Sri Lanka Tamil Killings: श्रीलंका में मिली सामूहिक लाशों वाली कब्र? फिर उठा तमिल लोगों की हत्याओं का मामला?
Sri Lanka Tamil Killings: श्रीलंका के उत्तरी जाफना का चेम्मानी गांव में तकरीबन 25 साल बाद एक ऐसी सामूहिक कब्र मिली है जिसमें कई मासूम लोगों को उनके अलग होने की वजह से मार दिया गया। इसके बाद एक बार फिर श्रीलंका अंतर्राष्ट्रीय अखबारों की सुर्खियों में आ गया है। जिसकी वजह से वहां की सरकार के सामने अब एक नई मुसीबत है।
अब तक 45 नए कंकाल मिले
चेम्मानी गांव के दबे हुए सच का पता फरवरी 2025 में तब चला जब चेम्मानी-सिंदुपति हिंदू कब्रिस्तान के पास निर्माण कार्य में जुटे मजदूरों को मानव अवशेष मिले। जिसके बाद पुलिस में मामला दर्ज किया गया और जाफना मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा प्रारंभिक जांच की गई। 20 फरवरी को, अदालत ने खुदाई का आदेश दिया और 2 जून को फोरेंसिक और पुरातत्वविद् प्रोफेसर राज सोमादेव के नेतृत्व वाली टीम ने 19 कंकालों के अवशेषों का पता लगाया। 5 जुलाई तक, चल रही खुदाई में बच्चों सहित 45 कंकाल मिले हैं, जिन्हें अस्थायी रूप से जाफना विश्वविद्यालय में रखा गया है।

क्यों चर्चा में आया जाफना आईलैंड?
चेम्मानी के बारे में 1998 तक कोई नहीं जानता था, लेकिन जब लांस कॉर्पोरल सोमरात्ने राजपक्षे नाम के एक आरोपी सैनिक ने 18 साल की क्रिशांती कुमारस्वामी के बलात्कार और हत्या के मामले में इस बारे में गवाही दी। राजपक्षे ने खुलासा किया कि 1995-1996 में सेना द्वारा कंट्रोल करने के बाद जाफना आइलैंड से गायब हुए सैकड़ों लोगों को मार दिया गया और चेम्मानी के पास सामूहिक कब्रों में दफना दिया गया।
#ChemmaniMassGraves இராண்டாம் கட்ட அகழ்வுப் பணியின் 16 நாள் பணிகளின்போது (21.07.2025) மேலும் 7 மனித எலும்புக்கூட்டுத் தொகுதிகள் அடையாளம்.
மொத்தமாக 72 எலும்புக்கூட்டுத் தொகுதிகள் அடையாளம் காணப்பட்டுள்ளதோடு 65 அகழ்ந்தெடுக்கப்பட்டுள்ளன.#lka #SriLanka #MassGrave
— Maatram (@MaatramSL) July 21, 2025
📷@Prabhakaranlk pic.twitter.com/heHFKsEBDY
1996 के घावों को खोल रही खुदाई
1999 में प्रारंभिक खुदाई में 15 शव मिले, जिनमें से दो की पहचान 1996 में गायब हुए पुरुषों के रूप में हुई। वहीं 2025 की खुदाई पुराने घावों को फिर से खोल रही है और श्रीलंका की सामूहिक कब्रों में अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की जा रही है।
25 जून को चेम्मानी का दौरा करते हुए मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने कहा कि "श्रीलंका एक जिम्मेदार की तरह आगे बढ़ने के लिए कोशिश कर रहा है, जो विश्वसनीय भी है और पीड़ितों का विश्वास और भरोसा रखते हैं।"
उन्होंने इस प्रक्रिया का नेतृत्व करने के लिए राज्य की जिम्मेदारी पर जोर दिया, जबकि अंतरराष्ट्रीय समर्थन के महत्व को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि चेम्मानी श्रीलंका के "सामूहिक शर्म और अतिरिक्त न्यायिक हत्याओं से निपटने और सच्चाई, न्याय और जवाबदेही प्रदान करने में बड़ी असफलता का उदाहरण है।
श्रीलंका में एक नहीं कई कब्रें
चेम्मानी के अलावा, कई अन्य सामूहिक कब्रें गायब होने की लहरों और न्याय की अनुपस्थिति की गवाह हैं। चेम्मानी के पास अल्फ्रेड दुरैयप्पा स्टेडियम सामूहिक कब्र है, जिसकी खोज 1999 में हुई थी। अन्य स्थलों में उत्तर में कोक्कुथोडुवाई और मुल्लैतिवु सामूहिक कब्रें शामिल हैं। 2013 में खोजी गई मन्नार कब्र से 346 कंकाल मिले हैं, जिनमें से फोरेंसिक पुरातत्वविदों ने कार्बन डेटिंग विवादों के बावजूद अवशेषों को युद्धकालीन घटनाओं से जोड़ा है।"
300 बच्चों के कंकाल का अंदेशा
इसके पहले, 1994 में खोजी गई सूर्याकंडा सामूहिक कब्रिस्तान में 1988-1990 के जनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) विद्रोह के दौरान मारे गए लगभग 300 स्कूली बच्चों के शव होने का अनुमान है। मध्य श्रीलंका में मताले सामूहिक कब्र भी इसी अवधि से जुड़ी हुई है और यहां भी कंकाल मिलने की संभावना है।
श्रीलंकाई सरकारों ने अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की कभी पुख्ता कोशिशें नहीं की। सार्वजनिक आंदोलन और मानवाधिकार लॉबिइंग ने अंतर्राष्ट्रीय ध्यान जरूर खींचा लेकिन वो काफी नहीं है। 2006 में संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक एल्स्टन फिलिप ने हत्याओं पर निरंतर कार्रवाई और जिम्मेदार लोगों की पहचान करने का आह्वान किया।
जांच में सरकार बनी रोड़ा
जबकि 2017 में UNHRC ने श्रीलंका में जांच के दौरान, एक विशेष जांच तंत्र, पीड़ित और गवाह संरक्षण, और नए सबूत इकठ्ठे करने की सिफारिश की। इसके बाद 2021 में UNHRC ने ये भी कहा कि जांच और आरोप तय करने में सरकार राजनीतिक बाधाएं पैदा कर रही है।
#SriLanka: @volker_turk today visited Chemmani mass grave site near Jaffna and met families of disappeared. Investigation must be impartial and thorough in line with international standards. Dozens of mass grave sites have been discovered throughout country. pic.twitter.com/8vNGOQqaGG
— UN Human Rights (@UNHumanRights) June 25, 2025
तमाम बने आयोग लेकिन नतीज सिफर
जांच के कई आयोगों, जिनमें उदालागामा आयोग (2006), LLRC (Lesson Learnt and Reconciliation Commission) और सुलह आयोग (2010), और परानागामा आयोग (2013) जैसे कमीशन सच्चाई सामने लाने और ठीक से जांच करने में बुरी तरह फेल हुए। 2021 के एक आयोग ने पिछली निष्कर्षों की जांच की, 2023 में राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे को दी गई इसकी सिफारिशें अभी भी अज्ञात हैं। अब अधिकांश उम्मीदें अनुरा दिसानायके की अध्यक्षता पर टिकी हैं कि वे न्याय और जवाबदेही तय करेंगे, खासकर नवंबर के चुनावों में एनपीपी के लिए तमिल समर्थन को देखते हुए, जो विश्वास-निर्माण के वादों पर टिकी है।
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