Srilanka Crisis: ब्रिजिंग फाइनेंस की तलाश में जुटा श्रीलंका, संकट में फंसे देश ने भारत से लगाई ये उम्मीदें
नई दिल्ली, 17 अप्रैल। आर्थिक संकट से जूझा रहा श्रीलंका अब द्विपक्षीय और बहुपक्षीय भागीदारों के माध्यम से ब्रिजिंग वित्त को सुरक्षित करने के प्रयास में जुटा है। इसके लिए वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन हासिल करने का प्रयास कर रहा है। श्रीलंका ब्रिजिंग वित्त को सुरक्षित करने और आर्थिक समायोजन कार्यक्रम के लिए भारत से सहायता मांगी थी। रिपोर्ट्स के अनुसार इसके लिए श्रीलंका के उच्चायुक्त मोरागोडा और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से चर्चा की है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने श्रीलंका के अपने समकक्ष और उच्चायुक्त के साथ कई दौर की चर्चा की गई है। रिपोर्टस की मानें तो श्रीलंका की ओ से भारत से अन्य देशों से भी श्रीलंका के लिए मदद करने में सहायता करने की बात कही थी। जिसके बाद भारत ने अपने मित्र देशों जापान जैसे मित्र देशों पर अपने प्रभाव का उपयोग करने के लिए कोलंबो को क्रेडिट लाइन के साथ मदद करने के लिए कहा गया है। कोलंबो भारत और अन्य देशों से इस अवधि के लिए ब्रिजिंग फाइनेंस की तलाश कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार श्रीलंका के लिए भारत पहला और एकमात्र देश है जो उसे वित्तीय संकट से बाहर निकालने के लिए आगे आ रहा है। कोलंबो इसे नई दिल्ली के साथ द्विपक्षीय संबंधों में एक नए अध्याय के रूप में देखता है।
इस बीच, श्रीलंका के वित्त मंत्री अली साबरी के आने की उम्मीद है। आगामी सप्ताह में वाशिंगटन डीसी में उनकी मुलाकात वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से हो सकती है। दरअसल, एशियन क्लियरिंग यूनियन में भोजन, ईंधन, दवा, मुद्रा विनिमय और भुगतान के स्थगन के लिए लाइन-ऑफ-क्रेडिट के रूप में भारत पहले ही श्रीलंका को 2.4 बिलियन अमरीकी डालर की सहायता प्रदान कर चुका है। वहीं भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन के साथ श्रीलंका के राष्ट्रपति सलाहकार समूह के सदस्यों के बीच तकनीकि विषयों पर चर्चा हो रही है। श्रीलंका कल आईएमएफ के साथ बातचीत शुरू करेगा और इस प्रक्रिया को चालू होने में लगभग चार महीने लगने की संभावना है।
पिछले कई वर्षों से श्रीलंका आर्थिक संकट कि स्थिति से जूझ रहा है। इस संकट से उबरने के लिए श्रीलंका अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ बातचीत कर चुका है। फिलहाल श्रीलंका को खैरात कार्यक्रम के तहत आईएमएफ की ओर से अब तक कोई सकारत्मक कदम उठते नहीं दिखाई दे रहे। वहीं घोर आर्थिक संकट से हर रोज जूझ रहे लोग प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। श्रीलंका के प्रदर्शनकारी पीएम और राष्ट्रपति के देश छोड़ने की मांग कर रहे हैं।












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