श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे के पास है लग्जरी कारों का काफिला, प्रदर्शनकारियों ने दिखाया वीडियो
श्रीलंका में पिछले कई महीनों से भारी आर्थिक संकट फैला हुआ है और देश का विदेशी मुद्रा भंडार खाली हो चुका है और श्रीलंका के पास ना पेट्रोल है और ना ही डीजल।
कोलंबो, जुलाई 09: श्रीलंका दिवालिया हो चुका है और देश के पास पेट्रोल, डीजल समेत रसोई गैस खत्म हो चुके हैं। स्थिति ये है, कि श्रीलंका में पेट्रोल पंपों के बाहर पेट्रोल लेने के लिए एक-एक हफ्ते से लोगों की लाइनें लगी रहती हैं। वहीं, आज प्रदर्शनकारियों ने जब राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे के आवास को घेरा, तो राष्ट्रपति डर के मारे फरार हो गये। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के आवास का एक वीडियो जारी किया है, जिसमें राष्ट्रपति के पास लग्जरी कारों का काफिला देखा जा रहा है।

फरार हुए राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे
श्रीलंका में पिछले कई महीनों से भारी आर्थिक संकट फैला हुआ है और देश का विदेशी मुद्रा भंडार खाली हो चुका है और श्रीलंका के पास ना पेट्रोल है और ना ही डीजल। माना जाता है कि, राजपक्षे सरकार की खराब आर्थिक नीतियों की वजह से देश में ये आर्थिक संकट आया है और पिछले हफ्ते श्रीलंकन प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघ ने देश की संसद में ऐलान किया था, कि अब श्रीलंका दिवालिया हो चुका है। श्रीलंका में पिछले कई महीनों से प्रदर्शन किए जा रहे हैं और राजधानी कोलंबो में एक चौराहे पर मार्च महीने से लोग श्रीलंका की राजपक्षे सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, स्थिति उस वक्त बिगड़ी, जब हजारों लोगों की भीड़ पर श्रीलंका की पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागने शुरू कर दिए। जिससे भड़के लोगों ने राष्ट्रपति आवास की तरफ कूच करना शुरू कर दिया। इससे पहले राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे के बड़े भाई महिंदा राजपक्षे, जो दो महीने पहले तक प्रधानमंत्री थे, वो भी लोगों के डर से फरार हो चुके हैं और श्रीलंका नौसेना के कैंप में रह रहे हैं।
लग्जरी कारों का है काफिला
प्रदर्शनकारियों ने श्रीलंका के राष्ट्रपति के आवास से एक वीडियो जारी किया है, जिसमें दर्जनों लग्जरी कारों के काफिले को देखा जा सकता है। राष्ट्रपति के कारों के काफिले में बीएमडब्ल्यू और मर्सडीज जैसी कारें हैं, जिनकी कीमत लाखों में होती है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि, ये भ्रष्टाचार के प्रत्यक्ष सबूत हैं, कि किस तरह से राजपक्षे परिवार ने देश को लूटा है और अपना खजाना भरा है।

राजपक्षे परिवार की वजह से दुर्दशा
करीब 2 करोड़ 20 लाख की आबादी वाले देश श्रीलंका में पिछले एक दशक में सबसे खराब आर्थिक उथल-पुथल का सामना कर रहा है। दुर्भाग्यपूर्ण उर्वरक प्रतिबंध की वजह से देश में चावल और चाय जैसी फसलों की भारी किल्लत हो गई, तो विदेशी मुद्रा संकट से निपटने में सरकार की विफलता ने देश को आर्थिक कंगाली में झोंक दिया। अब स्थिति काफी बिगड़ चुकी है और खुद श्रीलंका अब दिवालिया हो चुका है। श्रीलंका में मानवीय आपातकाल है और राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे की सरकार इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है। श्रीलंका की राजनीतिक शिखर पर एक ही परिवार के सात सदस्य बैठे हुए थे। यानि, श्रीलंका की सरकार में आज से तीन महीने पहले तक राजपक्षे परिवार के सात सदस्य शामिल थे। श्रीलंका की सत्ता पर काबिज इन निरंकुश शासकों ने भ्रष्टाचार की सारी हदें पार करते ना सिर्फ देश को चीन की आर्थिक गुलामी में धकेल दिया, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से तबाह कर दिया।
Recommended Video

देश पर था राजपक्षे परिवार का 'कब्जा'
श्रीलंका में परिवारवाद की वास्तविक स्थिति क्या थी, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं, कि, राजपक्षे परिवार के आधा दर्जन से ज्यादा सदस्य श्रीलंका की केन्द्रीय सरकार में शामिल थे। श्रीलंका के राष्ट्रपति हैं गोटबया राजपक्षे, जो 72 साल के हैं। उनके बड़े भाई हैं महिंदा राजपक्षे, श्रीलंका के प्रधानमंत्री थे और उनकी उम्र 75 साल है। महिंदा राजपक्षे के पास श्रीलंका का शहरी विकास मंत्रालय भी है। महिंदा राजपक्षे, इससे पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति भी रह चुके हैं। वहीं, राजपक्षे परिवार के सबसे बड़े भाई, चमल राजपक्षे श्रीलंका के गृहमंत्री थे, तो एक भाई बासिल राजपक्षे श्रीलंका के वित्तमंत्री थे।

राजपक्षे परिवार का 'वटवृक्ष'
इनके अलावा महिंदा राजपक्षे के बेटे नमल राजपक्षे श्रीलंका के खेल मंत्री थे, तो टेक्नोलॉजी मंत्रालय भी नमल राजपक्षे के पास ही था। वहीं, चमल राजपक्षे के बेटे शाशेंन्द्र राजपक्षे श्रीलंका के कृषि मंत्री थे। यानि, श्रीलंका में करीब 70 प्रतिशत प्रमुख मंत्रालय राजपक्षे परिवार के पास था। पिछले दो दशकों से राजपक्षे परिवार श्रीलंका की राजनीति में शीर्ष पर रही और श्रीलंका की तकदीर का हर फैसला कर रहा है। राजपक्षे परिवार को राजनीति के शीर्ष पर लाने का काम महिंदा राजपक्षे को जाता है, जब उन्होंने साल 2009 में एलटीटीआई का खात्मा कर श्रीलंका को गृहयुद्ध से मुक्ति दिलवाई थी। हालांकि, इस दौरान महिंदा राजपक्षे पर मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप लगे। लेकिन, अब राजपक्षे परिवार को जनता ने जमीन पर ला दिया है, लेकिन राजपक्षे परिवार उससे पहले ही श्रीलंका की जनता को समुद्र में डूबोने का इंतजाम कर चुकी थी।
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