अमेरिका के पास नहीं बचे ड्रोन, कैसे हो ISIS से जंग!
वाशिंगटन। ड्रोन वॉर जिसकी मदद से अमेरिका ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान में मौजूद तालिबान और अल कायदा के आतंकियों पर अपनी पकड़ मजबूत की थी। ड्रोन वॉर के बाद आलोचना का शिकार हुए अमेरिका के पास अब इतने ड्रोन भी नहीं है कि वह आईएसआईएस के खिलाफ मोर्चा ले सके।

यही एक वजह है कि जिस अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन का सफाया कर अल कायदा को कमजोर कर दिया था, आज वही अमेरिका आईएसआईएस के सामने बेबस और लाचार नजर आ रहा है।
खोखले साबित हो रहे सारे दावे
अमेरिका के लीडिंग न्यूजपेपर डेली बीस्ट में इससे जुड़ी एक खबर छिपी है। इस न्यूजपेपर में मिलिट्री सूत्रों का हवाला देते हुए लिखा है कि आईएसआईएस के खिलाफ अमेरिका का पूरा कैंपेन हवाई हमलों पर आधारित है लेकिन अब हवा से हो रही उसकी सारी कोशिशें कमजोर पड़ती जा रही है। यह ड्रोन ही थे जिसने पाकिस्तान के नार्थ वजीरिस्तान में छिपे तालिबानी आतंकियों की कमर तोड़कर रख दी थी।
अपनी ही सेना की कमजोरियों से अनजान ओबामा
राष्ट्रपति बराक ओबामा ने तो सितंबर में 9/11 की 13वीं बरसी पर आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई को अपनी प्राथमिकता बता डाला था लेकिन अमेरिकी सेना के अंदर बढ़ रही चिंताओं से वह शायद वाकिफ नहीं थे। सेना इस बात को लेकर परेशान थी कि जो वादा ओबामा ने दुनिया के सामने कर डाला है वह संसाधनों की कमी के चलते आखिर पूरा कैसे होगा।
डेली बीस्ट में अमेरिकी सेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि ड्रोन और दूसरे सर्विलांस एयरक्राफ्ट जो इराक और सीरिया में आईएसआईएस पर नजर रख सकते थे, सेना उनकी भारी कमी से जूझ रही है।
अमेरिका की कमी ISIS की ताकत
अब यही कमी आईएसआईएस के लिए एक बड़े फायदे में तब्दील हो गई है। आईएसआईएस अब छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट गया है और इस तरह से वह अपने खतरनाक मंसूबों को अंजाम दे रहा है। उन्हें अब इस बात की भी चिंता नहीं है कि अमेरिका आसमान से उन पर निगरानी कर उनका सफाया कर सकता है।
इसलिए कमजोर हो गया अमेरिकी इंटेलीजेंस
आईएसआईएस के खिलाफ अमेरिकी लड़ाई में अमेरिका की इंटेलीजेंस सर्विस को भी खासी आलोचना का शिकार होना पड़ा है। वहीं अमेरिकी सेना के अधिकारियों का कहना है कि आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए जरूरी सर्विलांस एयरक्राफ्ट्स ही नहीं है। इसकी वजह है अफगानिस्तान में जारी लड़ाई जो भले ही अब खत्म हो गई हो लेकिन इसका असर अभी तक सेना पर पड़ रहा है। अभी तक अमेरिका अफगानिस्तान को खासा तवज्जो दे रहा है।
पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है कि आईएसआईएस को खत्म करने के लिए जितने सर्विलांस एयरक्राफ्ट्स चाहिए उतने अब नहीं बचे हैं। बात चाहे जो भी लेकिन यह हकीकत है कि कहीं न कहीं अमेरिका अब आईएसआईएस के खिलाफ कमजोर होता जा रहा है।












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