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कर्ज चुकाने के लिए श्रीलंका को पेरिस क्लब ने सुझाया फॉर्मूला, मोहलत का फायदा उठा पाएगा द्वीप देश?

श्रीलंका कर्ज की वजह से पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है। आने वाले कुछ महीने में भी उसे इससे निजात मिलता नहीं दिख रहा है। इसी बीच पेरिस क्लब ने श्रीलंका को कर्ज चुकाने के लिए एक फॉर्मूल सुझावा है।

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कर्ज में डूबने की वजह से श्रीलंका पूरी तर बर्बाद हो चुका है। इसी बीच श्रीलंका को कर्ज चुकाने के लिए पेरिस क्लब ने एक फॉर्मूल सुझावा है। इसके मुताबिक दुनिया के उत्तरी और दक्षिणी देशों की समृद्धि के लिए पेरिस क्लब ने श्रीलंका को मौजूदा कर्ज चुकाने के लिए 10 साल की मोहलत और द्वीप राष्ट्र में मौजूदा वित्तीय संकट को हल करने के लिए एक फार्मूले के रूप में 15 साल के ऋण पुनर्गठन का प्रस्ताव दिया है।

हालांकि, पेरिस क्लब को अभी भी औपचारिक रूप से भारत और चीन तक पहुंचना बाकी है। क्योंकि श्रीलंका ने इन दोनों देशों से कर्ज लिया है। इनमें बीजिंग से श्रीलंका ने सबसे ज्यादा 50 प्रतिशत ऋण लिया है। इसे देखते हुए श्रीलंका जिनपिंग शासन से अपनी ओर से बातचीत शुरू कर रहा है। वहीं,माना जा रहा है कि इस महीने आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड से स्वीकृत 2.9 बिलियन अमरीकी डालर की विस्तारित फंड सुविधा को मंजूरी देने की संभावना न के बराबर है। ऐसे में ब्रेटन वुड्स संस्था द्वारा किसी भी सहायता को बढ़ाए जाने से पहले श्रीलंका को आईएमएफ की मार्च की बैठक का इंतजार करना होगा।

इधर, श्रीलंका की तरफ से भारत से लिए गए कर्ज की बात करें तो उसके ऊपर लगभग 800 मिलियन अमरीकी डालर का ऋण है। मोदी सरकार ने आर्थिक संकट से निपटने के लिए द्वीप राष्ट्र को चार बिलियन अमरीकी डालर की आपातकालीन सहायता प्रदान की है। जबकि श्रीलंका ने चीन, चीनी एक्ज़िम और चीन विकास बैंक ने श्रीलंका के साथ अरबों अमेरिकी डॉलर का ऋण लिया है, जिसमें द्वीप राष्ट्र का कुल बाहरी ऋण लगभग 40 बिलियन अमरीकी डालर है।

श्रीलंका सरकार का सार्वजनिक ऋण 2021 के अंत में सकल घरेलू उत्पाद के 115.3 प्रतिशत से बढ़कर जून 2022 के अंत में सकल घरेलू उत्पाद का 143.7 प्रतिशत हो गया है। जबकि 2022 के दौरान विदेशी मुद्रा मूल्यह्रास, मंदी और राजकोषीय घाटे के कारण ऋण में और वृद्धि हुई है। फिलहाल श्रीलंका की अर्थव्यवस्था अभी सुधार के हालात नहीं दिखाई दे रहे हैं।

राजपक्षे की गलत नीतियों और चीन के एक्जिम और विकास बैंक से उच्च ब्याज ऋण पर लिए गए ऋण ने न सिर्फ श्रीलंका को आर्थिक रूप से बल्कि राजनीतिक रूप से भी कमजोर है। क्योंकि स्थानीय राजनेता काफी हद तक बदनाम हैं। इसके चलते वहां पर कट्टरपंथी-वामपंथी देश घुसपैठ कर रहे हैं।

ऐसे में श्रीलंका को पुनर्जीवित करने के लिए, लेनदारों को पेरिस क्लब के साथ एक बड़ा ऋण लेना होगा। ऐसे में वैश्विक दक्षिण को भी वैश्विक उत्तर के समान कटौती करनी चाहिए, भले ही धन का असमान वितरण है। हालांकि इसी कोलंबो को अभी भी एक साथ काम करना है और चीन के साथ एक बातचीत और ऋण सुलह शुरू करनी है। उसे मार्च 2023 में आईएमएफ कार्यकारी बोर्ड की बैठक से पहले अगले तीन महीने तक बनाए रखने के लिए ब्रिज फंडिंग की आवश्यकता होगी। ऐसे में जाहिर है कि अगर चीजें आगे बढ़ेंगी तो श्रीलंका और आर्थिक और राजानीतिक दोनों रूप में फायदा होगा।

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