श्रीलंका संकट: कर्फ्यू, प्रदर्शन, सोशल मीडिया ब्लैकआउट, 10 प्वाइंट में जानिए कैसे जल रही है 'सोने की लंका' ?
कोलंबो, 3 अप्रैल: सोने की लंका एकबार फिर जल रही है। इसबार आर्थिक तंगी ने भारत के इस पड़ोसी मुल्क को तबाही की कगार पर ला दिया है। देशव्यापी बड़े विरोध-प्रदर्शनों के आह्वान के बीच सरकार ने वहां 36 घंटे के लिए कर्फ्यू लगा दिया है और सोशल मीडिया को बंद कर दिया है। स्थानीय समय के मुताबिक यह कर्फ्यू अभी सोमवार सुबह 6 बजे तक जारी रहेगी। दरअसल, यह देश अप्रत्याशित आर्थिक संकट झेल रहा है, लोगों के पास खाने-पीने की चीजें नहीं बची हैं। कीमतें इतनी ज्यादा बढ़ गई हैं कि लोगों ने शरणार्थी बनकर भारत की ओर कूच करना शुरू कर दिया है। श्रीलंकाई सरकार के हाथ से स्थिति निकलती जा रही है। देश बहुत बड़े संकट से गुजर रहा है।

कैसे जल रही है 'सोने की लंका' ?
श्रीलंका में आपातकाल की घोषणा हो चुकी है, राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के आवास के बाहर हिंसक प्रदर्शनों के बाद सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है। लोगों की नाराजगी इस बाद को लेकर है कि उन्हें लगता है कि राजपक्षे सरकार आर्थिक संकट को संभाल नहीं पाई है, जिसकी वजह से जरूरी चीजों की किल्लत हुई है और 13-13 घंटों तक बिजली की कटौती करनी पड़ रही है। ऐसे में 10 प्वाइंट में समझिए कि वहां क्या चल रहा है-
1- राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने शनिवार को आदेश जारी कर कहा है कि 36 घंटे के कर्फ्यू के दौरान कोई भी बिना इजाजत सार्वजनिक स्थानों पर नहीं जाएगा। उन्होंने कहा है कि 'मैं समझता हूं कि सार्वजनिक व्यवस्था कायम रखने के लिए यह आवश्यक है।'
2- श्रीलंकाई रक्षा मंत्रालय के कहने पर सोशल नेटवर्किंग साइट्स का ऐक्सेस रोक दिया गया है। इसके चलते श्रीलंकाई नागरिक शनिवार से ही व्हाट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।
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सरकार विरोधी प्रदर्शनों को रोकने के लिए ऐक्शन
3- सरकार के इन कदमों को नागरिकों में उसके खिलाफ आर्थिक संकट से निपटने में नाकाम रहने को लेकर उबल रहे गुस्से को शांत करने का हथकंडा माना जा रहा है। सोशल मीडिया के जरिए रविवार को खाद्य, ऊर्जा, दवा और बिजली कटौती के विरोध में बड़े प्रदर्शनों का आह्वान किया जा रहा था, जिसे सरकार ने फिलहाल अपने ऐक्शन से रोकने की कोशिश की है।
4- श्रीलंकाई रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया के इन अनुमानों को खारिज कर दिया है कि कानून और व्यवस्था की बहाली के लिए भारतीय सेना श्रीलंका पहुंच चुकी है। रक्षा मंत्रालय के सचिव कमाल गुनरत्ने ने कहा है कि स्थानीय सेना इन हालातों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधी आपात स्थिति से निपटने में सक्षम है और इस तरह की किसी बाहरी मदद की आवश्यकता नहीं है। भारतीय उच्चायोग ने भी बयान जारी करके इस तरह के अनुमानों का पूरी तरह से खंडन किया है।

भारत से श्रलंका को लगातार पहुंच रही है मानवीय सहायता
5- श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति एम श्रीसेना की फ्रीडम पार्टी ने राष्ट्रपति राजपक्षे से आर्थिक संकट का सामना करने के लिए सर्वदलीय सरकार के गठन का आह्वान किया है और यह भी कहा है कि अगर इसके अनुरोध को नहीं माना गया तो वह सत्ताधारी गठबंधन से बाहर निकल जाएगी। 14 सांसदों के साथ फ्रीडम पार्टी सत्ताधारी गठबंधन की सबसे बड़ी सहयोगी है और अगर यह सरकार से निकल जाती है तो सरकारी व्यवस्था और भी चरमरा जाएगी।
6- बिजली कटौती से पड़ोसी मुल्क को उबारने के लिए शनिवार को भारत से 40,000 मीट्रिक टन डीजल की खेप पहुंचाई गई है। भारत ने पहले ही कहा है कि श्रीलंका को आर्थिक संकट से उबरने के लिए 1 बिलियन डॉलर की सहायता देगा। यह फरवरी में दिए गए 500 बिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता के अलावे है।

राजपक्षे सरकार के खिलाफ जनता में बढ़ रही है नाराजगी
7- इससे पहले शुक्रवार को श्रीलंकाई सरकार ने 1 अप्रैल से पब्लिक इमरजेंसी लगाए जाने से घोषणा की थी। राष्ट्रपति राजपक्षे ने कहा था कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और आवश्यक सेवाओं को कायम रखने के लिए आपातकाल जरूरी है। हालांकि, वकीलों ने इस फैसले का यह कहकर विरोध किया कि इसके चलते गैरकानूनी तरीके से जुटने के नाम पर पुलिस को किसी को भी गिरफ्तार करने का अधिकार मिल जाएगा।
8- राष्ट्रपति ने कोलंबो में अपने घर के बाहर हुए हिंसक प्रदर्शनों के कुछ समय बाद ही अपने हाथ में आपातकालीन अधिकार ले लिए थे। हिंसक प्रदर्शनों के दौरान कई वाहन जला दिए गए, लोहे के बैरिकेट गिरा दिए गए, हिंसा को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और पानी की बौथारें फेंकी, जिसमें कई लोग जख्मी भी हो गए। इस घटना के बाद कई लोगों को गिरफ्तार किया गया और राजधानी के ज्यादातर इलाकों में कुछ समय के लिए कर्फ्यू लगा दी गई।

विदेशी मुद्रा की किल्लत की वजह से शुरू हुआ संकट
9-दरअसल, श्रीलंका में विदेशी मुद्रा के संकट की वजह से आवश्यक चीजों की किल्लत हो गई है। तेल, गैस, खाने-पीने की चीजें दवाओं की सप्लाई कम होने से लोगों की लाइनें लग रही हैं। घंटों-घंटों तक बिजली कट रही है। हफ्तों से लोग परेशान हैं।
10- राष्ट्रपति राजपक्षे की दलील है कि विदेशी मुद्रा की कमी के लिए वह जिम्मेदार नहीं हैं। आर्थिक स्थिति बिगड़ने के पीछे मुख्य रूप से महामारी है, जिसकी वजह से टूरिज्म से आना वाला राजस्व खत्म हो गया और बाकी आमदनी भी ठप होती चली गई।












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