डकैती के जुर्म में 10 साल जेल, फिर बने नंबर वन कारोबारी, वैगनर के बॉस प्रिगोजिन की अविश्वसनीय कहानी
Wagner boss Prigozhin Story: वैगनर ग्रुप के प्रमुख येवगेनी प्रिगोजिन की बुधवार (23 अगस्त) को मॉस्को के पास टवर क्षेत्र में हुई विमान दुर्घटना में मौत होने की आशंका है। आज से ठीक दो महीने पहले वैगनर चीफ प्रिगोजिन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह का ऐलान किया था, मगर दो महीने बाद एक प्लेन दुर्घटना में उनकी मौत हो गई है।
द गार्जियन की रिपोर्ट में कहा गया है, कि "रूसी विमानन प्राधिकरण रोसावियात्सिया ने कहा है, कि प्रिगोजिन बुधवार शाम को दुर्घटनाग्रस्त हुए एम्ब्रेयर बिजनेस जेट पर सवार होने वाले यात्रियों में से एक थे।" हालांकि अभी तक दुर्घटना के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं है।

वैगनर प्रमुख को आखिरी बार एक वीडियो में देखा गया था, जिसे उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में जारी किया था। इस वीडियो में उन्होंने अफ़्रीका में होने का दावा किया, जहां असफल विद्रोह के बाद से उनके लोग ट्रांसफर हो गए हैं। यह अभी तक पुष्टि नहीं हुई है, कि वीडियो कब शूट किया गया था और क्या वह इस वीडियो को शूट करने के बाद रूस लौट आए थे।
तो, आईये जानते हैं, कि येवगेनी प्रिगोजिन कौन थे और उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु महाशक्ति कैसे हासिल की?
जेल में गुजर रही थी प्रिगोजिन की जिंदगी
1 जून 1961 को लेनिनग्राद, यूएसएसआर (अब सेंट पीटर्सबर्ग, रूस) में जन्मे येवगेनी प्रिगोजिन रूस के सबसे अमीर और सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक थे। लेकिन, एक कारोबारी बनने से पहले प्रिगोजिन अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा जेल में गुजार चुके थे।
द गार्जियन के अनुसार, 1980 की शुरुआत में जब वह किशोर थे, तब उनपर कई डकैतियों में शामिल होने का आरोप था और उन्हें 13 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। वह 1990 में जेल से बाहर आ गये, क्योंकि उस वक्त तत्कालीन सोवियत संघ पतन के कगार पर था।
सोवियत संघ के पतन के समय प्रिगोजिन ने अपना खुद का व्यवसाय शुरू किया और शुरुआत में वो सेंट पीटर्सबर्ग में हॉट डॉग बेचने लगे। उनका ये काम स्ट्रीट फुड विक्रेता की तरह था।
लेकिन, कुछ ही समय में प्रिगोजिन ने कई रेस्टोरेंट खोल लिए और फिर वो कई सुपरमार्केट के मालिक बन गये।
आखिरकार साल 1995 में उन्होंने रेस्टोरेंट और कैटरिंग कंपनियों का एक नेटवर्क स्थापित कर लिया, जिसमें कॉनकॉर्ड कैटरिंग नामक प्रसिद्ध सेंट पीटर्सबर्ग स्थित कंपनी भी शामिल थी। सोवियत संघ के पतन के बाद, रूस के उपजाऊ आर्थिक माहौल में, तेजी से बढ़ते खाद्य सेवा उद्योग में पैसा बनाने की बहुत गुंजाइश थी, जिससे रूसियों को उन विलासिताओं से परिचित कराया जा सके, जिनसे उन्हें पूर्ववर्ती कम्युनिस्ट शासन में इनकार कर दिया गया था।
जल्द ही, येवगेनी प्रिगोजिन देश के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक बन गये थे।
बड़े-बड़े लोगों से दोस्ती
जैसे-जैसे प्रिगोजिन का व्यवसाय बढ़ता गया, वैसे-वैसे रूसी शासक वर्ग से उसकी निकटता भी बढ़ती गई। कॉनकॉर्ड कैटरिंग, रूस की सेना सहित विभिन्न रूसी सरकारी संस्थाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हो गई। प्रिगोजिन स्वयं एक ऐसे व्यक्ति थे, जो जानते थे कि सत्ता में बैठे लोगों के साथ कैसे "व्यवहार" करना है।
उस समय उन्हें जानने वाले एक व्यवसायी ने द गार्जियन को बताया, कि साल 2001 में जब व्लादिमीर पुतिन सत्ता में आए, तब तक प्रिगोजिन रूस के अमीर और शक्तिशाली लोगों की पसंद के कैटरर थे।
उस व्यवसाई ने बताया, कि "अगर उन्हें किसी से कुछ चाहिए, तो वह किसी भी व्यक्ति को खुश करने के लिए खुद को तैयार कर लेते थे। यह निश्चित रूप से उनकी प्रतिभाओं में से एक था।"
उस व्यवसायी ने बताया, कि जब भी पुतिन किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति कि मेजबानी करते, उदाहरण के लिए, जॉर्ज बुश या प्रिंस चार्ल्स, तो प्रिगोजिन ही खानपान उपलब्ध कराते थे। वास्तव में, गणमान्य व्यक्तियों के साथ पुतिन की मुलाकात की पुरानी तस्वीरें अक्सर बैकग्राउंड में प्रिगोजिन को दिखाती हैं।
प्रिगोजिन ने हमेशा उत्कृष्ट सेवा प्रदान की और राजनेताओं को लुभाने की अपनी प्रतिभा के साथ, उन्होंने जल्द ही व्लादिमीर पुतिन के साथ गहरी दोस्ती कर ली। और इस दोस्ती का फायदा दोनों को हुआ।
प्रिगोजिन को लगातार कैटरिंग के लिए सरकारी कॉन्ट्रैक्ट मिलते थे। उदाहरण के लिए, 2012 में, उन्होंने मॉस्को के स्कूलों में भोजन उपलब्ध कराने के लिए 10.5 बिलियन रूबल (£200m) से ज्यादा का कॉन्ट्रैक्ट जीता था। लेकिन, सफल कैटरिंग व्यवसाय के बाद भी उन्होंने साल 2014 में अपनी एक निजी सेना वैगनर ग्रुप तैयार कर ली।

क्रीमिया पर हमला और वैगनर ग्रुप
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है, कि वैगनर ग्रुप बनाने का विचार किसका था। क्या पुतिन ने प्रिगोजिन से मदद मांगी थी, प्रिगोजिन के मन में खुद ये विचार आया था। लेकिन, 2014 में वैगनर ग्रुप ने यूक्रेन के क्रीमिया किए गये रूसी हमले में रूस की सेना की मदद की थी।
क्रीमिया पर कब्ज़ा करने के बाद, वैगनर के निजी सैन्य ठेकेदारों (पीएमसी) को पूर्वी यूक्रेन में डोनबास भेजा गया, जहां उन्होंने 2014 से 2015 तक स्व-घोषित डोनेट्स्क और लुहान्स्क पीपुल्स रिपब्लिक की रूसी समर्थक अलगाववादी ताकतों की सहायता की।
इन शुरुआती अभियानों में वैगनर की सफलता की वजह से उसका तेजी से विस्तार हुआ और वैगनर, पुतिन के लिए एक प्रॉक्सी सेना बन गया, जिसका काम उन जगहों पर हस्तक्षेप करना था, जहां रूस हस्तक्षेप करना चाहता था, लेकिन आधिकारिक तौर पर नहीं कह सकता था। और येवगेनी प्रिगोझिन इसके जनरल थे।
सीरिया, वैगनर का वैश्विक विस्तार, और "बॉट फ़ार्म"
2015 के अंत में, पुतिन ने खूनी और अत्यधिक जटिल गृहयुद्ध के दौरान बशर अल-असद का समर्थन करने के लिए सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप करने का फैसला किया। प्रिगोजिन को एक बार फिर से यहां कैटरिंग का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया और इसके साथ ही वैगनर की सेना भी सीरिया पहुंच गई।
हालांकि, इस लड़ाई में वैगनर ग्रुप को भारी नुकसान हुआ, लेकिन उसने सीरिया की लड़ाई व्लादिमीर पुतिन को जीतकर दे दी। सीरिया में ही वैगनर समूह के खिलाफ युद्ध अपराधों के पहले आरोप लगाए गए थे।
द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, एक घटना में, वैगनर से जुड़े लोगों को एक सीरियाई व्यक्ति का सिर काटते और उसके टुकड़े-टुकड़े करते हुए वीडियो में कैद किया गया था।
इसके बाद, वैगनर ग्रुप पीएमसी दुनिया के लगभग हर संघर्ष में शामिल होने लगा, जहां रूस की भूमिका होती थी, सूडान और लीबिया में गृह युद्ध से लेकर अफ्रीका में वेनेजुएला तक, वैगनर ग्रुप हर युद्ध में रूस की तरफ से प्रॉक्सी लड़ाई लड़ता था।
इस दौरान प्रिगोजिन रूस में काफी एक्टिव थे और दुनियाभर में क्रेमलिन की तरफ से बातचीत करते हुए 'बॉट फॉर्म' की स्थापना कर रहे थे।
साल 2016 के अमेरिकी चुनाव में रूसी हस्तक्षेप की रॉबर्ट मुलर की जांच में आरोप लगाया गया था, कि प्रिगोजिन और उनसे जुड़ी कंपनियां डोनाल्ड ट्रम्प समर्थक फेसबुक और ट्विटर प्रोफाइल के नेटवर्क के पीछे थीं, जो जाहिर तौर पर ट्रम्प की उम्मीदवारी को बढ़ावा देने के रूसी प्रयासों का एक हिस्सा था।
पिछले साल एक बयान में प्रिगोझिन ने इस हस्तक्षेप को स्वीकार करते हुए कहा था, कि "जेंटलमैन, हमने हस्तक्षेप किया, हम हस्तक्षेप करते हैं और हम हस्तक्षेप करेंगे। सावधानीपूर्वक, सटीकता से, शल्य चिकित्सा द्वारा और अपने तरीके से, जैसा कि हम जानते हैं, कि हमें ये कैसे करना है। हम पिन प्वाइंट ऑपरेशन से एक ही बार में दोनों किडनी और लीवर निकाल लेंगे।"
जब गीदड़ की मौत आती है...
वैगनर ग्रुप रूस की तरफ से यूक्रेन में भी लड़ रहा था और उसे काफी नुकसान भी हो चुका था। लिहाजा, इस साल मई महीने में क्रूर लड़ाई के बाद वैगनर ग्रुप ने पूर्वी यूक्रेनी शहर बखमुत पर कब्ज़ा कर लिया।
लेकिन, इस दौरान प्रिगोजिन ने पहली बार पुतिन के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु और जनरल स्टाफ के प्रमुख वालेरी गेरासिमोव पर गंभीर आरोप लगाए और इन दोनों पर उन्होंने विश्वासघात के आरोप लगाए।
प्रिगोजिन ने कहा, कि उनके सैनिकों को तोप के सामने चारे की तरह इस्तेमाल किया गया है और उनके सैनिकों की जान की कोई परवाह नहीं की गई है। उन्होंने रूसी सैन्य नेतृत्व की वीडियो बनाकर तीखी आलोचना की और 5 मई को जारी एक वीडियो में उन्होंने वैगनर लड़ाकों के शव से भरे एक क्षेत्र को दिखाया।
इस वीडियो में उन्होंने अपने सैनिकों की भारी संख्या में मौत के लिए रूस के रक्षा मंत्री और जनरल स्टाफ को सीधे तौर पर जिम्मेदार बताया।
और आखिरकार 24 जून को उन्होंने रूसी नेतृत्व के खिलाफ सैन्य विद्रोह कर दिया और उन्होंने ऐलान कर दिया, कि वो मॉस्को की सत्ता को उखाड़ फेंकेंगे। ये धमकी सीधे तौर पर राष्ट्रपति पुतिन को थी। प्रिगोजिन ने ऐलान किया, कि वो 25 हजार सैनिकों के साथ मॉस्को की तरफ बढ़ रहे हैं। उनके सैनिकों को टैंक में मॉसको की तरफ कूच करते देखा गया।
लेकिन, फिर बेलारूस के राष्ट्रपति बीच में आए और उन्होंने प्रिगोजिन के विद्रोह को खत्म करवाया। लेकिन, पुतिन के साथ सालों की दोस्ती में दरार पड़ चुकी थी और कहावत है ना, कि गीदड़ की मौत आती है, तो वो शहर की तरफ भागता है, प्रिगोजिन ने अपनी सीमा लांघ दी थी। उसी वक्त से कहा जा रहा था, कि प्रिगोजिन अब ज्यादा दिनों के मेहमान नहीं है और अब प्रिगोजिन की मौत, एक प्लेन क्रैश में हो गई है।












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