स्टीव जॉब्स की बेटी ने बताया पिता से नहीं मिली मदद
स्कूल में उसने गर्व से सबको बताया कि उसके पिता स्टीव जॉब्स हैं.
उन्होंने पूछा, 'वो कौन हैं?'
"वो बहुत चर्चित हैं. उन्होंने पर्सनल कंप्यूटर का अविष्कार किया, वो एक बड़े घर में रहते हैं और कनवर्टिवल पोर्श कार चलाते हैं. जब भी उनकी गाड़ी पर कोई खरोंच आती है तो वो नई गाड़ी ख़रीद लेते हैं."
हालांकि लीसा ब्रेनन जॉब्स के अपने पिता के साथ रिश्ते बहुत सुखद नहीं थे.
लीसा ब्रेनन जॉब्स दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स की बेटी हैं और उन्होंने अपने पिता के साथ रिश्तों पर 'स्माल फ्राई' नाम से एक किताब लिखी है.
इस किताब में उन्होंने एक बेटी और उससे दूर रहने वाले पिता के बीच ठंडे रिश्तों की जटिलताओं को बताया है. स्टीव जॉब्स ने शुरू में उन्हें अपनी बेटी मानने से इनकार कर दिया था.
लिसा ब्रेनन ने वेनिटी फ़ेयर मैग्ज़ीन में लिखे एक लेख में इस किताब के कुछ अंश प्रकाशित किए हैं. इनमें स्टीव जॉब्स और उनके बीच रिश्तों की झलक मिलती है.
अपने पिता की प्यारी बेटी बनने की जद्दोजहद में उन्हें जो निराशा, भावनात्मक पीड़ा और अकेलापन मिलता है इसका ज़िक्र उन्होंने इस किताब में किया है.
हालांकि पिता और बेटी के बीच रिश्ते समय के साथ बेहतर हो गए, हालांकि वो दोनों बहुत नज़दीक कभी नहीं हो पाए.
स्टीव जॉब्स का 5 अक्तूबर 2011 को पेनक्रियाटिक कैंसर की वजह से निधन हो गया था.
उनकी ज़िंदगी के आख़िरी सालों में लीसा ब्रेनन जॉब्स उनसे मिलने अकसर जाती थीं.
ऐसी ही एक मुलाक़ात के बारे में वो लिखती हैं, "वो शॉर्ट्स पहने हुए बिस्तर में थे. उनकी टांगे नंगी थी और बांहों जितनी पतली हो गईं थीं. वो किसी टिड्डे की तरह सिकुड़े हुए थे."
"उन्हें अलविदा कहने से पहले मैंने एक सुगंधित स्प्रे इस्तेमाल किया. मैं वापस उनके बेडरुम में गई तो वो बिस्तर से उठे और मेरे गले लगे. मैं उनकी पसलियों और हड्डियों को महसूस किया."
ब्रेनन जॉनसन ने हर सप्ताहांत में अपने बीमार से मिलने और अपनी सौतेली मां लौरीन पॉवेल और तीन सौतेले भाई-बहनों के साथ मिलने जुलने की कोशिशें की.
उन्होंने लिखा, "मैंने फ़िल्मों जैसे किसी बड़े पुनर्मिलन की संभावना को छोड़ दिया था लेकिन फिर भी मैं उनसे मिलने जाती रही."
जॉब्स ने नहीं की मदद
लीसा ब्रेनन जॉब्स का जन्म 17 मई 1978 को हुआ था. उनकी मां क्रिशन ब्रेनन और स्टीव जॉब्स उस समय 23 साल के थे.
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उनकी मां ने एक दोस्त के फ़ार्महाऊस पर उन्हें जन्म दिया था और स्टीव जॉब्स वहां मौजूद थे. हालांकि उनकी मां ने किसी को नहीं बताया था कि उनका पिता कौन है.
ब्रेनन जॉब्स लिखती हैं, "मेरे दो साल का होने तक मेरी मां सोशल बेनिफ़िट्स के अलावा बर्तन धोकर और नौकरियां करके घर चलाती रहीं. मेरे पिता से उन्हें कोई मदद नहीं मिली."
1980 में कैलिफ़ोर्निया की सैंट मैटियो काउंटी के डिस्ट्रिक्ट जज ने मेरे पिता से गुज़ारा भत्ता देने के लिए कहा. उन्होंने शपथपत्र पर झूठ बोला कि वो मेरे पिता नहीं है और कहा कि वो पिता बन ही नहीं सकते हैं. उन्होंने किसी और व्यक्ति का नाम देकर उसे मेरा पिता बताया.
लेकिन डीएनए टेस्ट में स्टीव जॉब्स के लीसा ब्रेनन का पिता होने की पुष्टि हुई और अदालत ने उन्हें 500 डॉलर प्रति महीने के गुज़ारा भत्ते के अलावा सोशल इंश्यूरेंस के ख़र्चे उठाने के लिए भी कहा.
"अदालत में ये मामला 8 दिसंबर 1980 को ख़त्म हुआ. वकील मामला ख़त्म करने पर दबाव दे रहे थे. इसके चार दिन बाद ही एप्पल सार्वजनिक कंपनी बन गई और इसके अगले ही दिन मेरे पिता की संपत्ति 20 करोड़ डॉलर से ज़्यादा थी."
लीसा ब्रेनन की कहानी का सबसे प्रभावशाली हिस्सा कारों से जुड़ा है.
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'तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा'
ब्रेनन जॉब्स ने अपनी मां से सुना था कि उनके पिता अपनी पोर्श कारें खरोंच लगने के बाद ही बदल लेते हैं.
जीवन के एक दौर में जब लीसा किशोरी थीं तब सप्ताह में एक दिन वो जॉब्स के घर पर रुकती थीं क्योंकि उनकी मां को सैन फ्रांसिस्को के कॉलेज में जाना होता था.
एक दिन लीसा ने स्टीव जॉब्स से कहा कि क्या अगर जब पोर्श कार उनके किसी काम की नहीं रहेगी तो वो उसे ले सकती हैं.
स्टीव जॉब्स ने कहा, "बिलकुल नहीं." उनकी आवाज़ में कड़वाहट थी जिससे लीसा को बहुत चोट पहुंची.
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जब वो घर पहुंचे तो स्टीव जॉब्स ने कार का इंजन बंद किया और कहा, "तुम्हें कुछ भी नहीं मिलेगा, समझीं, कुछ भी नहीं."
ब्रेनन जॉब्स ने लिखा कि उनके पिता बिलकुल भी दरियादिल नहीं थे. ''न ही पैसों, न ही खाने और न ही शब्दों के मामले में."
लीसा कंप्यूटर
क्रिशन ब्रेनन के गर्भवती होने के दौरान जॉब्स ने एक कंप्यूटर पर काम करना शुरू कर दिया था. उन्होंने बाद में इस कंप्यूटर का नाम लीज़ा रखा. ये मैकिंटोश से पहले का था. ये पहला कंप्यूटर था जिसमें माऊस बाहर से लगता था.
ब्रेनन जॉब्स कहती हैं कि ये बहुत महंगा था और व्यवसायिक रूप से नाकाम रहा.
जब लीसा छोटी थीं तब उन्हें लगता था कि उनके पिता ने उनके सम्मान में उस कंप्यूटर का नाम रखा था.
एक दिन लीसा ने सीधे अपने पिता से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है.
हालांकि बाद में एक बार जब वो अपने पिता के साथ एक याट ट्रिप पर थीं तब यू2 बैंड के गायक बोने ने यही सवाल स्टीव जॉब्स से पूछा.
इस बार स्टीव जॉब्स ने कहा कि हां लीसा कंप्यूटर का नाम लीसा पर ही था.
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