200 रुपये किलो चावल, चीनी 240, तेल 850 रुपये लीटर, जानें श्रीलंका में लोग कैसे कर रहे हैं गुजारा
200 रुपये किलो चावल, चीनी 240, तेल 850 रुपये लीटर, जानें श्रीलंका में लोग कैसे कर रहे हैं गुजारा
कोलंबो, 03 अप्रैल: श्रीलंका में बढ़ती आर्थिक संकटों, बढ़ती मुद्रास्फीति और कमजोर मुद्रा की वजह से राशन और बुनियादी वस्तुओं की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। श्रीलंका में आर्थिक मंदी के दौर में राष्ट्र में लोग ईंधन, भोजन और दवाइयां खरीदने के लिए घंटों कतार में खड़े रह रहे हैं। कई बार तो घंटों दुकान और सुपरमार्केट की लाइन में खड़े होने के बाद भी लोगों को सामान नहीं मिलता है। या तो दुकान का सामान खत्म हो जाता है या फिर ग्राहकों के पैसे खत्म हो जाते हैं।

200-190 रुपये किलो मिल रहे हैं श्रीलंका में चावल और आटा
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक उनकी टीम ने राजधानी कोलंबो में एक सुपरमार्केट का दौरा किया है। मीडिया टीम यह देखने के लिए वहां पहुंची थी कि दैनिक किराने के सामान के लिए श्रीलंका के लोगों को कितना खर्च करना पड़ता है। हाल के हफ्तों में सब्जियों की कीमतें वहां दोगुनी हो गई हैं। जबकि चावल और गेहूं जैसे अनाज क्रमश 220 रुपये प्रति किलोग्राम और 190 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिक रहे हैं।
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240 रुपये किलो चीनी और 850 रुपये लीटर बिक रहे हैं तेल
श्रीलंका में एक किलोग्राम चीनी 240 रुपये में मिल रही है, जबकि नारियल तेल 850 रुपये प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है। एक अंडे की कीमत 30 रुपये है। दूध पाउडर का एक किलो पैक अब 1900 रुपये में बिक रहा है।

मुद्रास्फीति पहले से 17.5% बढ़ी
फरवरी में श्रीलंका की खुदरा मुद्रास्फीति पहले ही 17.5 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है और खाद्य मुद्रास्फीति 25 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई है, जिससे खाद्य और अनाज की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि हुई है। दवाओं और मिल्क पाउडर की भी श्रीलंका में भारी किल्लत है।

लंका में बढ़ता जा रहा है जनता का गुस्सा
संकट के मद्देनजर सरकार के खिलाफ जनता का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। राजधानी सहित देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। आंदोलनकारियों ने राजपक्षे शासन को आवश्यक वस्तुओं की कमी और लंबे समय तक बिजली की कटौती के लिए दोषी ठहराया है।

विरोध प्रदर्शनों के बीच श्रीलंका में लगा कर्फ्यू
व्यापक अशांति को शांत करने के लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी है, जिसके बाद सरकार विरोधी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बीच 36 घंटे का कर्फ्यू लगा दिया गया है।












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