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भारत आने से पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति ने तमिलों को दिया बड़ा तोहफा, आज दिल्ली आ रहे हैं रानिल विक्रमसिंघे

Sri Lanka President India Visit: श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने मंगलवार को तमिल पार्टियों को आश्वासन दिया है, कि विवादास्पद 13वां संशोधन प्रांतीय परिषदों में पुलिस शक्तियों के बिना पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा।

विक्रमसिंघे ने आज से शुरू होने वाली अपनी आधिकारिक भारत यात्रा से पहले तमिल पार्टियों से मुलाकात के दौरान उन्हें ये तोहफा देने का ऐलान किया है। पिछले साल राष्ट्रपति बनने के बाद विक्रमसिंघे की ये पहली भारत यात्रा है।

Sri Lankan President india visit today

श्रीलंका में तमिलों को बड़ा तोहफा

श्रीलंका के राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान में कहा है, कि "राष्ट्रपति ने हस्तांतरण की योजना की रूपरेखा तैयार की है, जिसमें कहा गया कि सूची 1 (प्रांतीय परिषदों के लिए आरक्षित विषय) के तहत उल्लिखित पुलिस शक्तियों को छोड़कर पूरी शक्तियों के साथ 13वां संशोधन लागू किया जाएगा।"

श्रीलंका में तमिलों के लिए ये सालों पुराना और महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है और भारत सरकार की हस्तक्षेप के बाद 13ए को लेकर सहमति बनी थी। भारत सरकार ने तमिलों और श्रीलंका सरकार के बीच 13ए को लेकर मध्यस्थता करवाई थी, लेकिन उसके बाद भी श्रीलंका सरकार ने अभी तक 13ए को लागू नहीं किया था।

तमिलों की सूची 13ए मांग क्या है?

सूची-3 में केंद्र की सहमति के अधीन प्रांतीय शक्तियां शामिल हैं, जिसमें तमिलों को स्वायत्तता देने की बात कही गई है।

श्रीलंका के राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने पहले कहा था, वो तमिलों को स्वायत्तता देने के लिए लिस्ट 13ए लागू करने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन श्रीलंका के बौद्धों ने इसका भारी विरोध किया था।

सूचि 13ए के तहत श्रीलंका की सरकार ने श्रीलंका में रहने वाले तमिलों से कई वादे किए हैं, और उन्हें कई तरह के अधिकार दिए जाएंगे, जिनमें सबसे बड़ा अधिकार ये है, कि प्रांतीय परिषदों में पुलिस, प्रांतीय परिषद के अधीन होगी, ना कि श्रीलंका की केन्द्र सरकार के।

साल 1987 में भारत और श्रीलंका के बीच एक समझौते में श्रीलंका में रहने वाले तमिलों के लिए सूचि 13ए को लेकर समझौता हुआ था।

इस समझौते के तहत तमिलों की मांग है, कि श्रीलंका की सेना ने उनकी जिन जमीनों को अपने कब्जे में ले रखा है, उन्हें छोड़ जाए। इसके साथ साथ तमिल राजनीतिक बंदियों को जेल से रिहा किया जाए, तो सालों से श्रीलंकन जेलों में बंद हैं।

इसके साथ ही तमिलों की मांग है, कि श्रीलंका के नॉर्दर्न प्रोविंशियल काउंसिल को पुलिस और जमीनों पर अधिकार दे। जैसा कि भारत में राज्य सरकारों के पास जमीन और पुलिस की ताकत होती है।

श्रीलंका के तमिल नेता दर्जनों बार भारत की अलग अलग सरकारों को उनकी मांगों के लेकर श्रीलंकन सरकार पर दबाव बनाने के लिए चिट्ठियां लिखते रहे हैं और अब जाकर श्रीलंका के राष्ट्रपति उन मांगों को स्वीकार करने के लिए सहमत हुए हैं।

तमिल पार्टियों से हुई थी मुलाकात

श्रीलंका में रहने वाले अल्पसंख्यक तमिल, सालों से राजनीतिक स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं और उस मांग को निपटाने के लिए श्रीलंकन संसद में तमिल नेशनल अलायंस (टीएनए) के साथ मंगलवार को बातचीत की गई थी।

आपको बता दें, कि टीएनए उन पार्टियों का गठबंधन है, जो उत्तर और पूर्वी क्षेत्रों के तमिलों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

वहीं, श्रीलंकन विदेश कार्यालय के अधिकारियों ने बताया, कि राष्ट्रपति विक्रमसिंघे 20 जुलाई को नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे और 21 जुलाई को भारतीय राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।

विक्रमसिंघे ने भारत समर्थित 13वें संशोधन को पूर्ण रूप से लागू करने का विचार रखा था, जिसका इतिहास के खुद को दोहराने के मामले में शक्तिशाली बौद्ध पुजारियों द्वारा विरोध किया गया था।

हालांकि, तमिलों की कुछ ज़मीनें मुक्त कर दी गईं हैं और कुछ कैदी भी रिहा कर दिए गए हैं, लेकिन तमिल पक्ष काफी हद तक असंतुष्ट रहा हैं। कुछ पूर्व उग्रवादी तमिल पार्टियां, जो टीएनए का हिस्सा नहीं हैं, उन्होंने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर 13वें संशोधन को पूर्ण रूप से लागू करने के लिए विक्रमसिंघे पर दबाव डालने का आग्रह किया है।

इस समूह में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) के पुनर्वासित पूर्व सदस्य की डेमोक्रेटिक फाइटर्स पार्टी भी शामिल है, जिसने एक अलग तमिल राज्य बनाने के लिए तीन दशक पुराना अलगाववादी युद्ध चलाया था।

उनकी मांग है, कि तमिल क्षेत्रों में जमीन और पुलिस को लेकर जो शक्तियां केन्द्र सरकार के पास हैं, उसे वापस प्रांतीय परिषद को दी जाए और 2018 के बाद स्थगित चुनावों को फिर से करवाया जाए।

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