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श्रीलंका धमाके: क्यों नाराज़ हैं शव लेकर लौटे भारतीय

By इमरान क़ुरैशी
श्रीलंका धमाके
Getty Images
श्रीलंका धमाके

श्रीलंका में ईस्टर रविवार को हुए बम धमाकों में जान गंवाने वालों की संख्या 359 हो गई है. इन धमाकों में 500 से ज़्यादा लोग घायल हैं.

श्रीलंका ने 'सुरक्षा में भारी चूक' को स्वीकार किया है. राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरीसेना ने रक्षा सचिव और पुलिस प्रमुख को पद से हटा दिया है.

इसी बीच हमलों के मुख्य साज़िशकर्ता माने जा रहे ज़हरान हाशिम की बहन हाशिम मदानिया ने बीबीसी से बातचीत में अपने भाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

मदानिया ने कहा, "मुझे उसके इस कृत्य के बारे में सिर्फ़ मीडिया के ज़रिए ही पता चला है. मुझे कभी एक पल के लिए भी नहीं लगा कि वो ऐसा कुछ करेगा. उसने जो किया है मैं उसकी कड़ी निंदा करती हूं. भले ही वो मेरा भाई ही क्यों न हो, मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकती. मुझे अब उसकी कोई चिंता नहीं है."

इधर, हमलों में मारे गए भारतीयों के परिवारों में भारी ग़ुस्सा और नाराज़गी है.

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श्रीलंका हमले में मारे गए भारतीय
Imran Qureshi
श्रीलंका हमले में मारे गए भारतीय

ग़ुस्साए भारतीयों के सवाल

हमलों में मारे गए भारतीयों के शव भारत पहुंचने लगे हैं. बेंगलुरु के जिन लोगों की मौत इन धमाकों में हुई उनके परिवार और रिश्तेदार सदमे में हैं. लेकिन जो रिश्तेदार शव लेकर आए हैं वे सुरक्षा हालात को लेकर ग़ुस्से से भरे हुए हैं.

अपने रिश्तेदार का शव लेकर बेंगलुरु पहुंचे अभिलाष लक्ष्मीनारायण ने बीबीसी से कहा, "श्रीलंका को सुरक्षा में हुई चूक की ज़िम्मेदारी लेनी ही होगी. वो सात सितारा होटल था लेकिन वहां मेटल डिटेक्टर तक नहीं लगे थे."

अभिलाष के पिता केएम लक्ष्मीनारायण नीलमांगला पूर्व तालुका पंचायत अध्यक्ष थे और जनता दल सेक्युलर से जुड़े थे. 18 अप्रैल को हुए लोकसभा चुनाव के बाद वो पार्टी के सात और सदस्यों के साथ छुट्टियां मनाने कोलंबो गए थे.

लक्ष्मीनारायण और मारे गए अन्य कार्यकर्ताओं के शव कांच से ढंके बक्सों में एक कॉलेज के मैदान में अंतिम दर्शन के लिए रखे गए थे.

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एचडी देवेगौड़ा
Imran Qureshi/BBC
एचडी देवेगौड़ा

'कहीं पुलिस नहीं दिखाई दी'

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी ने भी शोकाकुल परिवार के साथ बैठकर मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी.

श्रीलंका में हुए हमलों में मारे गए कुल 11 भारतीयों में से आठ जनता दल सेक्युलर के सदस्य थे. उन्हें श्रद्धांजलि देने कांग्रेस के नेता वीरप्पा मोइली भी पहुंचे थे.

पेशे से दंत चिकित्कसक डॉ. एस मंजुनाथ कहते हैं, "मेरी मां को गहरा सदमा पहुंचा है. वो बोल भी नहीं पा रही हैं. मेरे पिता ने अपने जीवन में बहुत मेहनत की थी. ये उनके आराम करने के दिन थे. मैंने व्यापार की ज़िम्मेदारी संभालनी शुरू कर दी थी."

अपने रिश्तेदार एसआर नागराज रेड्डी को खोजने और घायल पुरुषोत्तम रेड्डी की मदद करने कोलंबो गए भारतीय जनता पार्टी के विधायक एसआर विश्वनाथ भी श्रीलंका के सुरक्षा हालात को लेकर गुस्से में हैं.

विश्वनाथ कहते हैं, "इतना बड़ा हमला हो गया और अब भी बम बरामद हो रहे हैं. इसके बावजूद आपको एयरपोर्ट पर बस कुछ सैनिक दिखाई देते हैं. रविवार रात जब हम हमलों के बाद कोलंबो पहुंचे तो हमें चौराहों पर कहीं पुलिस दिखाई नहीं दी."

उन्होंने कहा, "जब हम होटल गए तो किंग्सबरी होटल में मेटल डिटेक्टर तो था लेकिन सुरक्षा जांच करने के लिए कोई मौजूद नहीं था. कम से कम दुनिया के इस इलाक़े में ये अहम पर्यटन केंद्र है. यहां तो सुरक्षा कड़ी होनी ही चाहिए थी."

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IMRAN QURESHI/BBC

'अस्पतालों में सड़ रहे हैं शव'

नागराज रेड्डी और पुरुषोत्तम रेड्डी किंग्सबरी होटल के कैफ़े में नाश्ता करने गए थे जब धमाका हो गया. उनके दो दोस्त, जो नाश्ता करने साथ नहीं आए थे वो भाग्यशाली रहे और बच गए.

पुरुषोत्तम रेड्डी को एयर एंबुलेंस से बेंगलुरु लाया गया और एक अस्पताल में भर्ती कराया गया.

वहीं अपने बहनोई का शव लेकर श्रीलंका से लौटे एस शिवकुमार की शिकायत अलग है. वो कहते हैं, "अस्पतालों में शव सड़ रहे थे क्योंकि वहां सभी शव रखने के लिए पर्याप्त फ्रीज़र नहीं थे. हमें शव पूरी तरह ढंकने पड़े क्योंकि उनकी हालत बहुत ख़राब थी."

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श्रीलंका धमाके
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अमीर और पढ़े-लिखे थे हमलावर

नौ हमलावरों में से आठ की पहचान श्रीलंका के नागरिकों के तौर पर हुई है. इनमें से दो राजधानी कोलंबो के पॉश इलाक़े में रहने वाले दो रईस कारोबारी भाई थे. ये भी पता चला है कि हमलावरों में से एक ने श्रीलंका लौटने से पहले ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई की थी.

ब्रिटेन के आतंकवाद रोधक सुरक्षा कार्यालय के पूर्व प्रमुख क्रिस फ़िलिप्स कहते हैं कि ये उनके लिए कोई हैरानी की बात नहीं है.

ऐसा लगता है कि ये आतंकवादी काफ़ी अमीर थे, और ज़ाहिर तौर पर इतने अमीर तो थे ही कि दुनिया की यात्रा कर सकें.

उन्होंने कहा, "इसलिए हमें हैरत नहीं होनी चाहिए कि वो यूरोप या ब्रिटेन आए, ये हैरत की बात होगी कि हमारी ब्रितानी सुरक्षा एजेंसियों के पास पहले से उसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि अब हमारा उस पर कोई प्रभाव होगा क्योंकि वो श्रीलंका लौटकर आतंकवादी बन गया. इन सब बातों की जांच होगी."

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डर और तनाव का माहौल बरक़रार

श्रीलंका की सरकार ने स्थानीय जिहादी संगठन को इन हमलों का ज़िम्मेदार माना है. अब तक 60 से अधिक लोग हिरासत में भी लिए जा चुके हैं. देश में आपातकाल लागू है.

इस्लामिक स्टेट ने भी हमलों की ज़िम्मेदारी ली है और उसके दावों की जांच की जा रही है. इसी बीच डर ये भी है कि कहीं और हमलावर हमला करने की फ़िराक में न हों.

श्रीलंका अभी इन हमलों से उबर नहीं पाया है. डर और तनाव का माहौल बरकरार है.

(बेंगलुरु से इमरान क़ुरैशी के इनपुट्स के साथ)

BBC Hindi
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English summary
Sri Lanka blast Why are Indians angry after returning home with dead bodies

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