ना दवाई, ना खाना, ना तेल, ना कागज...10 घंटे से कटी है बिजली... श्रीलंका में काफी ज्यादा बिगड़े हालात

विदेशी मुद्रा की गंभीर कमी ने श्रीलंका को महत्वपूर्ण सामानों के आयात रोकने के लिए मजबूर कर दिया है। जिसमें जीवन रक्षक दवाएं भी शामिल हैं।

कोलंबो, मार्च 30: ऐतिहासिक आर्थिक संकट से जूझ रहे भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका की स्थिति अब काफी ज्यादा खराब हो चुकी है और श्रीलंका के कई इलाकों में पिछले 10 घंटे से ज्यादा वक्त से बिजली नहीं है और लोग मोमबत्तियों के सहारे रात गुजारने पर बेबस हैं। श्रीलंका में पेट्रोल पंपों के बाहर घंटों तक हजारों लोग तेल के लिए कतारों में खड़े रहते हैं और जब शरीर जवाब दे जाता है, तो लोग बेहोश होकर गिर जाते हैं। चीन से कर्ज लेना श्रीलंका को इस कदर भारी पड़ेगा, ये श्रीलंका के आम लोगों ने कभी नहीं सोचा होगा।

श्रीलंका में बुरी तरह बिगड़े हालात

श्रीलंका में बुरी तरह बिगड़े हालात

विदेशी मुद्रा की गंभीर कमी ने श्रीलंका को महत्वपूर्ण सामानों के आयात रोकने के लिए मजबूर कर दिया है। जिसमें जीवन रक्षक दवाएं भी शामिल हैं। श्रीलंका के पास विदेशी मुद्रा खत्म हो चुका है और किसी भी तरह के सामान खरीदने के लिए श्रीलंका के पास पैसे ही नहीं बचे हैं, लिहाजा दवाएं, कागज और सीमेंट का आयात भी बंद हो गया है। श्रीलंका के पेट्रोल पंपों के बाहर सुबह होने से पहले ही लोगों की कतारें लगनी शुरू हो जाती हैं और घंटों तक लोग लाइन में लगे रहते हैं। जिसके बाद लोगों को गुस्सा भी भड़कने लगा है। श्रीलंकन सरकार की अकर्मंण्यता और चीन की गोदी में झुलने की ख्वाहिश ने इस देश को कहीं का नहीं छोड़ा है। श्रीलंका में खाने पीने की सामान की कीमत आसमान तक पहुंच चुकी हैं और लोगों को 100-100 ग्राम दूध खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

केरोसिन तेल के लिए घंटो इंतजार

केरोसिन तेल के लिए घंटो इंतजार

कोलंबो से समाचार एजेंसी एएफपी ने रिपोर्ट दी है, कि देश में स्थिति विकराल है और सगयारानी नाम की एक महिला, जो केरोसिन तेल लेने के लिए लाइन में लगी थी, उसने बताया कि, "मैं यहां पिछले पांच घंटों से खड़ी हूं'। महिला ने कहा कि, घर में चूल्हा तभी जलेगा जब केरोसिन तेल मिलेगा। यानि, राजधानी कोलंबो में भी सैकड़ों घरों के चूल्हे केरोसिन के इंतजार में नहीं जले हैं, तो फिर आप देश के बाकी हिस्सों के हालात समझ सकते हैं। महिला ने बताया कि, उसने पहले ही तीन लोगों को बेहोश होते देखा है और वह खुद इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती थी, लेकिन उसके पति और बेटे काम कर गये हैं और उसके पास चिलचिलाती धूप में इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उसने कहा कि, "मैंने कुछ नहीं खाया है, मुझे बहुत चक्कर आ रहा है और बहुत गर्मी है, लेकिन हम क्या कर सकते हैं? यह बहुत मुश्किल है'।

जनजीवन हुआ अस्तव्यस्त

जनजीवन हुआ अस्तव्यस्त

स्थिति ये है, कि तेल नहीं होने की वजह से ट्रकों में भरा खाने का सामान दूसरे शहरों तक नहीं जा पा रहा है। वहीं, श्रीलंका की हरी-भरी पहाड़ियों के आसपास स्थित चाय बागानों से चाय वापस लाने के लिए ट्रकों के पास तेल नहीं हैं। राजधानी कोलंबों में सैकड़ों मजदूर रोजगार की तलाश में बैठे रहते हैं, लेकिन उन्हें काम देने वाला कोई नहीं मिलता है। वहीं, कई श्रीलंकन अस्पतालों में सामान्य सर्जरी को स्थगित कर दिया गया। वहीं, कागज की कमी के चलते श्रीलंका में परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं और कई अखबारों का प्रकाशन भी बंद हो गया है। एक घरेलू कामगार वादिवु ने एएफपी को बताया, "मैं कोलंबो में 60 साल से रह रहा हूं और मैंने ऐसा कभी नहीं देखा है। खाने के लिए कुछ नहीं है, पीने के लिए कुछ भी नहीं है'। बुजुर्ग ने कहा कि, 'राजनेता विलासिता में जी रहे हैं और हम सड़कों पर भीख मांग रहे हैं।'

अब हर दिन 10 घंटे बिजली कटौती

अब हर दिन 10 घंटे बिजली कटौती

श्रीलंका में बुधवार से हर दिन 10 घंटे की दैनिक बिजली कटौती की घोषणा की गई है। सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड ने एक बयान में कहा कि, वे "ईंधन की कमी और जनरेटर की अनुपलब्धता के परिणामस्वरूप अपर्याप्त बिजली उत्पादन के कारण बिजली की डिमांड पूरी कर पाने और लोगों तक बिजली पहुंचाने में असमर्थ हैं।' श्रीलंका की 2 करोड़ 20 लाख की आबादी के लिए ये काफी मुश्किल हालात हैं। इससे पहले 1970 के दशक में वैश्विक तेल संकट के दौरान अधिकारियों ने चीनी जैसी आवश्यक चीजों के लिए राशन कार्ड जारी किए थे। वहीं, सरकार मानती है कि 1948 में दक्षिण एशियाई राष्ट्र की स्वतंत्रता के बाद से वर्तमान आर्थिक आपदा सबसे खराब है, और अब श्रीलंका के लोगों में राजपक्षे सरकार के खिलाफ गुस्सा पनप रहा है, जिसने देश को चीन के हाथों में मरने के लिए छोड़ दिया है। इससे पहले साल 2016 में श्रीलंका के किसान भीषण सूखे की चपेट में आ गये थे और 2019 में तीन साल बाद ईस्टर संडे के दिन इस्लामिक आतंकियों द्वारा बम विस्फोट में कम से कम 279 लोगों की मौत हो गई थी, उस वजह से भी देश को बड़ा झटका लगा था, जब सैलानियों ने श्रीलंका आना बंद कर दिया था।

अभी और बिगड़ेंगे हालात

अभी और बिगड़ेंगे हालात

कोलंबो स्थित एडवोकाटा इंस्टीट्यूट थिंक टैंक के अध्यक्ष मुर्तजा जाफरजी ने कहा कि, चीन से कर्ज लेने के अलावा कोरोनोवायरस महामारी ने भी देश की आर्थिक स्थिति को काफी नुकसान पहुंचाया और देश के पर्यटन उद्योग को तबाह कर दिया है। कोरोना वायरस की वजह से श्रीलंका में विदेशों नागरिकों का आना साफ बंद हो चुका है। श्रीलंका की अर्थव्यवस्था के लिए पर्यटन ऑक्सीजन का काम करता है और पर्यटन उद्योग से देश को विदेशी मुद्रा मिलती है, जो देश के 51 अरब डॉलर के विदेशी ऋण के आयात और सेवा के लिए आवश्यक हैं। लेकिन एक बहुत बड़ा कारक सरकारी "कुप्रबंधन" है। उन्होंने पुराने बजट घाटे के वर्षों को दोषी ठहराया है।

सरकार की वजह से बिगड़े हालात

सरकार की वजह से बिगड़े हालात

उन्होंने कहा कि, सरकार ने सफेद-हाथी परियोजनाओं पर सार्वजनिक धन को भी बर्बाद कर दिया है, जिसमें कमल के आकार की गगनचुंबी इमारत भी शामिल है, जो कोलंबो के क्षितिज पर हावी है, जिसमें एक घूमने वाला रेस्टोरेंट भी है जो अब किसी काम का नहीं है। उन्होंने कहा कि, श्रीलंका में सरकार की खराब नीतिगत फैसलों ने देश के लिए मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। पिछले साल अधिकारियों ने घोषणा की थी, कि श्रीलंका दुनिया का पहला पूरी तरह से जैविक खेती वाला देश बन जाएगा और विदेशी मुद्रा को बाहर जाने से रोका जाएगा और पूरा देश रातोंरात जैविक उर्वरक पर निर्भर हो जाएगा। लेकिन, ऐसा नहीं हो पाया। श्रीलंका की सरकार ने चीन की कंपनियों को जैविक खाद उत्पादन करने का ठेका दिया, लेकिन चीनी कंपनियों ने श्रीलंका में खराब खाद भेज दिया और जब श्रीलंका ने मना किया, तो चीन ने श्रीलंका के केन्द्रीय बैंक पर ही प्रतिबंध लगा दिया। स्थिति बिगड़ी, तो सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया।

मदद के लिए सामने आया भारत

मदद के लिए सामने आया भारत

श्रीलंका के दुर्दीन देखकर भारत का दिल पसीज गया। श्रीलंका के दौरे पर गये भारतीय विदेश मंत्री ने जब देखा, कि अस्पतालों ने दवाओं की कमी की वजह से ऑपरेशन रोक दिया है, तो फिर उन्होंने अस्पतालों की मदद करने के लिए भारत से दवाएं भेजने की बात कही है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि श्रीलंका की दयनीय आर्थिक स्थिति के बीच उन्होंने एक श्रीलंकाई पत्रकार का ट्वीट पढ़ा, जिसे पढ़कर वह परेशान हो गए थे। श्रीलंका के पत्रकार अयूबोवन ने #EconomicCrisisLK के साथ ट्वीट करते हुए लिखा- दवाओं की कमी के कारण पेराडेनिया अस्पताल में निर्धारित सर्जरी को निलंबित कर दिया गया। वहां केवल आपातकालीन सर्जरी हो रही है। पत्रकार के इस ट्वीट को #NeighbourhoodFirst के साथ रिट्वीट करते हुए विदेशमंत्री एस जयशंकर ने लिखा- इस खबर से काफी व्यथित हूं। मैं उच्चायुक्त बागले से संपर्क करने और चर्चा करने के लिए कह रहा हूं कि भारत इसमें कैसे मदद कर सकता है।

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