गए।
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