ब्रिटेन, स्कॉटलैंड, आयरलैंड...गोरों की धरती पर भारत-पाकिस्तानियों की हुकूमत, जानें वक्त ने कैसे बदला करवट?

1947 से पहले तक पाकिस्तान भी भारत का ही हिस्सा था और अब स्कॉटलैंड की आहाजी के लिए हमजा यूसुफ भारतीय मूल के यूके के पीएम ऋषि सुनक से जंग लड़ेंगे। ये काफी दिलचस्प कहानी बन रही है।

Humza Yousaf Scotland

Humza Yousaf Scotland: जब हमजा यूसुफ ने साल 2016 में स्कॉटिश संसद में निष्ठा की शपथ ली थी, तो उन्होंने सोने की कढ़ाई वाली शेरवानी, जो एक पारंपरिक दक्षिण एशियाई परिधान है, उसके साथ एक लहंगा पहना हुआ था। और उन्होंने ऊर्दू में शपथ लेते हुए कहा था, कि "मैं, हमजा यूसुफ, ईमानदारी और सच्चे दिल से कसम खाता हूँ, कि मैं हमेशा वफादार रहूंगा और महामहिम महारानी एलिजाबेथ के प्रति सच्ची निष्ठा रखूंगा, इसलिए अल्लाह मेरी मदद करें।" जब ऋषि सुनक पहली बार ब्रिटेन के सांसद बने थे, तो उन्होंने गीता पर हाथ रखकर अपनी निष्ठा की शपथ ली थी और इसके साथ ही, इतिहास ने करवट बदल ली है। जिस भारत पर अंग्रेजों ने कभी राज किया था, अब उन अंग्रेजों की धरती पर भारत और पाकिस्तानी मूल के नेताओं का राज हो गया है।

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हमजा यूसुफ बने स्कॉटलैंड के प्रधानमंत्री

सोमवार को स्कॉटिश नेशनल पार्टी (एसएनपी) के नेता के रूप में चुने जाने के बाद हमजा यूसुफ ने स्कॉटिश सरकार के पहले गैर-श्वेत प्रमुख बनकर इतिहास रच दिया है। ब्रिटेन में जन्मे युसुफ, जिनका मूल पाकिस्तान से है, उनकी जीत सिर्फ इस बात का उदाहरण है, कि दक्षिण एशियाई मूल के लोग ब्रिटिश, स्कॉटिश और आयरिश संसदों में नेतृत्व की भूमिका कैसे निभाने लगे हैं और इन देशों का संसद कैसे बदल रहा है। 37 साल के हमजा यूसुफ, ब्रिटिश प्रधान मंत्री ऋषि सनक, जो एक हिंदू हैं और जिन्होंने पिछले अक्टूबर में यूके के प्रधानमंत्री की भूमिका हासिल की थी, उनके बाद दूसरे ऐसे नेता हैं, जो अंग्रेजों की धरती पर शीर्ष नेतृत्व पर पहुंचे हैं। ऋषि सुनक के भारतीय माता-पिता 1960 के दशक में पूर्वी अफ्रीका से यूके आए थे। वहीं, एक और ब्रिटिश देश, आयरलैंड रिपब्लिक के प्रधानमंत्री लियो वराडकर हैं, जिनके पिता भारत में जन्मे डॉक्टर हैं और जिनका परिवार, अभी भी महाराष्ट्र में रहता है। भारत और पाकिस्तान, जो 1947 से पहले तक एक थे, उन्हें कभी ब्रिटिश साम्राज्य का गहना माना जाता, जो दुनिया भर में इतनी दूर तक फैला हुआ था, कि अक्सर कहा जाता था, कि ब्रिटिश साम्राज्य का सूरज कभी नहीं डूबेगा। लेकिन ब्रिटिश राज की समाप्ति के 75 साल बाद, कई टिप्पणीकारों ने टिप्पणी की है, कि कैसे इतिहास ने अपना चक्र पूरा कर लिया है।

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इतिहास फिर से पलट रहा पन्ने

थिंक टैंक ब्रिटिश फ्यूचर के डायरेक्टर सुंदर कटवाला ने ट्विटर पर एक पोस्ट में यूसुफ को "इतिहास निर्माता" कहा है। उन्होंने लिखा है, कि "एम्पायर स्ट्राइक्स बैक।" सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्कॉटलैंड में मानवाधिकार वकील जेलिना बेरलो-रहमान ने चुटकी ली है, कि "ब्रिटिश राजनीति के लिए ये एक ऐतिहासिक क्षण है।" यूसुफ हमजा के पिता का जन्म पाकिस्तानी शहर मियां चन्नू में हुआ था, जो देश के विशाल पंजाब प्रांत में है, जो भारत की सीमा से लगता है। उनकी मां का जन्म केन्या के नैरोबी में हुआ था, वह भी पंजाबी मूल की हैं और दोनों 1960 के दशक में दोनों स्कॉटलैंड चले गए थे। स्कॉटलैंड के होलीरोड अखबार के साथ 2018 के एक साक्षात्कार में, यूसुफ ने विस्तार से बताया था, कि कैसे उनकी मां के परिवार को पूर्वी अफ्रीकी शहर में नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा और उनकी नौकरी छीन ली गई थी। उन्होंने कहा था, कि कठिनाई तब चरम पर पहुंच गई, जब उनकी दादी पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया। 1985 में ग्लासगो में जन्मे, यूसुफ अपने प्राथमिक विद्यालय के दो जातीय अल्पसंख्यक विद्यार्थियों में से एक थे।

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यूसुफ हमजा का राजनीतिक कैरियर

यूसुफ हमजा, स्कॉटलैंड की स्कॉटिश नेशनल पार्टी (एसएनपी) में शामिल हो गए और उस वक्त वो ग्लासगो विश्वविद्यालय के छात्र थे और फिर वो धीरे धीरे पार्टी के अंदर आगे बढ़ने लगे। साल 2011 में वो पहली बार संसद के सदस्य बने और उसी साल वो स्कॉटिश सरकार में सेवा करने वाले पहले मुस्लिम और गैर-श्वेत कैबिनेट मंत्री भी बने। उन्होंने अक्सर कहा है, कि उनकी अपनी पृष्ठभूमि स्कॉटलैंड के सामाजिक रूप से उदार और जातीय रूप से विविध परिदृश्य का एक उदाहरण है, यहां तक कि खुद को "भांगड़ा और बैगपाइप" विरासत से आने के रूप में संदर्भित करते हैं। भांगड़ा पंजाब का पारंपरिक लोक संगीत है, जबकि बैगपाइप स्कॉटलैंड का सर्वोत्कृष्ट वाद्य यंत्र है। लेकिन, अब सवाल ये हैं, कि क्या यूसुफ हमजा, स्कॉटलैंड को ब्रिटेन से आजादी दिला पाएंगे? हालांकि, उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान आजादी की रट लगा रखी थी। उन्होंने कहा था, कि "हम वह पीढ़ी बनेंगे, जो स्कॉटलैंड को आजादी दिलवाएंगे।" उन्होंने कहा, कि "हमारे अंदर जहां भी दरारे हैं, उन्हें जल्द भरने की जरूरत है, क्योंकि हमें अब काफी काम करने हैं।"

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दक्षिण एशियाई नेताओं को मिलती कामयाबी

यूसुफ की जीत की खबर पाकिस्तान में सुर्खियां बटोर रही हैं और सोशल मीडिया पर वही छाए हैं। यूसुफ उस वक्त प्रधानमंत्री बने हैं, जब करीब 25 करोड़ की आबादी वाले देश पाकिस्तान में रमजान मनाया जा रहा है, जो इस्लाम का सबसे पवित्र मबीना माना जाता है। पाकिस्तान के लोग यूसुफ की जीत को विदेशी पाकिस्तानियों की जीत बता रहे हैं और पाकिस्तान के लिए इसे एक उपलब्धि बता रहे हैं। खासकर यूसुफ का ऊर्दू में शपथ लेना, पाकिस्तानियों के लिए इमोशन का मामला बन चुका है। ठीक इसी तरह की जीत ऋषि सुनक को भी मिली थी, जो भारतीय मूल के पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री बने थे और इतिहास रच दिया था। उस वक्त भारत में भी सोशल मीडिया पर ऋषि सुनक ही छाए थे। भारत में ऋषि सुनक को अपना बनाने की होड़ देखी गई, तो पाकिस्तानी मीडिया में भी ऋषि सुनक को पाकिस्तानी बताने की जल्दबाजी देखी गई। हालांकि, ये कई सौ सालों तक गुलामी में रहने के बाद आजादी और फिर गुलाम बनाने वालों के देश में सर्वोच्च पद पर पहुंचने की खुशी को भी दर्शाता है।

यूके की आबादी में दक्षिण एशिया

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, यूनाइटेड किंगडम की आबादी का 10% दक्षिण एशियाई मूल के हैं। स्कॉटलैंड के मुख्य विपक्ष के नेता अनस सरवर भी पाकिस्तानी अप्रवासियों की संतान हैं। ब्रिटेन की गृह सचिव सुएला ब्रेवरमैन भी भारतीय मूल की हैं, जबकि लंदन के मेयर सादिक खान का जन्म एक कामकाजी वर्ग के पाकिस्तानी आप्रवासी परिवार में हुआ था। हालांकि, ब्रिटेन में अल्पसंख्यकों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी नस्लवाद की हार में काफी दूरी बची है। युसुफ की जीत का सोशल मीडिया पर धुर ब्रिटिश दक्षिणपंथी सदस्यों ने नस्लवादी टिप्पणियों के साथ स्वागत किया। वहीं, कई लोगों ने कहा है, कि ऋषि सुनक और हमजा यूसुफ, दोनों को उनकी पार्टियों द्वारा चुना गया है और अभी तक उन्होंने अपने नेतृत्व में आम चुनाव नहीं जीता है, लिहाजा अभी कर उनकी जीत की कहानी की बिगुल नहीं फूंकनी चाहिए। भारत और पाकिस्तान को 1947 में खूनी विभाजन के बाद आजादी मिली थी और अब यूके के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भारतीय मूल के हैं, तो स्कॉटलैंड के प्रधानमंत्री हमजा यूसुफ पाकिस्तान मूल के हैं, लेकिन क्या अब वो स्कॉटलैंड की आजादी के लिए ऋषि सुनक से दो-दो हाथ करेंगे, ये देखने वाली बात होगी।

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