‘चीन के कर्ज लेना बड़ी गलती’, श्रीलंका के राष्ट्रपति का बड़ा कबूलनामा, पेट्रोल की कीमत 338रु प्रति लीटर

श्रीलंका की सरकारी पेट्रोल कंपनी ने एक साथ पेट्रोल की कीमत में 80 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया है और अब पेट्रोल की कीमत पूरे देश में 338 रुपये प्रति लीटर हो चुका है...

कोलंबो, अप्रैल 19: श्रीलंका में हालात दिनों दिन बिगड़ते जा रहे हैं और ऐसा लग रहा है, कि देश की सरकार के पास स्थिति संभालने के लिए कोई उपाय नहीं बचे हैं। वहीं, समाचार एजेंसी पीटीआई ने रिपोर्ट दी है, कि श्रीलंका के सरकारी पेट्रोल कंपनी सीलोन पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने 92 ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत बढ़ाकर 338 प्रति लीटर कर दी है। यानि, श्रीलंका में एक लीटर पेट्रोल के लिए 338 रुपये चुकाने होंगे। ऐसे में आप समझ सकते हैं, कि इस द्वीप देश की स्थिति क्या हो चुकी है।

श्रीलंकाई लोगों पर असीम बोझ

श्रीलंकाई लोगों पर असीम बोझ

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका की सरकारी पेट्रोल कंपनी ने एक साथ पेट्रोल की कीमत में 80 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया है और अब पेट्रोल की कीमत पूरे देश में 338 रुपये प्रति लीटर हो चुका है, जिससे श्रीलंका के लोगों की आर्थिक दुर्दशा का अंदाजा बहुत आसानी से लगाया जा सकता है। अगर डीजल और पेट्रोल की कीमत इतनी ज्यादा हो चुकी है, तो फिर देश में महंगाई की स्थिति क्या होगी, आसानी से समझा जा सकता है। श्रीलंका की सरकारी तेल कंपनी ने जो पेट्रोल की कीमत में इजाफा किया है, वो अब श्रीलंका में स्थित इंडियन ऑयल कंपनी के पेट्रोल के कीमत के बराबर हो गई है और पिछले एक महीने में दूसरी बार श्रीलंका की सरकार तेल कंपनी ने कीमतों में भारी इजाफा किया है और पिछले 6 महीने में पांचवी बार पेट्रोल की कीमतों में भयंकर इजाफा किया गया है।

बुरी तरह गिरी श्रीलंकन करेंसी

बुरी तरह गिरी श्रीलंकन करेंसी

श्रीलंका की सरकारी तेल कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि, तेल की उच्च वैश्विक कीमतें और डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई रुपये का मूल्यह्रास, सरकार के 7 मार्च के फैसले के बाद मुक्त फ्लोट करने का मुख्य कारण था। श्रीलंका विदेशी मुद्रा की कमी के कारण उत्पन्न संकट से लड़ रहा है, जिसका मतलब यह है, कि वह खाद्य और ईंधन जैसे स्टेपल आयात करने का जोखिम नहीं उठा सकता है। 7 मार्च के बाद से श्रीलंकाई रुपया 60 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया है।

भारतीय मदद भी काफी नहीं

भारतीय मदद भी काफी नहीं

भारत ने आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी के लिए श्रीलंका को 2 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज दिया है। इसके साथ ही भारत ने 500 मिलियन डॉलर ईंधन खरीदने के लिए श्रीलंका को दिया है, जिसके तहत लगभग 300,000 टन ईंधन की आपूर्ति की गई है, लेकिन, इसके बावजूद श्रीलंका के ईंधन स्टेशनों के सूखने की संभावना है। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के खिलाफ सार्वजनिक आंदोलन के मंगलवार को ग्यारहवें दिन में प्रवेश के बाद ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।

राष्ट्रपति ने मानी गलतियां

राष्ट्रपति ने मानी गलतियां

श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे ने सोमवार को पहली बार देश की दुर्दशा के लिए सरकार की गलतियां मानी है और उन्होंने स्वीकार किया है, कि आईएमफ से संपर्क करने में नाकामयाब रहे, जो एक बड़ी गलती है और उन्होंने अपने देश की जनता से अपनी इस गलती को सुधारने का वादा किया है। इसके साथ ही राष्ट्रपति राजपक्षे ने यह भी स्वीकार किया है, कि देश में अचानकर जैविक उर्वरक से ही खेती करने की व्यवस्था को लागू करना भी एक बड़ी गलती है। विश्लेषकों का कहना है कि, जो श्रीलंका चावल का निर्यातक था, उसके पास खाने के लिए चावल ही नहीं है, क्योंकि जैविक उर्वरक की अनिवार्यता से किसान खेती ही नहीं कर पाए।

चीन से कर्ज लेना गलती

चीन से कर्ज लेना गलती

इसके साथ ही श्रीलंका के राष्ट्रपति ने पहली बार स्वीकार किया है, कि देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए अंधाधुंध लोन लेना उनकी सरकार की सबसे बड़ी गलतियों में से एक है, खासक चीन से छिपे हुए शर्तों पर कर्ज लेना एक बड़ी गलती है, क्योंकि, चीन ने जो इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास किया है, उससे श्रीलंका के पास पैसा हीं नहीं आया। आपको बता दें कि, भारत ने हमेशा से श्रीलंका को चीन से कर्ज लेने पर सतर्क किया था, लेकिन भारत विरोध में 'अंधी' हो चुकी राजपक्षे सरकार ने ना ही भारत की बात मानी और ना ही अमेरिका की चेतावनी से सतर्क हुआ। चीन ने श्रीलंका को जिन शर्तों पर अरबों डॉलर कर्ज दिया है, वो शर्तें गुप्त हैं और श्रीलंका उन शर्तों का खुलासा नहीं कर सकता है।

आएमएफ से श्रीलंका की गुहार

आएमएफ से श्रीलंका की गुहार

चीन के कहने पर ही श्रीलंका लगातार आईएमएफ से दूर रहा और आईएमएफ ने भी श्रीलंका को चीन से सतर्क रहने की सलाह दी थी, लेकिन श्रीलंका लगातार विदेशों से कर्ज लेता चला गया और इस वक्त श्रीलंका के ऊपर 51 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज है, जिसका ब्याज चुकाने के लिए भी उसके पास पैसे नहीं हैं। अब श्रीलंका आईएमएफ से 4 अरब डॉलर का कर्ज मांग रहा है, ताकि वो ब्याज चुका सके। श्रीलंका के वित्त मंत्री के एक सहयोगी ने मंगलवार को कहा कि, श्रीलंका ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से तेजी से वित्तीय सहायता के लिए अनुरोध किया है और रिपोर्ट के मुताबिक, आईएमएफ श्रीलंका को लोन देने पर सहमत नहीं है, लेकिन वो श्रीलंका के अनुरोध पर विचार कर सकता है।

आईएमएफ से श्रीलंका की बातचीत

आईएमएफ से श्रीलंका की बातचीत

रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका के वित्त मंत्री अली सबरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को वाशिंगटन में आईएमएफ के साथ औपचारिक वार्ता शुरू की है, जिसको लेकर सरकार को उम्मीद है, कि आईएमएफ से लोन मिलने के बाद उसे अपने तेल भंडार को ऊपर उठाने में मदद करेगी और ईंधन, भोजन और दवाओं के आवश्यक आयात के भुगतान के लिए उसके पास पैसे होंगे। श्रीलंका के वित्त मंत्री सबरी के सहयोगी समीर जवाहिर ने ट्विटर पर कहा कि, "(विदेश मंत्री) ने मौजूदा आपूर्ति श्रृंखला के मुद्दों को कम करने के लिए एक रैपिड फाइनेंसिंग इंस्ट्रूमेंट (आरएफआई) के लिए अनुरोध किया है, फिर भी शुरुआत में आईएमएफ का मानना था कि यह उनके मानदंडों को पूरा नहीं करता है।"

भारत कर रहा है श्रीलंका की पैरवी

भारत कर रहा है श्रीलंका की पैरवी

श्रीलंकर वित्तमंत्री के सहयोगी समीर जवाहिर ने कहा कि, 'आईएमएफ के सामने श्रीलंका को आरएफाआई देने के लिए भारत ने प्रजेंटेशन दिया है और भारत की पैरवी पर आईएमएफ अद्वितीय परिस्थितियों में श्रीलंका को मदद देने के लिए तैयार हो सकता है'। आपको बता दें कि, सबरी ने इस महीने की शुरुआत में रॉयटर्स को बताया था कि, श्रीलंका आईएमएफ, विश्व बैंक और भारत सहित कई स्रोतों के जरिए आने वाले महीनों में 3 अरब डॉलर जुटाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, पिछले हफ्ते श्रीलंका की सरकार ने फिलहाल तमाम विदेशी कर्ज को चुकाने से इनकार कर दिया है।

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