Spain: रेप के खिलाफ बने कानून का फायदा उठा कर बच गए सैकड़ों बलात्कारी, देश में मचा हंगामा, PM ने मांगी माफी
स्पेनिश सरकार द्वारा प्रस्तावित यह कानून, जिसे ‘ओनली यस इन यस’के रूप में जाना जाता है, यौन शोषण और यौन हमले से जुड़े अपराधों को उसी प्रकार के अपराध में मिला देता है, जिसे बलात्कार माना जाता है।

स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने ऐतिहासिक 'कंप्रीहेंसिव गारंटी ऑफ सेक्सुअल फ्रीडम लॉ' में खामियों के लिए पीड़ितों से माफी मांगी है। इस कानून का उद्देश्य यौन अपराधियों के लिए सख्त सजा का प्रावधान करना था लेकिन इसके लूपहोल्स का फायदा उठाकर कई बलात्कारी आजाद हो गए हैं।
स्पेन में बीते साल 'ओनली यस इन यस' कानून लाया गया था। यह कानून अक्टूबर में लागू हुआ था। इस कानून में एक खामी की वजह से 978 से अधिक यौन उत्पीड़न अपराधियों को उनकी सजा कम करने या समय से पहले समाप्त करने की अनुमति दे दी गई है।
देश की न्यायपालिका की सामान्य परिषद ने 14 अप्रैल को इसका खुलासा करते हुए कहा कि अक्टूबर 2022 में इस कानून के पारित होने के बाद से 31 मार्च तक कुल 978 कैदियों की सजा कम हुई है जिसमें से 104 तो रिहा भी हो चुके हैं। कानून में इस गंभीर खामी को लेकर स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने माफी मांगी है।
उन्होंने कहा "कुछ अपराधी जिन्हें रिहा किया गया है उनके खिलाफ अपील की जा सकती है। लेकिन अगर हमें पीड़ितों से माफी मांगनी है, तो मैं पीड़ितों से माफी मांगता हूं।" पीएम ने कहा कि जल्दी ही इसे दूर करने के लिए समाधान पेश किया जाएगा।
अक्टूबर में लाए गए इस कानून का संबंध स्पेन के एक चर्चित कथित गैंगरेप से जुड़ा हुआ है। ला मनाडा नाम से चर्चित इस मामले में 2016 में पांच लोगों ने एक 18 साल की लड़की का गैंगरेप किया था। ला मनाडा इन लोगों के एक व्हाट्सएप ग्रुप का नाम था।
ला मनाडा ग्रुप में शामिल पांच पुरुषों ने साल 2016 के पैम्पोलिना में बुल-रनिंग फेस्टिवल के दौरान एक लड़की का गैंगरेप किया था। इन लोगों को बलात्कार का दोषी तो पाया गया लेकिन उन्हें यौन हिंसा और क्रूरता का दोषी नहीं पाया गया। ऐसे में उन्हें कम सजा मिली।
अंतिम फैसला आने तक इन दोषियों को जमानत पर रिहा कर दिया गया। अदालत के इस फैसले की पूरे देश में आलोचना हुई और लोग सड़कों पर उतर आए। इसके बाद 2019 में एक अपील का नेतृत्व किया गया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने पांचों को बलात्कार का दोषी माना और उन्हें 15 सालों की लंबी सजा सुनाई।
पूरे देश में इस मामले को लेकर हुई आलोचना के बाद देश में बलात्कार को लेकर एक सख्त कानून बनाने पर काम शुरू हुआ। नए कानून को कंप्रीहेंसिव गारंटी ऑफ सेक्सुअल फ्रीडम लॉ नाम दिया गया। इसे आमतौर पर 'हां का मतलब ही हां' कहा जाने लगा।
इसमें सेक्स से पहले हर बार मंजूरी लेनी का जिक्र था। नए कानून के मुताबिक बिना किसी मंजूरी के सेक्स को यौन हमला माना जाएगा। इसके तहत एक से चार साल तक की सजा होगी। रिपोर्ट के मुताबिक इन नियमों से जुड़े लूपहोल्स का फायदा उठाकर वकील अपने मुवक्किलों को रिहा करने में सफल हो जा रहे हैं।












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