चाइनीज कंपनी का दावा- ओमिक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ सिनोवैक बूस्टर शॉट 94% तक प्रभावी
बीजिंग, 17 दिसंबर: चीन की बायोटेक फर्म सिनोवैक ने दावा किया कि उसकी कोविड -19 वैक्सीन की तीसरी खुराक कोरोना वायरस के नए ओमिक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ 94 प्रतिशत तक प्रभावी है। कंपनी की ओर से ये दावा उस स्टडी के बाद सामने आया है। जिसमें कहा गया है कि, बायोटेक फर्म सिनोवैक द्वारा निर्मित वैक्सीन ओमिक्रॉन वेरिएंट को बेअसर करने के लिए पर्याप्त एंटीबॉडीज प्रदान नहीं करती है। इस वैक्सीन के किसी के भी ब्लड सीरम में ओमिक्रॉन वेरिएंट को बेअसर करने के लिए पर्याप्त एंटीबॉडीज नहीं पाई गई।
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यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्गकॉन्ग के शोधकर्ताओं द्वारा जारी बयान के अनुसार, पूरी तरह से वैक्सीनेटेड 25 लोगों के ग्रुप को जिन्हें सिनोवैक बायोटेक की कोरोनावैक वैक्सीन दी गई थी। उनमें ओमिक्रॉन वेरिएंट से लड़ने के लिए ब्लड सीरम में पर्याप्त एंटीबॉडीज नहीं बन पाई हैं। अब कंपनी ने ग्लोबल टाइम्स को दिए एक बयान में कहा कि उन्होंने एक स्टडी की थी, जिसमें 20 लोगों को वैक्सीन के दो डोज दिए गए थे, जबकि 48 लोगों को तीसरा डोज दिया गया था।
कंपनी ने बताया कि, पहले समूह में सात और दूसरे में 45 लोगों के एंटीबॉडी ओमिक्रॉन को निष्क्रिय करने में सफल रहे। सिनोवैक ने कहा कि डेटा से पता चलता है कि, वैक्सीन का बूस्टर शॉट नए ओमिक्रॉन वैरिएंट को बेअसर करने की क्षमता को प्रभावी ढंग से बढ़ा सकता है। कंपनी के निष्कर्ष एचकेयू शोधकर्ताओं द्वारा एक प्रीप्रिंट पेपर में मंगलवार को जारी किए गए निष्कर्षों के विपरीत हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्गकॉन्ग के शोधकर्ताओं का कहना है कि पूर्ण रूप से वैक्सीनेटेड 25 लोगों के एक अन्य ग्रुप को, जिन्हें फाइजर और बायोएनटेक का वैक्सीन डोज दिया गया है। उनके अंदर नए वेरिएंट के खिलाफ एंटीबॉडीज पाई गई हैं। यह तथ्य इन कंपनियों ने अपनी जांच के बाद पिछले सप्ताह जारी किए थे और कहा था कि वैक्सीन के तीसरे शॉट के माध्यम से ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ पर्याप्त एंटीबॉडीज मिलेगी।
विश्वविद्यालय के अध्ययन ने एंटीबॉडी को निष्क्रिय करने की भी जांच की। यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्गकॉन्ग में संक्रामक बीमारियों से जुड़े विशेषज्ञ प्रोफेसर क्वोक युंग येन और उनकी टीम ने बताया कि, 25 लोगों जिन्होंने कोरोनावैक की दोनों डोज ली थी, उनमें से किसी में भी एंटीबॉडी को निष्क्रिय करने का पता लगाने योग्य स्तर नहीं पाया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, ओमिक्रॉन वैरिएंट जिसे पहली बार नवंबर की शुरुआत में खोजा गया था, वह अब तक 77 देशों में फैल चुका है।












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