Silicon Valley: भारत में सिलिकॉन वैली बनाने का सपना बुन रहे पीयूष गोयल, जानिए कैलिफोर्निया में कैसे बना टेक हब
Silicon Valley India: पीयूष गोयल चाहते हैं कि भारत की अपनी सिलिकॉन वैली हो। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने सोमवार को भारत से उद्यमियों और स्टार्ट-अप के लिए एक टाउनशिप स्थापित करने का आह्वान किया है।
गोयल ने कहा, "हमें इससे आगे जाने की आकांक्षा रखनी चाहिए। हमें अपनी खुद की सिलिकॉन वैली बनाने की आकांक्षा रखनी चाहिए। मैं जानता हूं कि बेंगलुरु भारत की सिलिकॉन वैली है। लेकिन मुझे लगता है कि अब समय आ गया है, कि हम राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम लिमिटेड (National Industrial Corridor Development Corporation Limited- NICDC) के साथ गठजोड़ करके उद्यमियों, स्टार्ट-अप, इनोवेटर्स के लिए समर्पित एक पूरी तरह से नई टाउनशिप बनाने के बारे में सोचना शुरू करें...।"

NICDC पहले से ही राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम के तहत भारत में कई टाउनशिप विकसित करने में शामिल है, जिसका मकसद स्मार्ट शहरों के रूप में नए औद्योगिक शहरों का निर्माण करना है।
असली सिलिकॉन वैली कैसा है?
कैलिफोर्निया में स्थित सिलिकॉन वैली को टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन के लिए विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त है।
"सिलिकॉन वैली" शब्द 1971 में पत्रकार डॉन होफ्लर ने गढ़ा था, जो व्यवसायी राल्फ वैर्स्ट से प्रेरित थे। 4,800 वर्ग किलोमीटर में फैले इस इलाके में 30 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं, जिनमें कई अरबपति और करोड़पति शामिल हैं। इस इलाके में फोर्ब्स फॉर्च्यून 1000 सूची की 30 से ज्यादा मल्टीनेशनल कंपनियां हैं, जैसे कि एप्पल, गूगल, मेटा, नेटफ्लिक्स, एनवीडिया, सिस्को सिस्टम्स, इंटेल, वीजा और शेवरॉन।
सिलिकॉन वैली की ऐतिहासिक जड़ें
सिलिकॉन वैली की शुरुआत 1800 के दशक के आखिर में हुई थी, जब सांता क्लारा वैली अपने बागों के लिए जानी जाती थी। यह बदलाव 1891 में रेलवे के दिग्गज लेलैंड स्टैनफोर्ड ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की स्थापना के साथ शुरू हुआ था। उस समय स्टैनफोर्ड के अध्यक्ष ने 1909 में ली डे फॉरेस्ट के ऑडियोन ट्यूब जैसे इनोवेशन का समर्थन किया था।
सिलिकॉन वैली के पिता के रूप में जाने जाने वाले स्टैनफोर्ड के शिक्षक फ्रेडरिक टर्मन ने स्टैनफोर्ड के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग को एक प्रमुख शोध प्रयोगशाला में बदलकर और हेवलेट-पैकार्ड जैसे स्थानीय व्यवसायों को वित्तपोषित करके एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सिलिकॉन वैली के विकास में उस वक्त पंख लगे, जब 1955 में विलियम शॉक्ले ने शॉक्ले सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला की स्थापना और 1957 में उनके कर्मचारियों के इस्तीफा देने के बाद फेयरचाइल्ड सेमीकंडक्टर की स्थापना की। इसके बाद रॉबर्ट नोयस और जैक किल्बी ने यूनिफाइड सर्किट की स्थापना की। 1961 में आर्थर रॉक ने अमेरिका की पहली वेंचर कैपिटल फर्म डेविस एंड रॉक की स्थापना की।
टेक्नोलॉजिकल महाशक्ति के तौर पर विकास
1970 के दशक में सिलिकॉन वैली पूरे अमेरिका में प्रसिद्ध हो गया और अटारी, एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट, ओरेकल जैसी कंपनियों की स्थापना हो गई। वहीं, 1980 के दशक में एडोब और सिस्को; 1990 के दशक में नेटस्केप, ईबे, गूगल; और बाद के दशकों में मेटा (पूर्व में फेसबुक) और टेस्ला जैसी कंपनियां भी यहां आ गई। यह क्षेत्र 1969 में स्टैनफोर्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट में अर्पानेट के चार नोड्स में एक का दफ्तर यहां खोला, जहां से इंटरनेट का फैलाव शुरू हुआ।
आज, सिलिकॉन वैली तकनीकी सफलता और इनोवेशन का पर्याय बन गई है। पीयूष गोयल का नजरिया भारत के भीतर उद्यमशीलता और तकनीकी उन्नति को बढ़ावा देने की है, लेकिन भारत के सामने कई चुनौतियां होंगी, जिसमें सबसे बड़ी चुनौती खुद की टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट की होगी। अगर भारत ऐसा करने में कामयाब होता है, तो भारत अपना सिलिकॉन वैली बनाने में भी कामयाब हो जाएगा।












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