पृथ्वी से टकराएगा सूर्य से उठा सौर तूफान! प्रवासी पक्षियों, सैटेलाइट को ज्यादा खतरा
सूर्य लगातार उग्र हो रहा है। सात मई को फिर वहां पर सौर विस्फोट की स्थिति पैदा हुई है, जिसके चलते कोरोनल मास इजेक्शन के पृथ्वी की ओर बढ़ने की आशंका है। इससे प्रवासी पक्षियों को नुकसान हो सकता है।

सूर्य पर बवंडर उठने की वजह से एक कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) सौर मंडल के आंतरिक ग्रहों की ओर कई लाख किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। इससे पृथ्वी के प्रभावित होने की भी आशंका पैदा हुई है। इसके चलते सूर्य से जो प्लाज्मा कण निकल रहा है, उसकी वजह से पृथ्वी के वायुमंडल में भू-चुंबकीय तूफान के टकराने का खतरा है, जिससे रेडियो वेव पर असर पड़ सकता है।
7 मई को पैदा हुआ कोरोनल मास इजेक्शन
सूर्य पर यह कोरोनल मास इजेक्शन उसके रिवर्स-पोलरिटी सनस्पॉट AR3296 से 7 मई को पैदा हुआ था। कोरोनल मास इजेक्शन एक तरह से सूर्य के प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र का भयानक विस्फोट है, जो उसके कोरोना (प्रभामंडल) से निकलता है।
कोरोनल मास इजेक्शन होने पर क्या होता है?
कोरोना सूर्य के वायुमंडल का सबसे बाहरी परत है और यह अत्यधिक गर्म प्लाज्मा से बना होता है, जो लगातार गतिशील रहता है। जब एक कोरोनल मास इजेक्शन की स्थिति पैदा होती है, तो इसकी वजह से अरबों टन आवेशित कण अविश्वसनीय और अकल्पनीय रफ्तार से अंतरिक्ष में निकल जाते हैं।
जी1 क्लास के भू-चुंबकीय तूफान के टकराने का खतरा
प्लाज्मा के ये कण 30 लाख किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से भी बढ़ सकते हैं। जाहिर है कि अगर इसने पृथ्वी की ओर अपना रुख किया तो हमारे वायुमंडल को भी प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिकी स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर ने भविष्यवाणी की है कि 7 मई वाले सीएमई की वजह से जी1 क्लास का भू-चुंबकीय तूफान पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकरा सकता है।
भू-चुंबकीय तूफान कैसे पैदा होता है?
इस प्राकृतिक घटना की वजह से कुछ पावर ग्रिड में उतार-चढ़ाव की समस्या भी पैदा हो सकती है और सैटेलाइट के संचालन पर भी कुछ हद तक असर पड़ सकता है। भू-चुंबकीय तूफान कोरोनल मास इजेक्शन के चुंबकीय क्षेत्र और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में भिड़ंत की वजह से पैदा होता है।
पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराने का प्रभाव?
जब दोनों चुंबकीय क्षेत्र आपस में टकराते हैं तो इसकी वजह से पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में तेजी से उतार-चढ़ाव की स्थिति पैदा हो सकती है। इसकी वजह से आयनमंडल (ionosphere) और पृथ्वी की सतह पर विद्युत धाराएं पैदा हो सकती हैं।
इन विद्युत धाराओं की वजह से ही सैटेलाइट की संचार व्यवस्था ठप पड़ सकती है और पावर ग्रिड को भी नुकसान हो सकता है। यही नहीं ध्रुवीय क्षेत्रों में ध्रुवीय ज्योति (auroras) भी दिखाई पड़ सकती है।
प्रवासी पक्षियों के लिए भी है खतरा
अभी जिस भू-चुंबकीय तूफान के खतरे की बात की जा रही है, उसका प्रभाव गुरुवार तक रह सकता है; और इसकी वजह से बहुत ही ऊंचाई से गुजरने वाली प्रवासी पक्षियों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है। यही नहीं बहुत ऊंचाई वाली जगह पर ध्रुवीय ज्योति भी दिख सकती है।
पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की ही इस्तेमाल करती हैं प्रवासी पक्षियां
यहां यह बता देना जरूरी है कि प्रवासी पक्षियां अपना रास्ता तय करने के लिए पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का ही इस्तेमाल करती हैं। 22-23 अप्रैल की रात में पृथ्वी से एक बड़ा भू-चुंबकीय तूफान टकराया था, जिसकी वजह से कम ऊंचाई वाली जगह पर भी ध्रुवीय ज्योति पैदा हुई थी। यह रहस्यमयी घटना लद्दाख में भी देखी गई थी और इसपर भारतीय खगोलीय वेधशाला की भी नजर थी।
सूर्य क्यों हो रहा है उग्र?
अमेरिकी अंतरिकक्ष संगठन नासा ने कहा है कि सौर चक्र (solar cycle) के तहत सूर्य अपनी गतिविधियों को लगातार बढ़ा रहा है, क्योंकि यह अपनी चरम की ओर बढ़ रहा है। पिछले हफ्ते 14 बड़े सोलर फ्लेयर की घटनाएं देखी गईं, जिसके चलते 31 कोरोनल मास इजेक्शन पैदा हुए। लेकिन, राहत की बात यह रही कि इनमें से अधिकतर की दिशा पृथ्वी की ओर नहीं रही।












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