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सौर ऊर्जा से प्लास्टिक कचरा ईंधन में बदलेगा, जानें Greenhouse गैसों का क्या निकला समाधान ?

वैज्ञानिकों ने सौर ऊर्जा आधारित एक ऐसा रिएक्टर बनाया है, जो प्लास्टिक कचरों और ग्रीन हाउस गैसों को ईंधन समेत अन्य उपयोगी चीजों में बदल सकता है। आने वाले समय में इससे बड़ा संकट दूर होने की उम्मीद है।

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प्लास्टिक का कचरा और ग्रीन हाउस गैसों का संकट पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ी चिंता का कारण है। इनकी वजह से हमारा पर्यावरण खतरे में है। मौसमी घटनाओं ने अपना रूप बदलना शुरू कर दिया है। एक्स्ट्रीम वेदर की घटनाएं दुनिया भर में हर मौसम में एक नई तबाही लेकर आ रही हैं। लेकिन, आपसे कोई कह दे कि प्रकृति से प्राप्त अनमोल तोहफे की मदद से प्लास्टिक कचरे और ग्रीन हाउस गैसों की समस्या का भी समाधान निकाला जा सकता है तो एक बार भरोसा करना मुश्किल हो सकता है। लेकिन, इंग्लैंड में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों को इसकी कुंजी हाथ लग गई है।

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    सौर ऊर्जा से प्लास्टिक कचरा-Greenhouse गैस ईंधन में बदलेगा

    सौर ऊर्जा से प्लास्टिक कचरा-Greenhouse गैस ईंधन में बदलेगा

    कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने कहा है कि एक ऐसा सिस्टम विकसित किया गया है, जो सौर ऊर्जा से संचालित होता है और वह प्लास्टिक कचरों और ग्रीन हाउस गैसों को टिकाऊ ईंधन और अन्य प्रोडक्ट में बदलने में सक्षम है। ई एंड टी की रिपोर्ट के मुताबिक सोलर पावर से संचालित यह रिएक्टर कार्बन डाइऑक्साइड और प्लास्टिक से विभिन्न तरह के प्रोडक्ट बनाने में सक्षम है, जो उद्योगों में कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकते हैं। मसलन, कार्बन डाइऑक्साइड CO2 को सिंथेसिस गैस (syngas)में बदला जा सकता है, जो कि टिकाऊ ईंधन के तौर पर उपयोगी है। वहीं प्लास्टिक बोतलों को वो glycolic acid में तब्दील किया जा सकता है, जो कि सौंदर्य प्रसाधन उद्योग में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाते हैं।

    यह सिस्टम उत्पादों के बदलाव में भी सक्षम

    यह सिस्टम उत्पादों के बदलाव में भी सक्षम

    लेकिन, यह खोज इतने तक ही सीमित नहीं है। विकसित किए गए सिस्टम के माध्यम से रिएक्टर में उपयोग किए जाने वाले उत्प्रेरकों (catalyst) को बदल कर उनसे पैदा होने वाले उत्पादों में भी बदलाव किया जा सकता है। इस शोध पत्र के सीनियर ऑथर प्रोफेसर इर्विन रीस्नर का कहना है, 'कचरे को सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करके कुछ उपयोगी चीज में बदलना, हमारी रिसर्च का मुख्य लक्ष्य है।' उन्होंने कहा, 'प्लास्टिक प्रदूषण दुनियाभर में एक बहुत बड़ी समस्या है, और कई बार हम जो प्लास्टिक रीसाइक्लिंग बिन में फेंकते हैं, वह या तो जला दिए जाते हैं या फिर लैंडफिल तक पहुंच जाते हैं।'

    एक ही रिएक्टर से दोनों समस्याओ का समाधान

    एक ही रिएक्टर से दोनों समस्याओ का समाधान

    शोधकर्ताओं ने जो सिस्टम विकसित किया है, उसमें एक एकीकृत रिएक्टर में दो अलग-अलग कंपार्टमेंट बनाए गए हैं। एक प्लास्टिक कचरे के लिए और दूसरा ग्रीन हाउस गैसों के लिए। रिएक्टर में पेरोवस्काइट (perovskite) पर आधारित एक प्रकाश अवशोषक (light absorber) इस्तेमाल किया गया है। यह अगली पीढ़ी के सोलर सेल के लिए सिलिकन का बेहतरीन विकल्प है। वैज्ञानिकों की टीम ने कई तरह के कैटलिस्ट डिजाइन किए हैं, जिसे लाइट एब्जॉर्बर के साथ एकीकृत किया गया। कैटलिस्ट को बदलकर शोधकर्ता अंतिम उत्पाद बदल पाने में सफल हुए।

    बहुत ही तेज गति से हो सकता है कचरों का निपटारा

    बहुत ही तेज गति से हो सकता है कचरों का निपटारा

    सामान्य तापमान और दबाव की स्थिति में किए गए परीक्षण से पता चला है कि रिएक्ट PET प्लास्टिक बोतलों और कार्बन डाइऑक्साइड को अलग-अलग कार्बन आधारित ईंधनों, जैसे कि कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), सिंथेसिस गैस (syngas) या फॉर्मेट के अलावा glycolic acid में आसानी से बदल सकता है। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इस तरह से उत्पादन की जो दर है, वह पारंपरिक फोटोकैटलिक CO2 कम करने की प्रक्रिया से कहीं तेज है। इस रिसर्च के को-फर्स्ट ऑथर डॉक्टर मोतिआर रहमान का कहना है, 'आमतौर पर CO2 परिवर्तन के लिए बहुत ज्यादा ऊर्जा चाहिए, लेकिन हमारे सिस्टम से आपको सिर्फ इसके लिए एक प्रकाश चाहिए और यह हानिकार चीजों को कुछ उपयोगी और टिकाऊ में बदलना शुरू कर देता है।'

    सौर ऊर्जा संचालित रीसाइकिल प्लांट बनने का भरोसा

    सौर ऊर्जा संचालित रीसाइकिल प्लांट बनने का भरोसा

    इस सिस्टम से पहले शायद इस तरह का ऐसा कुछ भी नहीं था, जो इतनी आसानी से प्लास्टिक कचरा और हानिकारक गैसों को उपयोगी बना सके। इस रिसर्च टीम को हाल ही में उनके सोलर-पावर रिएक्टर के विकास में मदद के लिए यूरोपियन रिसर्च काउंसिल से नया फंड भी मिला है। उन्हें उम्मीद है कि अगले पांच वर्षों में और ज्यादा जटिल रिएक्टर विकसित करने में सफल होंगे, जिससे एक दिन पूरा का पूरा रीसाइक्लिंग प्लांट ही सौर ऊर्जा पर आधारित हो।

    प्रकृति की मदद से मिल सकता है टिकाऊ समाधान

    प्रकृति की मदद से मिल सकता है टिकाऊ समाधान

    रीस्नर का कहना है कि कचरे को लैंडफिल में फेंकने की जगह,उसे इस्तेमाल लायक बनाना अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहतर है। इसके माध्यम से पर्यावरण संकट का भी समाधान मिल सकता है और प्रकृति को नुकसान पहुंचाने से भी बच सकते हैं। वो कहते हैं, 'और सूर्य का इस्तेमाल करके इस तरह का समाधान निकालने का मतलब है कि हम यह स्वच्छता से और टिकाऊ तरीके से कर रहे हैं।'

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